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मंगलवार, 26 नवंबर 2013

कहानी :शर्त और अनुभव


उम्र के साथ अनुभव आता है , एक बुजुर्ग व्यक्ति और नवयुवक के बीच जो सोच तथा निर्णय का जो फर्क होता है वो अनुभव के कारण ही होता है ।

शायद आपने ये कहानी सुनी होगी . एक बार की बात है, एक शादी में लड़की वालों ने शर्त रखी की बारात में कोई बुजुर्ग नहीं आयेगे , केवल जवान ही शादी में शामिल होंगे . यह बात जब गाँव के एक बुजुर्ग राम जियावन बाबा को पता चली तो वो बोले "देखो बारात में केवल जवान लोग बुलाये गए हैं तो हो न हो कोई गड़बड़ जरुर है ". लड़के के मित्र बोले "बाबा आपको जाने को नहीं मिल रहा है इसलिए आप ऐसा बोल रहे हो ". राम जियावन बोले "नाहीं बच्चा , कुछ बात है, तभी लड़की वाले ऐसी शर्त रखे हैं ".

लड़के के पिता जी बोले "देखिये रिश्तेदारी में शादी हो रही है तो क्या गड़बड़ होगी. लड़की का भाई तो हमें भी आने से मना कर गया है ". राम जियावन बोले "देखो भैया , हम तो शादी में जायेंगे ". लड़के के पिता जी बोले "ठीक है राम जियावन आप लड़को से पूछ लीजिये की वो आप को ले के जायेंगे की नहीं ". लड़को ने मना कर दिया की हम बाबा को लेके नहीं जायेगे .

बाबा ने लड़के के छोटे भाई को बुलाया और कहा "देखो , हम शादी में जायेंगे और ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए". लड़के भाई भाई बोला "पर आप जायंगे कैसे ". बाबा बोले "वो जो कपडे और सामान वाला बक्सा जा रहा है , वैसे ही एक बक्से में हम बैठ के चले जायेंगे और वो बक्सा तुम गाड़ी से निचे मत उतरवाना ".

शादी का दिन आ गया ,केवल जवान लड़के ही बारात में शामिल हुए और बाबा बक्से में बैठ कर चल दिए . बारात लड़की के दरवाजे पर पहुंची तो बड़ी आव-भगत हुई लोग बड़े खुश वाह मज़ा आ गया कोई बड़ा नहीं है जम के खायो-पियो . नाश्ते के बाद जब रात में खाने का समय आया तो लड़की का भाई आया और बोला "भोजन तैयार हो गया है पर एक सब्जी बनना बाकी रह गयी है अगर उसे आप लोग बना ले तो आप भोजन कर सकते है अन्यथा आपको भोजन नहीं मिलेगा ".

दुल्हे के दोस्त बोले "अरे इतने लोग है सब्जी तो आराम से बन जायेगी बस आप सब सामान दे दीजिये". लड़की का भाई एक बड़ा सा मटका, जलाने के लिए लकडी और सामान ले आया और बोला "इस मटके में कोहडा (कद्दू ) है आप लोग इसकी सब्जी बना लीजिये शर्त ये है की ये मटका टूटना नहीं चाहिए ". अब सारे लड़के सोच में पड़ गए की बिना मटके को तोडे कोहडा (कद्दू ) बहार कैसे आएगा और उसकी सब्जी कैसे बनेगी .तभी किसी ने लड़की के भाई से पूछा "महाराज , ये कद्दू इस मटके में गया कैसे ?". लड़की का भाई बोला जब कद्दू बहुत छोटा था तभी उसे मटके में डाल दिया था , धीरे-धरे कद्दू बढता गया और अब वो मटके जितना बड़ा हो गया है ".

सारे युवक परेशान की अब सब्जी कैसे बनेगी ,और सोचने लगे "यही बात थी तभी बुजुर्गो को आने से मना किया था ".जब सब सोच के थक गए तो दुल्हे के छोटे भाई को याद आया की बक्से में तो राम जियावन बाबा है , उन्ही से पूछ के आते है . वह बाबा के पास जाता है और बाबा को पूरी कहानी बताता है , बाबा पूरी कहानी सुन कर बोलते है "बस इतनी सी बात ". लड़का बोलता है "हम बहुत देर से परेशान है और आप कह रहे हैं इतनी सी बात , बताइए सब्जी कैसे बनेगी ". बाबा बोले "कद्दू को मटके में ही रहने दो, मटके को आग पर रख पर पकाना शुरू करो, थोडा पानी डाल देना मटके में जब पानी मर्म हो जाये तो कद्दू को लकडी से मार के फोड़ देना और फिर नमक -मसाला डाल के पका देना , सब्जी बन जायेगी ". लड़के ने बाबा की बताई हुई बात पर अमल किया ,थोडी मेहनत के बाद सब्जी तैयार हो गयी तो लड़की वालो को खबर कर दी गयी .

लड़की के पिता जी आये और जब उन्होंने देखा की लड़को ने सब्जी बना दी है तो उन्होंने कहा "हो न हो , आप लोगों के साथ कोई बुजुर्ग जरुर आया है वरना आप को कैसे पता चला की कद्दू की सब्जी बिना कद्दू को काटे हुए भी बन सकती है ". लड़के पहले मना करते रहे की उनके साथ कोई बुजुर्ग नहीं आया है पर जब वो लोग नहीं माने तब दुल्हे के भाई ने बताया की राम जियावन बाबा आये हैं और वो बक्से में बैठे हुए हैं . लड़की के पिता जी बोले "ऐसा अनुभव केवल बुजुर्ग व्यक्ति के पास ही हो सकता है ".

