हाल में पोस्ट की गई लेख

लेबल

LATEST:


फ़िल्मी मसाला लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
फ़िल्मी मसाला लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 10 सितंबर 2012

डर्टी पिक्चर के पीछे का सच क्या है?


वे दबंग हैं, बिंदास हैं, दिलफरेब हैं और उनका कहना है कि उन्हें अपनी शर्तों पर जीना आता है। यह बात उन सैकड़ों लड़कियों के बारे में है, जो आइटम गर्ल या सेक्स सिंबल के तौर पर मर्दों की इस दुनिया पर राज कर लेना चाहती हैं। मीडिया उनके किस्सों से भरा है, कैमरे उनकी हर अदा पर टिके हैं और वे मशहूर होने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहतीं। उनके लिए इससे बेहतर वक्त कभी नहीं आया।

अगले महीने जब विद्या बालन की डर्टी पिक्चर देखने के बाद  तो हम सेक्स और ग्लैमर के बिजनेस की, हमारे इस संसार में एक सेक्सी औरत होने की कुछ हकीकतों से रूबरू होने की उम्मीद कर सकते हैं। क्योंकि यह फिल्म जिस सिल्क स्मिता की जिंदगी पर बनी बताई जा रही है, उसकी कहानी यही थी। जिन्हें नहीं मालूम थी उनको भी सिल्क के बारें में बहुत कुछ हासिल हो गई।


सिल्क स्मिता, जैसा कि आप जानते होंगे, अस्सी के दशक में साउथ की एक बेहद कामयाब ऐक्ट्रेस थीं, जिन्होंने अपनी सेक्स अपील से तहलका मचा दिया था। हिंदी सिनेमा की बिंदु और हेलन जैसा नाम उन्हें नहीं मिला, लेकिन साउथ के सिनेमा में उनके जैसा कोई नहीं हुआ। उन्होंने 450 फिल्मों में काम किया और अपने वक्त की सबसे कमाऊ ऐक्ट्रेस बनीं। उनकी सेक्स अपील का जादू इतना जबर्दस्त था कि उनके महज एक डांस को अपनी फिल्म में लेने के लिए हर फिल्मकार बेताब रहता था। सिल्क का होना फिल्म को हिट बना सकता था। 23 सितंबर 1996 को उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। तब उनकी उम्र सिर्फ 36 बरस थी।
सिल्क स्मिता 

सिल्क स्मिता को नई पीढ़ी के लोग नहीं जानते। वैसे भी सिनेमा इतना बदल गया है कि उन्हें याद रखना गैरजरूरी हो गया है। लेकिन इस बीच ग्लैमर और सेक्स की दुनिया कई गुना फैल गई है और सिनेमा या उससे बाहर देह का दबदबा ज्यादा बढ़ा है। सेक्सी होना अब उस तरह से डर्टी नहीं रह गया है और उसने मेनस्ट्रीम को कब्जा लिया है। लेकिन स्मिता की कहानी वाली दुनिया कुछ खास नहीं बदली है। हमारी दुनिया में अपनी जगह पाने की कोशिश कर रही किसी भी खूबसूरत लड़की की कहानी सिल्क जैसी हो सकती है। फर्क है तो यही कि सिल्क उस अंत तक पहुंच जाती है, जो इस कहानी की ट्रैजिडी को मुकम्मल बना देता है।

सिल्क स्मिता का असल नाम विजयलक्ष्मी था और उनका जन्म आंध्र के एक गांव एलुरु में हुआ था। गरीबी इस कदर थी कि चौथी क्लास में अपनी पढ़ाई छोड़कर उसे कुदानबक्कम आना बड़ा, जो तमिल फिल्मों की राजधानी था। वहां उन्होंने मेकअप-गर्ल के तौर पर काम शुरू किया और उनकी चाहतों ने पंख खोलने शुरू किए। छोटे गांव की एक लड़की ने कामयाबी के सपने देखे और वह दुनिया जीतने निकल पड़ीं। उन्होंने सिनेमा में कदम रखा और जल्द ही अपने डांस का सिक्का जमा लिया। सिल्क के उत्तेजक हाव-भाव, आर्ट और सेक्स अपील ने साउथ में एक नया इंद्रजाल रच दिया। सिल्क पर पैसे और शोहरत की बारिश होने लगी। जैमिनी, कमल हासन, रजनीकांत और चिरंजीवी जैसे स्टार्स के साथ उन्होंने काम किया और अपनी दुनिया की मलिका बन गईं।

सिल्क की कहानी हमारे सामने कई जटिल सवाल खड़े करती है: जब एलुरू की विजयलक्ष्मी स्टार बनने का ख्वाब देखती है, तो उसके पास क्या कोई चॉइस होती है? क्या विजय से सिल्क बन जाना उसकी चॉइस थी? क्या उसके लिए यह फैसला किसी और ने नहीं लिया था? क्या उसके पास आइटम गर्ल या सेक्स बम बनने के अलावा भी कोई रास्ता हो सकता था? क्या उसकी देह ने उसकी किस्मत का फैसला कर दिया था?

ये सवाल इसलिए उठते हैं कि सिल्क ने आगे चलकर अपनी इमेज से बाहर आने की छटपटाहट दिखाई थी। एक फिल्म में उन्होंने लगातार साड़ी पहने रखी थी और अपने पति के जुल्मों का मुकाबला करती औरत का किरदार निभाया था। मोंदरम पिरै उनकी एक और संजीदा फिल्म है। लेकिन सिल्क के लिए वह रास्ता ज्यादा दूर नहीं जा सकता था। बाजार को सिल्क की जरूरत थी, विजया की नहीं।


यह अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने का फंडा भी सिल्क की कहानी से सवालों के घेरे में आ जाता है। आप शर्तें तय करते हैं, लेकिन क्या दुनिया उन्हें लागू होने देगी? यह जानकर आपको कतई हैरानी नहीं होगी कि इस बेहद कामयाब ऐक्ट्रेस की निजी जिंदगी बिखरती रही। उनके लव अफेयर्स नाकाम होते रहे। उन्होंने फिल्म प्रॉडक्शन में हाथ आजमाए और नाकाम रहीं। फिर सिनेमा का ट्रेंड बदलने लगा और सिल्क के अलावा दूसरे फॉर्म्युले तलाशे जाने लगे। प्राइवेट और पब्लिक लाइफ में नाकाम होती सिल्क गहरे डिप्रेशन की कैद में चली गईं और आखिर में उनकी वह खूबसूरत देह, जिसे लाखों मर्द लालसा से देखने थिएटर के अंधेरे में सांस रोक कर बैठा करते थे, छत से लटकती बरामद हुई।

क्या सिल्क का यही अंत होना था? क्या यह अंत उस वजह से था कि वह सिल्क स्मिता थीं? लेकिन इससे भी बड़ा सवाल कि क्या सिल्क और उन जैसी लड़कियां नैतिकता को चैलेंज करते हुए समाज से खेलती हैं (जैसा कि अक्सर कहा जाता है) या यह समाज है जो असल में उनसे खेल रहा होता है? वे समाज के लिए चैलेंज बनती हैं या खिलौना?

सिल्क की मौत के 15 बरस बाद भी ज्यादा कुछ नहीं बदला है।

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

Sunny Leone : closer to explore and learn

से जानें और देखें 


गालियों की पाठशाला बन चुका बिग बॉस का घर एक बार फिर चर्चाओं में आ गया, पॉर्न स्‍टार सन्‍नी लिओन के कारण, जिसको अभी अभी बिग बॉस के घर में एंट्री मिली है, वैसे भी बिग बॉस को अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही पड़ता।



सन्‍नी लिओन को शायद कल तक कोई नहीं जानता था, मैं तो बिल्‍कुल नहीं, हो सकता है बिग बॉस के घर में आने के बाद भी, मगर हिन्‍दुस्‍तानी मीडिया ने इस समाचार को इतनी गम्‍भीरता से लिया कि आज हर कोई सन्‍नी लिओन को जानने लगा है, इस तरह के समाचार को लेकर मीडिया की दिलचस्‍पी वैसे ही मीडिया की गरिमा को हानि पहुंचाती है, जैसे कि बिग बॉस के घर में हो रही गतिविधियां रियालटी शो की गरिमा को।

बिग बॉस एक बेहतरीन कांस्‍पेट हो सकता है, मगर रातोंरात टीआरपी बटोरने के चक्‍कर में इस कांस्‍पेट पर काम कर रहे लोगों ने अपनी घटिया सोच का प्रदर्शन करते हुए इसका मलियामेट कर दिया। कुछ दिन पहले बिग बॉस का घर गालियों की पाठशाला बना हुआ था, लेकिन आज कल बिग बॉस का घर पॉर्न स्‍टार के कारण चर्चाओं में है। आखिर बिग बॉस का घर, आम हिन्‍दुस्‍तानियों के घरों को क्‍यों बिगाड़ने पर तूला हुआ है, यह बात पूरी तरह समझ से परे है, यह शो उस टीवी पर प्रसारित होता है, जिसने अपने शुरूआती दौर में एक के बाद एक बुराई पर ध्‍यान केंद्रित करते हुए बेहतरीन सीरियल दिए, जिन्‍होंने सास बहू के सीरियलों की धज्‍जियां उड़ा दी थी।

मगर बिग बॉस की गतिविधियों से ऐसा लगता है, क्‍लर्स पर सीरियलों का निर्माण करने वालों की भीतरी आंख, क्‍लर्स के लोगो में लगे मयूर पंख सी हो गई है, जो अच्‍छे बुरी की पहचान से परे है। सन्‍नी लिओन को घबराने की जरूरत नहीं, उनको जितनी पब्‍लिसिटी चाहिए, हिन्‍दुस्‍तानी मीडिया मुफत में देगा, क्‍योंकि यहां का मीडिया सन्‍नी तुम्‍हारी जैसी महिलाओं पर हमेशा मेहरबान रहा है, अगर यकीन न आए तो पूछना मल्‍लिका शेरावत से, राखी सावंत से।

Sunny Leone picture 293291
एक नजर सन्नी के बायोग्राफ पर... 
सन्‍नी लिओन 
(जन्म केरेन मल्होत्रा​​, मई 13, 1981) भारतीय-कैनेडियन अश्लील फिल्म अभिनेत्री, बिज़नेसवुमन, और मॉडल हैं। यह 2003 में पेंटहाउस पैट आँफ द इयर के लिए नामित हुई और विविड एंटरटेनमेंट के लिए अनुबंध स्टार थीं। इन्हे मैक्सिम द्वारा 2010 में 12 शीर्ष अश्लील सितारों में नामांकित किया गया था। यह स्वतंत्र मुख्यधारा की फिल्मों और टीवी शो में भी भूमिका निभा चुकी हैं।


'मल्लिका से सौ गुना ज्यादा हॉट हैं सन्‍नी लिओन 


बिग बॉस की नई प्रतिभागी सन्नी लियोन ने तहलका मचा दिया है| जब से उनके बिग बॉस के घर में जाने की ख़बरें आई हैं तब से उन्हें लेकर बॉलीवुड में कई कयास लगने लगे| सुनने में आया कि महेश भट्ट उन्हें लेकर मर्डर-3 बनाना चाहते हैं|

हालांकि भट्ट कैम्प की तरफ से तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई और सन्‍नी लिओन के प्रवक्ता ने भी इन ख़बरों को ट्विटर पर ख़ारिज कर दिया| वैसे अब सन्‍नी लिओन के दीवानों के लिस्ट में एक और नाम जुड़ गया है और वह कोई और नहीं बल्कि कमाल राशिद खान हैं| कमाल ने भी लियोन के साथ फिल्म बनाने की इच्छा जाहिर की है|

उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा सन्‍नी लिओन के पहली बॉलीवुड फिल्म मेरी ही होगी|इसका नाम नौकरी चाहिए ला होगा जो कि सेक्स कॉमेडी होगी न कि मर्डर-3 |में पहले मल्लिका को इस फिल्म में लेने की सोच रहा था मगर सन्‍नी लिओन मल्लिका से 100 गुना ज्यादा बेहतर और हॉट हैं|अब देखना ये है कि सन्नी कमाल के इस ऑफर पर क्या जवाब देती हैं|

कृपया नीचें सन्‍नी लिओन के गंदे फोटो हैं ना  देखें तो अच्छा है...
पसंद हैं तो बार-बार देखें...निचे बॉक्स में क्लिक करें...

Sunny Leone Free Picture Galleries


बुधवार, 16 नवंबर 2011

Ash & the baby are doing great : Abhishek Bachchan



Abhishek Bachchan is too excited to get some sleep. The pa thanked all his well wishers and kind heartedly informed all that both Ash and the baby are doing well.

Abhishek tweeted, "Thank you all for your prayers and good wishes. Both Aishwarya and the baby are doing great and taking some much needed rest."

He added, "I'm trying my level best to get rid of this caffeine high and get some sleep too. Don't think it'll work. TOO EXCITED!!!!"

Apparently as per hearsay, Ash and the baby will stay put at the hospital for a few days.

Bollywood star and former Miss World Aishwarya Rai Bachchan has given birth to a baby girl, her husband Abhishek announced on Wednesday.

"IT'S A GIRL!," Abhishek, also a top actor, wrote on his Twitter account, @juniorbachchan, without giving any further details.

Bachchan's father, Bollywood legend Amitabh, tweeted his joy at the new arrival: "A dada ji (a grandfather)...Ecstatic!", calling his new granddaughter "the cutest baby girl".

The baby was born at the private Seven Hills Hospital in the western Mumbai suburb of Andheri on Wednesday morning, hospital officials told.

Bollywood tweetsShobhaa De Little Miss World has arrived! Jai ho!Big B over the moon about Baby B.Someone sign up Ash as Ambassador for Girl Child, please?Worthy cause

Anupam Kher CONGRATULATIONS @juniorbachchan and Ash. So so Happy. May the new arrival in the family bring more happiness, joy and peace. Love.:)

Javed Akhtar @SrBachchan. Congratulations Amitabh ji, this has evoked my memory of the day when Shweta was born. Time flies and how swiftly !!

Rohan Sippy @juniorbachchan congratulations- awesome news!!!

Boman Irani @SrBachchan Dadaji!!!!!! All of us here are delirious with joy! Bless you all! @juniorbachchan OHHHH MAAAARAAAAA BAAAAAAP!!!!! Overjoyed my darlings!!!!!!

Aman Yatan Verma @SrBachchan congrats sir..... Even more progress, prosperity and peace to u and your family.......:-)

Shreya Ghoshal "@SrBachchan: T 561 - I AM DADA to the cutest baby girl !!" awww! Congratulations:):):) When can we see her ! Do post a picture.