मंगलवार, 21 मई 2013

बच्चों की कहानी : शेर और किशमिश

एक खूबसूरत गांव था। चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ। पहाड़ी के पीछे एक शेर रहता था। जब भी वह ऊंचाई पर चढ़कर गरजता था तो गांव वाले डर के मारे कांपने लगते थे।

कड़ाके की ठंड का समय था। सारी दुनिया बर्फ से ढंकी हुई थी। शेर बहुत भूखा था। उसने कई दिनों से कुछ नहीं खाया था। शिकार के लिए वह नीचे उतरा और गांव में घुस गया।

वह शिकार की ताक में घूम रहा था। दूर से उसे एक झोपड़ी दिखाई दी। खिड़की में से टिमटिमाते दिए की रोशनी बाहर आ रही थी। शेर ने सोचा यहां कुछ न कुछ खाने को जरूर मिल जाएगा। वह खिड़की के नीचे बैठ गया।

झोपड़ी के अंदर से बच्चे के रोने की आवाज आई। ऊं...आं... ऊं...आं..। वह लगातार रोता जा रहा था। शेर इधर-उधर देखकर मकान में घुसने ही वाला था कि उसे औरत की आवाज आई- 'चुप रहे बेटा। देखो लोमड़ी आ रही है। बाप रे, कितनी बड़ी लोमड़ी है? कितना बड़ा मुंह है इसका। कितना डर लगता है उसको देखकर।' लेकिन बच्चे ने रोना बंद नहीं किया।

मां ने फिर कहा- 'वह देखो, भालू आ गया... भालू खिड़की के बाहर बैठा है। बंद करो रोना नहीं तो भालू अंदर आ जाएगा', लेकिन बच्चे का रोना जारी रहा। उसे डराने का कोई असर नहीं पड़ा।

खिड़की के नीचे बैठा शेर सोच रहा था- 'अजीब बच्चा है यह! काश मैं उसे देख सकता। यह न तो लोमड़ी से डरता है, न भालू से।'

उसे फिर जोर की भूख सताने लगी। शेर खड़ा हो गया। बच्चा अभी भी रोए जा रहा था।

'देखो... देखो...' मां की आवाज आई, 'देखो शेर आ गया शेर। वह रहा खिड़की के नीचे।' लेकिन बच्चे का रोना, फिर भी बंद नहीं हुआ। यह सुनकर शेर को बहुत ताज्जुब हुआ और बच्चे की बहादुरी से उसको डर लगने लगा। उसे चक्कर आने लगे और बेहोश-सा हो गया।

'वह कैसे जान गई कि मैं खिड़की के पास हूं।' शेर ने सोचा।थोड़ी देर बाद उसकी जान में जान आई और उसने खिड़की के अंदर झांका। बच्चा अभी भी रो रहा था। उसे शेर का नाम सुनकर भी डर नहीं लगा।

शेर ने आज तक ऐसा कोई जीव नहीं देखा जो उससे न डरता हो। वह तो यही समझता था कि उसका नाम सुनकर दुनिया के सारे जीव डर के मारे कांपने लगते हैं, लेकिन इस विचित्र बच्चे ने मेरी भी कोई परवाह नहीं की। उसे किसी भी चीज का डर नहीं है। शेर का भी नहीं।

अब शेर को चिंता होने लगी। तभी मां की फिर आवाज सुनाई दी। 'लो अब चुप रहो। यह देखो किशमिश...।' बच्चे ने फौरन रोना बंद कर दिया। बिलकुल सन्नाटा छा गया।

शेर ने सोचा- 'यह किशमिश कौन है? बहुत खूंखार होगा।' अब तो शेर भी किशमिश के बारे में सोचकर डरने लगा। उसी समय कोई भारी चीज धम्म से उसकी पीठ पर गिरी। शेर अपनी जान बचाकर वहां से भागा। उसने सोचा कि उसकी पीठ पर किशमिश ही कूदा होगा।

असल में उसकी पीठ पर एक चोर कूदा था, जो उस घर में गाय-भैंस चुराने आया था। अंधेरे में शेर को गाय समझकर वह छत पर से उसकी पीठ पर कूद गया। डरा तो चोर भी। उसकी तो जान ही निकल गई जब उसे पता चला कि वह शेर की पीठ पर सवार है, गाय की पीठ पर नहीं।


शेर बहुत तेजी से पहाड़ी की ओर दौड़ा, ताकि किशमिश नीचे गिर पड़े, लेकिन चोर ने भी कसकर शेर को पकड़ रखा था। वह जानता था कि यदि वह नीचे गिरा तो शेर उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा। शेर को अपनी जान का डर था और चोर को अपनी जान का।

थोड़ी देर में सुबह का उजाला होने लगा। चोर को एक पेड़ की डाली दिखाई दी। उसने जोर से डाली पकड़ी और तेजी से पेड़ के ऊपर चढ़कर छिप गया। शेर की पीठ से छुटकारा पाकर उसने चैन की सांस ली।

शेर ने भी चैन की सांस ली- 'भगवान को धन्यवाद मेरी जान बचाने के लिए। किशमिश तो सचमुच बहुत भयानक जीव है' और वह भूखा-प्यासा वापस पहाड़ी पर अपनी गुफा में चला गया।