Karan Johar Congratulations!! Baby B had a baby girl!! @juniorbachchan!!! All the love and happiness...am sure she will be the prettiest girl ever!!!

Kamaal R Khan - KRK @juniorbachchan bro congratulations. I already told you long back tat you will get daughter. Your best time start today.

Genelia D'souza @SrBachchan congrats sir, I'm sure Jayaji n u r thrilled,, so so happy n lots n lots of love

Celina Jaitly Congratulations :) "@juniorbachchan: IT'S A GIRL!!!!!! :-)))))" Congratulations to u, jayaji aishwarya and proud daddy abhisheik and nani n nana :) @SrBachchan: T 561 - A dada ji ... Ecstatic !!!!"

Bipasha Basu OMG! So excited Baby B is Daddy to a lil Angel! Congrats Ash n @juniorbachchan n to d entire family!Welcome sweet baby girl:)

Chetan Bhagat Congrats @juniorbachchan for the baby girl!

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

लता मंगेशकर के बेहतरीन 25 गाने

LATA DIDI KO RAJESH MISHRA KA
SHAT-SHAT NAMAN

लता मंगेशकर ने कुल कितने गाने गाए हैं, इस पर बहस करने का कोई मतलब नहीं है. संख्या जितनी भी है, है. अब उतने सारे गानों में से अगर सिर्फ 25 बेहतरीन गानों का चुनाव करना हो तो? ज़ाहिर है कि पसंद अपनी-अपनी ख़याल अपना अपना वाली बात होगी. कोई भी चयन निर्विवाद हो ही नहीं सकता. लेकिन मुझे ऐसे सारे प्रयास अच्छे लगते है. इसलिए कि इसी बहाने कुछ ऐसे गाने भी याद आ जाते हैं जो हमारी यादों की अलमारी में ज़रा पीछे चले गए हैं.

लता जी की 80 वीं वर्षगांठ पर बहुत सारे अखबारों ने, टी वी चैनलों ने ऐसी सूचियां पेश कीं. ऐसी ही एक सूची डीएनए ने भी दी, जो मुझे अपने मन के ज़्यादा क़रीब लगी.

मैंने उनकी दी हुई सूची का क्रम थोड़ा बदल दिया है. मैंने पहले उन संगीतकारों के गाने ले लिए हैं जिनको इस सूचीमें एकाधिक स्थान मिले हैं. इस सूची में बर्मन दादा के पांच, जयदेव जी के तीन, सी रामचन्द्र और मदन मोहन जी के दो-दो और खेमचन्द्र प्रकाश, नौशाद, शंकर जयकिशन, खय्याम, सज्जाद, ग़ुलाम मोहम्मद, अनिल बिस्वास, एन दत्ता, हेमंत कुमार, पण्डित रवि शंकर, लक्ष्मीकांत प्यारे लाल, आर डी बर्मन और सलिल चौधरी के एक-एक गाने हैं. जिन संगीतकारों का एक-एक गाना इस सूची में है, उनको बगैर किसी क्रम के यहां रखा गया है.


आप इस सूची को देखें और सोचें कि इसे कैसे और बेहतर और अधिक प्रतिनिधि बनाया जा सकता है. आप किन गानों को रखाना, किनको हटाना और किनको जोड़ना चाहेंगे?

यह है सूची:


फैली हुई है ये सपनों की बाहें/ हाउस नम्बर 44/ एस डी बर्मन

ठण्डी हवाएं/ नौजवान/ एस डी बर्मन

अब तो हैं तुमसे/ अभिमान/ एस डी बर्मन

कांटों से खींच के ये आंचल/ गाइड/ एस डी बर्मन

दिल जले तो जले/ टैक्सी ड्राइवर/ एस डी बर्मन

रात भी है कुछ भीगी-भीगी/ मुझे जीने दो/ जयदेव

ये दिल और उनकी निगाहों के साये/ प्रेम पर्बत/ जयदेव

अल्ला तेरो नाम/ हम दोनों/ जयदेव

ए मेरे वतन के लोगों/ ग़ैर फ़िल्मी/ सी. रामचन्द्र

धीरे-से आजा री अंखियन में/ अलबेला/ सी रामचन्द्र


माई री, मैं कासे कहूं/ दस्तक/ मदन मोहन

लग जा गले/ वो कौन थी/ मदन मोहन

आएगा आनेवाला/ महल/ खेमचन्द्र प्रकाश

उठाये जा उनके सितम/ अंदाज़/ नौशाद

हवा में उड़ता जाए/ बरसात/ शंकर जयकिशन

दिल में किसी की प्रीत जगा ले/ अमर/ अनिल बिस्वास

हाय रे वो दिन क्यूं ना आये/ अनुराधा/ पण्डित रविशंकर

मैं तुम्हीं से पूछती हूं/ ब्लैक कैट/ एन दत्ता

ऐ दिलरुबा/ रुस्तम-ए-सोहराब/ सज्जाद

कुछ दिल ने कहा/ अनुपमा/ हेमंत कुमार

ओ सजना, बरख बहार आई/ परख/ सलिल चौधरी

ठाड़े रहियो/ पाकीज़ा/ ग़ुलाम मोहम्मद

रोज़ शाम आती थी/ इम्तिहान/ लक्ष्मीकांत प्यारे लाल

बांहों में चले आओ/ अनामिका/ आर डी बर्मन

दिखाई दिये यूं/ बाज़ार/ खय्याम

Goddess of music Lata Mangeshkar

माता सरस्वती जिनके कंठ में बस्ती हैं.....


संक्षिप्त परिचय : लता मंगेशकर 


लता का परिवार
लता मंगेशकर का जन्म इंदौर, मध्यप्रदेश में सितम्बर 28, 1929 को हुआ। लता मंगेशकर का नाम विश्व के सबसे जानेमाने लोगों में आता है। इनका जन्म संगीत से जुड़े परिवार में हुआ। इनके पिता प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक थे व उनकी एक अपनी थियेटर कम्पनी भी थी। उन्होंने ग्वालियर से संगीत की शिक्षा ग्रहण की। दीनानाथ जी ने लता को तब से संगीत सिखाना शुरू किया, जब वे पाँच साल की थी। उनके साथ उनकी बहनें आशा, ऊषा और मीना भी सीखा करतीं थीं। लता अमान अली खान, साहिब और बाद में अमानत खान के साथ भी पढ़ीं। लता मंगेशकर हमेशा से ही ईश्वर के द्वारा दी गई सुरीली आवाज़, जानदार अभिव्यक्ति व बात को बहुत जल्द समझ लेने वाली अविश्वसनीय क्षमता का उदाहरण रहीं हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण उनकी इस प्रतिभा को बहुत जल्द ही पहचान मिल गई थी। जब 1942 में उनके पिता की मृत्यु हुई तब वे परिवार में सबसे बड़ी थीं इसलिये परिवार की जिम्मेदारी उन्हें के ऊपर आ गई। अपने परिवार के भरण पोषण के लिये उन्होंने 1942 से 1948 के बीच हिन्दी व मराठी में करीबन 8 फिल्मों में काम किया। उनके पार्श्व गायन की शुरुआत 1942 की मराठी फिल्म "कीती हसाल" से हुई। परन्तु गाने को काट दिया गया!!

वे पतली दुबली किन्तु दृढ़ निश्चयी थीं। उनकी बहनें हमेशा उनके साथ रहतीं। मुम्बई की लोकल ट्रेनों में सफर करते हुए उन्हें आखिरकार "आप की सेवा में (’47)" पार्श्व गायिका के तौर पर ब्रेक मिल गया। अमीरबाई , शमशाद बेगम और राजकुमारी जैसी स्थापित गायिकाओं के बीच उनकी पतली आवाज़ ज्यादा सुनी नहीं जाती थी। फिर भी, प्रमुख संगीतकार ग़ुलाम हैदर ने लता में विश्वास दिखाते हुए उन्हें मजबूर और पद्मिनी(बेदर्द तेरे प्यार को) में काम दिया जिसको थोड़ी बहुत सराहना मिली। पर उनके टेलेंट को सच्ची कामयाबी तब मिली जब 1949 में उन्होंने तीन जबर्दस्त संगीतमय फिल्मों में गाना गाया। ये फिल्में थीं- नौशाद की "अंदाज़", शंकर-जयकिशन की "बरसात" और खेमचंद प्रकाश की "महल"। 1950 आते आते पूरी फिल्म इंडस्ट्री में लता की हवा चल रही थी। उनकी "हाई-पिच" व सुरीली आवाज़ ने उस समय की भारी और नाक से गाई जाने वाली आवाज़ का असर खत्म ही कर दिया था। लता की आँधी को गीता दत्त और कुछ हद तक शमशाद बेग़म ही झेल सकीं। आशा भोंसले भी 40 के दशक के अंत में आते आते पार्श्व गायन के क्षेत्र में उतर चुकीं थी। 


शुरुआत में लता की गायिकी नूरजहां की याद दिलाया करती पर जल्द ही उन्होंने अपना खुद का अंदाज़ बना लिया था। उर्दू के उच्चारण में निपुणता प्राप्त करने हेतु उन्होंने एक शिक्षक भी रख लिया! उनकी अद्भुत कामयाबी ने लता को फिल्मी जगत की सबसे मजबूत महिला बना दिया था। 1960 के दशक में उन्होंने प्लेबैक गायकों के रायल्टी के मुद्दे पर मोहम्मद रफी के साथ गाना छोड़ दिया। उन्होंने 57-62 के बीच में एस.डी.बर्मन के साथ भी गाने नहीं गाये। पर उनका दबदबा ऐसा था कि लता अपने रास्ते थीं और वे उनके पास वापस आये। उन्होंने ओ.पी नैय्यर को छोड़ कर लगभग सभी संगीतकारों और गायकों के साथ ढेरों गाने गाये। पर फिर भी सी.रामचंद्र और मदन मोहन के साथ उनका विशेष उल्लेख किया जाता है जिन्होंने उनकी आवाज़ को मधुरता प्रदान करी। 1960-70 के बीच लता मजबूती से आगे बढ़ती गईं और इस बीच उन पर इस क्षेत्र में एकाधिकार के आरोप भी लगते रहे। 

उन्होंने 1958 की मधुमति फिल्म में "आजा रे परदेसी..." गाने के लिये फिल्म फेयर अवार्ड भी जीता। ऋषिकेष मुखर्जी की "अनुराधा" में पंडित रवि शंकर की धुनों पर गाने गाये और उन्हें काफी तारीफ़ मिली। उस समय के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू लता के गैर फिल्मी देशभक्ति गीत "ऐ मेरे वतन के लोगों..." से अति प्रभावित हुए और उन्हें 1969 में पद्म भूषण से भी नवाज़ा गया।

70 और 80 के दशक में लता ने तीन प्रमुख संगीत निर्देशकों लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, आर.डी. बर्मन और कल्याण जी-आनंदजी के साथ काम किया। चाहें सत्यम शिवम सुंदरम हो, शोले या फिर मुकद्दर का सिकंदर, तीनों में लता ही केंद्र में रहीं। 1974 में लंदन में आयोजित लता के "रॉयल अल्बर्ट हॉल" कंसेर्ट से बाकि शो के लिये रास्ता पक्का हो गया। 80 के दशक के मध्य में डिस्को के जमाने में लता ने अचानक अपना काम काफी कम कर दिया हालांकि "राम तेरी गंगा मैली" के गाने हिट हो गये थे। दशक का अंत होते होते, उनके गाये हुए "चाँदनी" और "मैंने प्यार किया" के रोमांस भरे गाने फिर से आ गये थे। तब से लता ने अपने आप को बड़े व अच्छे बैनरों के साथ ही जोड़े रखा। ये बैनर रहे आर. के. फिल्म्स (हीना), राजश्री(हम आपके हैं कौन...) और यश चोपड़ा (दिलवाले दुल्हनियाँ ले जायेंगे, दिल तो पागल है, वीर ज़ारा) आदि। ए.आर. रहमान जैसे नये संगीत निर्देशक के साथ भी, लता ने ज़ुबैदा में "सो गये हैं.." जैसे खूबसूरत गाने गाये।

आजकल, लता मास्टर दीनानाथ अस्पताल के कार्यों में व्यस्त हैं। वे क्रिकेट और फोटोग्राफी की शौकीन हैं। लता, जो आज भी अकेली हैं, अपने आप को पूरी तरह संगीत को समर्पित किया हुआ है। वे अभी भी रिकॉर्डिंग के लिये जाने से पहले कमरे के बाहर अपनी चप्पलें उतारती हैं। लता मंगेशकर जैसी शख्सियतें विरले ही जन्म लेती हैं। लता जी को जन्मदिन की अग्रिम बधाई...

26 सितम्बर को हेमन्त कुमार की 19वीं पुण्यतिथि है, तो क्यों न इस अवसर हेमन्त कुमार द्वारा संगीतबद्ध लता मंगेशकर की आवाज़ में 'खामोशी' (1969) फिल्म अमर गीत 'हमने देखी हैं इन आँखों की महकती खुश्बू' सुन लिया जाय। यह एक महान संगीतकार-गायक को हमारी श्रद्दाँजलि होगी। इस अमर गीत को गुलज़ार ने लिखा है।

शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

LISA HAYDON NEW SEX SIMBOL IN INDIA


सेक्स सिंबल से ज्यादा हूं : लीजा हेडन





फिल्म आयशा और रास्कल्स में लीजा हेडन केग्लैम अवतार को सभी ने नोटिस किया। वैसे यह हॉटमॉडल टर्न्ड ऐक्ट्रेस खुद को सेक्स सिंबल से भी आगेमानती हैं और बॉलिवुड में सफलता की पूरी उम्मीद लगाएहै। पिछले दिनों उन्होंने हमसे बात की :









Image
Image


आपने पहले एस्ट्रोनॉट और फिर योगा टीचर बननेका ख्वाब देखा था। लेकिन आप मॉडलिंग और अबफिल्मों में आ गईं। आपके पुराने सपनों का क्या हुआ

यह सच है कि फिल्मों में आने के बारे में मैंने कभी नहींसोचा था। जब मैं 19 साल की थी तब मेरे एक दोस्त नेमुझे मॉडलिंग का सजेशन दिया। इसके बाद मैंने एकएजेंसी को अप्रोच किया और मेरे पास ऑफर्स की लाइनलग गई। मॉडलिंग से ही मैं फिल्मों में आ गई। हालांकि मैंयह भी नहीं कहूंगी कि मैं फिल्मों में बाईचांस आ गई। जबमैं ऑस्ट्रेलिया में स्कूल में थी तो मैंने एक्टिंग सीखी थी।इसलिए एक्टिंग मेरे भीतर बचपन से ही है। बेशक मैं अभीभी योगा टीचर बनना चाहती हूं लेकिन इसके लिए थोड़ाटाइम लूंगी। 

फिल्मों में आप ज्यादातर हॉट गर्ल और सेक्स सिंबलके तौर पर नजर आती हैं। इसके अलावा कुछ और करने का मन नहीं करता 

अगर लोगों को लगता है कि मैं हॉट और सेक्सी हूं तो मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन मेरे नाम के साथ 'सेक्स सिंबल का टैग जोड़ना गलत है क्योंकि मैं उससे कहीं ज्यादा हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि जैसे जैसे मैंफिल्मों की दुनिया में आगे बढ़ूंगी वैसे वैसे लोगों को मेरा टैलंट देखने को मिलेगा। मुझे पूरी उम्मीद है कि मैंलोगों की उम्मीदों पर खरी उतरूंगी। 

आपने अभी सिर्फ दो फिल्में की हैं लेकिन आपके नखरे बहुत ज्यादा हैं। क्या ऐसा इसलिए क्योंकिआप सुपरमॉडल रह चुकी हैं 

शायद आप सही कह रहे हैं। मैंने मॉडलिंग में काफी अच्छा परफॉर्म किया है। लोग मुझे जानते हैं इसलिए मुझेअपने सफल होने का पूरा भरोसा है। लेकिन आप इसे मेरे नखरे नहीं कह सकते। 

आपकी परवरिश ऑस्ट्रेलिया में हुई है। आपके बोलने के अंदाज पर इसका असर साफ नजर आता है ,लेकिन बॉलिवुड में सफल होने के लिए अच्छी हिंदी आना जरूरी है। इस मामले में क्या आपकोपरेशानी होती है 

यह सच है कि मुझे कई बार इस मामले में कमेंट्स सुनने पड़ते हैं। आखिरकार जब कटरीना कैफ जैसी हीरोइन कोलोग टोक देते हैं तो फिर मैं क्या चीज हूं। मेरा मानना है कि अगर मैं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रही हूं ,तो मुझे यहां की लैंग्वेज आना बेहद जरूरी है और मैं इस पर मेहनत कर रही हूं। मैं पिछले तीन सालों से हिंदी काट्यूशन ले रही हूं और इसका असर मेरी बातचीत में आ रहा है। 

बॉलिवुड में कॉम्पिटीशन काफी तगड़ा हो गया है। ऐसे में क्या आपने इंडस्ट्री में फुलटाइम करियरबनाने का मन बना लिया है 

सच कहूं तो मैं एडवांस प्लानिंग में विश्वास नहीं रखती। इसलिए इंडस्ट्री में रहने या न रहने के बारे में मैं कुछनहीं कह सकती। फिलहाल मैं पॉजिटिव रहते हुए अपने टैलंट और मेहनत पर भरोसा रखकर काम करना चाहतीहूं। मैंने अभी तक सिर्फ दो फिल्में की हैं इसलिए मुझे अभी काफी कुछ सीखने की जरूरत है और यह प्रोसेसजारी है। मेरे पास वक्त है और मुझे पूरी उम्मीद है कि मुझे इसका फायदा मिलेगा। 

आमतौर पर ब्यूटीफुल लेडीज को ब्रेन के मामले में कमजोर समझा जाता है। आप क्या कहेंगी 

मेरे ख्याल में ब्यूटी और ब्रेन को अलग अलग देखना बकवास है। हमारे सामने तमाम ऐसे उदाहरण हैं जहांमहिलाएं खूबसूरती के साथ साथ दिमाग के मामले में भी आगे हैं। साथ ही तमाम लोग ऐसे भी हैं जो न तोदिखने में खास हैं और ना ही उनका माइंड शार्प है। 

क्या आप साउथ सिनेमा में भी ट्राई कर रही हैं 

बिल्कुल। इसमें बुराई क्या है। अगर मुझे वहां कोई अच्छा ऑफर मिलता है तो मैं उसे जरूर एक्सेप्ट करूंगी। 

अच्छे ऑफर से आपका क्या मतलब है 

अच्छा मतलब कि अगर मुझे किसी एक्शन फिल्म का ऑफर मिलता है। दरअसल मुझे एक्शन फिल्में बेहद पसंदहैं। मैं चाहती हूं किसी फिल्म में मुझे खुद से स्टंट सीन करने का मौका मिले। मुझे पूरा भरोसा है कि मैं यह सबअच्छे से कर पाऊंगी। इसके अलावा मैं कॉमेडी भी करना चाहती हूं। जाहिर है हंसना और हंसाना दोनों हीमजेदार काम हैं। 

शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

Priyanka Chopra

खूबसूरत, बिंदास, बेहतरीन
अदाकारा-
प्रियंका चोपड़ा



पूर्व विश्व सुंदरी और बॉलीवुड की पिग्गी चोप्स यानी प्रियंका चोपड़ा ने अपने शानदार अभिनय से हिंदी सिनेमा जगत में एक बेहतरीन मुकाम हासिल किया है। साल 2000 में विश्व सुंदरी का खिताब जीतने के बाद प्रियंका ने फिल्मों की ओर रुख किया। तमिल फिल्म से शुरूआत करने वाली प्रियंका की पहली फिल्म ‘थामिज़ान’ (2002) थी। फिल्मों में अपने किरदार के साथ प्रयोग करने वाली प्रियंका को बतौर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री से लेकर नेगेटिव रोल तक के लिए कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।


उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर बरेली से आने वाली प्रियंका के माता-पिता दोनों ही डॉक्टर हैं। उत्तरप्रदेश, मुंबई और विदेश से शिक्षा ग्रहण करने के बाद प्रियंका ने साल 2000 में फेमिना मिस इंडिया का खिताब जीता और उसके बाद विश्व सुंदरी का। फिल्मों में अभिनय के अलावा प्रियंका ने छोटे पर्दे पर भी अपना हाथ आजमा चुकी हैं। प्रियंका रियल्टी शो ‘खतरों के खिलाड़ी-3’ की मेजबानी भी कर चुकी हैं।



प्रियंका चोपड़ा का जन्म १८ जुलाई सन्‌ १९८२ को जमशेदपुर झारखण्ड में हुआ था। उनके पिता कैप्टन डॉ. अशोक चोपडा और माँ डॉ. मधु चोपडा थे। पिता के सेना में होने के कारण वह देश के विभिन्न हिस्सों में पली बडी। लखनऊ, रायबरेली के बाद आगे की पढाई बोस्टन (अमेरिका) में की। वह साफ्टवेयर इंजीनियर या क्रिमिनल साइकोलाजिस्ट बनना चाहती थी पर मिस इंडिण्या मुकाबले में हिस्सा लेने के लिए मुम्बई आई और मॉडलिंग के साथ जयहिंद कॉलेज में एडमिशन लिया। उसी वर्ष सन्‌ २००० में मिस इंडिण्या मुकाबले में हिस्सा लेकर 'मिस इंडिण्या वर्ल्ड' चुनी गई। और वह मिस वर्ल्ड २००० भी चुनी गयी। इसके बाद वह पूरी तरह से ग्लैमर की दुनिया में आ गई सन्‌ २००२ में तमिल फिल्म से फिल्मी दुनिया में प्रवेश किया। अगले साल उसकी फिल्में 'द हीरो- एक जासूस की प्रेम कथा' और 'अंदाज' आई जिसमें उसे सर्वश्रेष्ठ नवोदित कलाकार का फिल्म फेयर एवार्ड मिला। सन्‌ २००४ में उसे फिल्म फेयर द्वारा फिल्म एतराज के लिये सर्वश्रेष्ठ खलनायिका का एवार्ड मिला। उन्हें फिल्म मुझसे शादी करोगी (२००४), कृष, डॉन (२००६) के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म अभिनेत्री का एवार्ड मिला और सन्‌ २००८ में फिल्म फैशन २००८ के लिये उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म फेयर एवार्ड भी मिला।

प्रियंका चोपड़ा ने अपनी फिल्मों में एक से एक धांसू अदाकारी दिखाई और लोगों की पसंदीदा अभिनेत्री बन गई। प्रियंका ने सन्‌ २०१० में खतरों के खिलाडी-३ की होस्ट का रोल अदा किया। इस टीवी शो को जबर्दस्त सफलता मिली और उसके प्रति युवाओं में उसका क्रेज बहुत बड गया। प्रियंका चोपडा में बहुत सी खुबियां है वह कविताएं और छोटी कहानियां लिखती है। उन्हें पढ ने का बहुत अधिक सौक है विसेषतः लोगों की जीवनी पढना पसंद है संगीत व नृत्य में रूची है तथा समाज सेवा के कार्यक्रमों में वे हिस्सा लेती रहती है। प्रियंका की सफल-असफल फिल्में रही। हीरो, अंदाज (२००२), प्लान, कीमत, असंभव, एतराज, मुझसे शादी करोगी (२००४) ब्लैकमेल, करम, वक्त, यकीन, बरसात, ब्लफमास्टर (२००५) कृष, आपकी खातीर, डॉन (२००६), सलामे इश्क, बिगब्रदर (२००७), लव स्टोरी २०-५०, गॉड तुस्सी ग्रेट हो, चम्पु, द्रोणा, फैशन, दोस्ताना (२००८) कमीने, वाट्‌स यूवर राशी(२००९) प्यार इम्पासिबल, अंजाना अंजानी (२०१०)

प्रियंका चोपड़ा शादी करने को तैयार, लेकिन पहले कोई लड़का तो मिले




प्रियंका चोपड़ा शादी को तैयार, लड़का चाहिए, प्रियंका को हीरे के गहने बेहद पसंद हैं, अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा से शादी करने की चाह रखने वालों की कतार यूं तो बड़ी लंबी होगी, लेकिन जिसका इंतज़ार ख़ुद प्रियंका चोपड़ा को है वो पता नहीं कहां है, प्रियंका कहती हैं कि वो तो आज ही शादी करने को तैयार हैं लेकिन पहले कोई लड़का तो मिले, तो भाई प्रियंका को कैसा वर चाहिए? इस सवाल के जवाब में प्रियंका कहती हैं कि ज़्यादा कुछ नहीं चाहतीं वो बस कोई ऐसा हो जो उन्हें दिलो जान से चाहता हो, भले ही प्रियंका के पास फ़िलहाल शादी करने के लिए कोई योग्य वर नहीं है, लेकिन फिर भी गहनों की बात करने में पीछे नहीं हैं वो, प्रियंका कहती हैं उन्हें हर लड़की की तरह हीरे बहुत पसंद हैं, वो कुंदन जडि़त गहने भी पसंद करती हैं, दिल्ली में एक गहनों के ब्रैंड को प्रमोट करने पहुंची प्रियंका ने बताया कि उन्होंने अपना पहला हीरा कब और कैसे खरीदा था, प्रियंका कहती हैं की अपनी पहली कमाई से उन्होंने खुद के लिए एक 1.5 कैरट का हीरा ख़रीदा था और वो हीरा आज भी उन्हें बहुत प्रिय है, फ़िल्मों से जुड़ी कोई हस्ती हो और उनसे फ़िल्मों की बात लोग न छेड़े ऐसा तो हो नहीं सकता, जब बात निकली तो प्रियंका ने बताया कि वो इन दिनों कई फ़िल्मों में व्यस्त हैं, जिनमे से एक है 'डॉन-2', जिसकी शूटिंग हाल ही में प्रियंका ने बर्लिन में ख़त्म हुई है, इन दिनों एक नहीं कई फ़िल्मों कि शूटिंग में व्यस्त हैं प्रियंका चोपड़ा, प्रियंका कहती हैं कि इस फ़िल्म में एक बार फिर शाहरुख़ ख़ान, फरहान अख़्तर और डॉन की पूरी यूनिट के साथ काम करने में उन्हें बड़ा मज़ा आया, प्रियंका 'डॉन-2' के साथ साथ अनुराग बसु की फ़िल्म 'बर्फ़ी' भी कर रही हैं, इस फ़िल्म में प्रियंका एक मानसिक तौर पर विकलांग लड़की की भूमिका में हैं, प्रियंका कहती हैं 'बर्फ़ी' में उनका किरदार अब तक का उनका सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार है, उनका कहना है कि एक मानसिक रोगी के किरदार को पर्दे पर सही तरीके से उकेरना बेहद ज़रूरी होता है, और अगर आप चूक गए तो वो किरदार संजीदा नहीं मज़ाकिया लगने लगता है, 'बर्फ़ी' और 'डॉन 2' के अलवा प्रियंका हृतिक रोशन के साथ 'अग्निपथ' भी कर रही हैं, इस फ़िल्म का एक सीन फिल्माते वक़्त प्रियंका चोपड़ा के कपड़ों में आग लग गई थी, प्रियंका कहती हैं कि वो गणपति का एक गीत शूट कर रही थीं और गणेश जी की प्रतिमा चालीस फीट ऊँची थी, चरों ओर दिये जल रहे थे. तभी उनके लहंगे में एक दिये से आग लग गई, लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ और आग पर काबू पा लिया गया

शनिवार, 17 सितंबर 2011

Amitabh Bachchan




अमिताभ बच्चन


जन्म नाम: इन्किलाब श्रीवास्तव
जन्म तिथि: 11 अक्टूबर, 1942 
पहली फिल्म: सात हिन्दुस्तानी
पहली सफल फिल्म: जंजीर 

उपनाम: बिग बी,एंग्री यंग मेन,शहेंशाह बिग बी के नाम से जाने जाने वाले अमिताभ बॉलीवुड के शहेंशाह भी कहे जाते है| 40 साल बाद भी आज बॉलीवुड में उनके कद के सामने कोई नहीं है और 67 की उम्र में भी आज वे बॉलीवुड के सबसे व्यस्त अभिनेताओं में गिने जाते है| शुरू में जिस बाहरी आवाज़ के कारण निर्देशकों ने अमिताभ को अपनी फिल्मों से लेने को मना कर दिया था, वही आवाज़ आगे चलकर उनकी विशिष्टता बनी| 40 साल के पेशे में उन्हें दर्शकों ने अनेको नाम दिए: बिग बी , शहेंशाह, एंग्री यंग मेन आदि| अमिताभ ने न सिर्फ बड़े परदे पर खुद को साबित किया पर छोटे परदे पर भी नए आयाम स्थापित किये| धारावाहिक कौन बनेगा करोडपति से उन्होंने अपनी जिंदगी की नयी पारी की शुरुआत की थी और एक के बाद एक नया उच्चमान हासिल करते गए| एक अभिनेता के आलावा, अभिताभ एक गायक, निर्माता और सांसद की भूमिका भी निभा चुके है|

Amitabh Bachchan Hot Wallpapers
Amitabh Bachchan-BIG_B
सहस्राब्दिक के महानायक कहे जाने वाले लीजेंड अभिनेता अमिताभ। 1970 के दशक में बॉलीवुड सिनेमा के 'एंग्री यंग मैन' कहलाए। और भारतीय फिल्म इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण शख्सियत बन गए। अपने फिल्मी कैरियर में बिग बी के नाम से मशहूर अमिताभ ने अनेकों सम्मान जीते जिसमें उन्हें 4 बार नेशनल फिल्म अवार्ड्स से नवाजा गया। खास बात ये कि उनमें से तीन बार बेस्ट एक्टर की श्रेणी में मिला। 14 बार फिल्म फेयर अवार्ड्स फिल्म फेयर अवार्ड्स में सबसे ज्यादा बार बेस्ट एक्टर और बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए नामांकित होने का रिकॉर्ड बरकरार रखा। एक्टिंग के साथ प्लेबैक सिंगर, फिल्म निर्माता, टेलीविजन प्रस्तोता के रूप में भी शानदार छाप। भारतीय संसद के सदस्य रहे 1984-1987
मूल नाम: अमिताभ हरिवंश बच्चन
जन्मतिथि: 11 अक्टूबर 1942 राशि: तुला कद: 6 फुट 3 इंच बाल का रंग- काला आंख का रंग- काला जन्म स्थान- इलाहाबाद( उत्तर प्रदेश) धर्म- हिंदू शिक्षा- शेरवुड कॉलेज नैनीताल, और किरोड़ीमल कॉलेज दिल्ली युनिवर्सिटी नई दिल्ली वैवाहिक स्थित: विवाहित भाषा: हिंदी अंग्रेजी, पंजाबी
पसंददी अभिनेत्री: जया भादुड़ी, ऐश्वर्या राय पसंदीदा फिल्म: गंगा जमुना और प्यासा भोजन- भारतीय शाकाहारी भोजन
11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद(उ.प्र.) में हिंदू कायस्थ परिवार में जन्म। इनके पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन हिंदी के मशहूर कवि मां तेजी बच्चन फैसलाबाद के सिख-पंजाबी परिवार से थी। गौरतलब है कि फैसलाबपाद अब पाकिस्तान में है। अमिताभ बच्चन का प्रारंभिक नाम भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे से प्रेरित होकर 'इंकलाब' रखा। बाद में मशहूर कवि सुमित्रानंदन पंत के सुझाव पर हरिवंश राय ने नाम बदलकर अमिताभ रख दिया। जिसका अर्थ होता है 'प्रकाश जो कभी बुझता नहीं'. हलांकि इनका सरनेम श्रीवास्तव था लेकिन अमिताभ के पिता ने बच्चन उपनाम अपना लिया। इसी उपनाम से उनके सारे कार्य प्रकाशित होते थे। अमिताभ ने इसी उपनाम के साथ फिल्मों में प्रवेश किया। और यह उपनाम सभी सार्वजनिक कार्यों में इस्तेमाल होने लगा। अमिताभ ने इलाहाबाद के जनाना प्रोबधिनी एंड ब्वायज हाईस्कूल से स्कूलिंग।दिल्ली यूनिवर्सिटी के किरोड़ीमल कॉलेज से बीएससी। अमिताभ ने फिल्मों में प्रवेश से पहले कलकत्ता में शिपंग फर्म बर्ड एंड कंपनी के लिए बतौर फ्रेट ब्रोकर काम किया। अमिताभ ने फिल्म अभिनेत्री जया भादुड़ी से शादी की। इनकी दो संतानें हैं- श्वेता नंदा और अभिषेक बच्चनअभिषेक भी एक अभिनेता हैं जिन्होंने मशहूर अभिनेत्री ऐश्वर्या राय से शादी की।
1969 - सात हिंदुस्तानी, भुवन सोम 1971 - परवाना, आनंद, बॉम्बे टॉकीज, गुड्डी प्यार की कहानी 1972 - संजोग, बंसी बिरजू, पिया का घर, एक नजर, बावर्ची, रास्ते का पत्थर, बॉम्बे टू गोवा 1973 - बड़ा कबूतर, बंधे हाथ, जंजीर, गहरी चाल, अभिमान सौदागर, नमक हराम 1974 - कुंवारा बाप, दोस्त, कसौटी, बेनाम, रोटी कपड़ा और मकान, मजबूर 1975 - चुपके-चुपके, फरार, मिली, दीवार, जमीर, शोले, 1976 - दो अंजाने, छोटी सी बात, कभी-कभी, हेरा-फेरी 1977 - अलाप, चरणदास, अमर,अकबर,एंथॉनी, शतरंज के खिला़ड़ी, अदालत, इमान धरम, खून पसीना, परवरिश 1978 - बेशर्म, गंगा की सौगंध, कसमे वादे, त्रिशूल, डॉन, मुकद्दर का सिकंदर 1979 - द ग्रेट गैंबलर, गोलमाल, जुर्माना, मंजिल, मि. नटवरलाल, काला पत्थर, सुहाग 1980 - दो और दो पांच, दोस्ताना, राम बलराम, शान 1981 - चश्मे बद्दूर, कमांडर, नसीब, बरसात की एक रात, विलायती बाबू, लावारिस, सिलसिला, याराना, कालिया 1982 - सत्ते पे सत्ता, बेमिसाल, देशप्रेमी, नमक हलाल, खुद्दार, शक्ति 1983 - नास्तिक, अंधा कानून, महान, पुकार, कुली 1984 - इंकलाब, शराबी 1985 - गिरफ्तार, मर्द 1986 - आखिरी रास्ता 1987 - जलवा, कौन जीता कौन हारा 1988 - शूरमा भोपाली, शहंशाह, हीरो हीरालाल, गंगा जमुना सरस्वती 1989 - बंटवारा, तूफान, जादूगर, मैं आजाद हूं 1990 - अग्निपथ, आज का अर्जुन 1991 - हम, अजूबा, इंद्रजीत, अकेला 1992 - खुदा गवाह 1994 - इंसानियत 1996 - तेरे मेरे सपने 1997 - मृत्युदाता 1998 - मेजर साब, बड़े मिया छोटे मियां 1999 - लाल बादशाह, सूर्यवंशम, हिंदुस्तान की कसम, कोहराम ? हेलो ब्रदर, बीवी नं-1 ? 2000 - मोहब्बतें 2001 - एक रिश्ता, लगान, अक्स, कभी खुशी कभी गम 2002 - आंखें, हम किसी से कम नहीं, अग्निवर्षा, कांटे 2003 - खुशी, अरमान, मुंबई से आया मेरा दोस्त, बूम, बागबान, फंटूश 2004 - खाकी, ऐतबार, रुद्राक्ष, इंसाफ, देव, लक्ष्य, दीवार, क्यों हो गया ना, हम कौन हैं, वीर-जारा, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों 2005 - ब्लैक, वक्त : दे रेस अंगेस्ट टाइम, बंटी और बबली, परिणीता, पहेली, सरकार, विरुद्ध, रामजी लंदनवाले, दिल जो भी कहे, एक अजनबी, अमृतधारा 2006 - फैमिली, डरना जरूरी है, कभी अलविदा न कहना, बाबूल 2007 - एकलव्य: द रायल गार्ड, निशब्द, चीनी कम, शूटआउट एट लोखंडवाला, झूम बराबर झूम, राम गोपाल वर्मा की आग, ओम शांति ओम 2008 - जोधा अकबर, भूतनाथ, सरकार, सरकार राज, द लास्ट लीयर, गॉड तुस्सी ग्रेट हो 2009 - जॉनी मस्ताना, दिल्ली- 6, अलादीन, एक्सक्लूजन, तलिस्मान, जमानत, शांताराम, पा 2010 - रण, तीन पत्ती, कंधार
1970 बेस्ट न्यूकमर सात हिंदुस्तानी के लिए 1970 - सरस्वती अवार्ड आनंद के लिए 1971 - फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवार्ड आनंद के लिए 1971 - बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल, आनंद के लिए 1973 - फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवार्ड नमक हराम के लिए 1975 - बेस्ट एक्टर फॉर मिली 1977 - फिल्म फेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड अमर अकबर एंथॉनी के लिए 1978 - फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड डॉन के लिए 1980 - उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अवध सम्मान 1984 - पदमश्री, भारत सरकार का चौथा बड़ा नागरिक सम्मान 1989 - रोटरी क्लब ऑफ बॉम्बे (मुंबई) द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 1990 - फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड,पहले प्राप्तकर्ता 1991 - फिल्म हम के लिए फिल्म फेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड 1991 - अग्निपथ के लिए नेशनल फिल्म अवार्ड फॉर बेस्ट एक्टर 1995 - उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश का श्रेष्ट नागरिक सम्मान 'यश भारती सम्मान' 1997 - 'प्रतिष्ठति पूर्व छात्र अवार्ड' राजधानी के सबसे बड़े केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्लेटिनम जुबली उद्घाटन समारोह के मौके पर 2000 - फिल्मफेयर सुपर स्टार ऑफ द मिलेनियम फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवार्ड फिल्म मोहब्बतें के लिए आईआईएफए स्पेशल ऑनररी अवार्ड बेस्ट आर्टिस्ट ऑफ मिलेनियम, हीरो हंडा एंड फाइल स्टारडस्ट मैग्जीन द्वारा बॉलीवुड पीपुल्स च्वाइस अवार्ड्स: बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर फॉर मोहब्बतें आल इंडिया क्रिटिक्स एसोसिएशन (aica): बेस्ट एक्टर अवार्ड सूर्यवंशम के लिए सैंसुई व्यूवर्स च्वाइस अवार्ड्स: बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर मोहब्बते के लिए स्क्रीन वीडियोकॉन अवार्डस: बेस्ट एक्टर अवार्ड कौन बनेगा करोड़पति के लिए 2001 - इंडियन टैली अवार्ड: टीवी पर्सनैलिटी ऑफ द इयर कौन बनेगा करोड़पति के लिए हीरो-हंडा इंडियन टेलीविजन अकाडमी अवार्ड: बेस्ट हॉस्ट फॉर कौन बनेगा करोड़पति जी गोल्ड अवार्डस: क्रिटिक्स अवार्डस फॉर बेस्ट मेल फार मोहब्बतें आईआईएफए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवार्ड फॉर मोहब्ब्तें बॉलीवुड मूवी अवार्ड: क्रिटिक्स अवार्ड मेल फार मोहब्बतें फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड फार बेस्ट परफार्मेंस फार अक्स पद्मभूषण, भारत सरकार द्वारा, इंडिया का तीसरा बड़ा नागरिक सम्मान 2002 दयावती मोदी अवार्ड, भारत में कला संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र से जुडा़ बड़ा सम्मान राष्ट्रीय किशोर कुमार अवार्ड, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा, बेहतरीन अभिनय और फिल्म इंडस्ट्री में योगदान के लिए आईआईएफए पर्सनाल्टी आफ द ईयर आईकान ऑफ द मिलेनियम अवार्ड 32वें रूपा एआईएफए अवार्ड बांद्रा में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड सैंसुई व्यूवर्स च्वाइस मूवी अवार्डस द्वारा इंडियन टेलीविजन: बेस्ट टेलीविजन एंकर अवार्ड कौन बनेगा करोड़पति के लिए इंडियन टेली अवार्ड्स: टीवी एंकर आफ द ईयर फार कौन बनेगा करोड़पति के लिए 2003 एमटीवी लाइक्रा अवार्ड्स: महा स्टाइल आईकान ऑफ द इयर (पहले प्राप्तकर्ता) बॉलीवुड का लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्डस: लंदन बेस्ड एशियन गिल्ड द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड: संगीत सेरेमनी अवार्ड में फिल्मफेयर पावर अवार्ड स्टार स्क्रीन अवार्ड जोड़ी नं-1 हेमामालिनी के साथ, बागबां के लिए डिस्टिंक्शन इन एक्टिंग अवार्ड फार बागबां स्टारडस्ट अवार्ड फार लाइफटाइम अचीवमेंट सत्यजीत रे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड जी सिने अवार्ड फार लाइफटाइम अचीवमेंट बॉलीवुड मूवी अवार्ड: मोस्ट सेंसेनल एक्टर फार कांटे एफपीएफएसी अचीवर अवार्डस: अचीवर ऑफ द ईयर अवार्ड 2004 गोल्डन ग्रेड अवार्ड स्पेशल अवार्ड फार द फिल्म बागबां मोस्ट आउटस्टैंडिंग परसनैलिटी रेडियो वाइस ऑफ द ईयर अवार्ड सैंसुई व्यूवर्स च्वाइस मूवी अवार्डस: पर्सनैल्टी ऑफ द ईयर स्पोर्ट्स वर्ल्डस जोड़ी ऑफ द ईयर हेमामालिनी के साथ बागबां के लिए आनररी डॉक्टरेट झांसी विश्वविद्यालय द्वारा लिविंग लीजेंड अवार्ड फिक्की द्वारा 2005 दीनानाथ मंगेशकर अवार्ड फिल्म और संगीत में योगदान के लिए स्टार स्क्रीन अवार्ड बेस्ट एक्टर फार ब्लैक फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड फार बेस्ट परफार्मेंस फार ब्लैक फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड फार ब्लैक स्पेशल अवार्ड फार द फिल्म ब्लैक बेस्ट एक्टर फार ब्लैक 'मोस्ट पापुलर स्टार इन इंडिया' हंसा रिसर्च के नये सिंडिकेटेड स्टडी सेलेब्रटी ट्रैक में आंके गए द इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट द्वारा डायमंड ऑफ इंडिया अवार्ड इंडियन टेली अवार्डस: बेस्ट एंकर अवार्ड फार कौन बनेगा करोड़पति-2 2006 स्टारडस्ट स्टार ऑफ द इयर अवार्ड- मेल फॉर ब्लैक नेशनल फिल्म अवार्ड फार बेस्ट एक्टर फार ब्लैक आईआईएफए वाल ऑफ फेम आइफा बेस्ट एक्टर अवार्ड फार ब्लैक बॉलीवुड मूवी अवार्ड- बेस्ट एक्टर फार ब्लैक अप्सरा अवार्ड: बेस्ट एक्टर फार ब्लैक जी सिने अवार्ड बेस्ट एक्टर: मेल फार ब्लैक बॉलीविस्टा फिल्म अवार्ड्स: बेस्ट एक्टर फार ब्लैक बॉलीवुड पीपुल्स च्वाइस अवार्ड्स: बेस्ट एक्टर फार ब्लैक रेडिफ मूवी अवार्ड्स: बेस्ट एक्टर फार ब्लैक लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड: एएक्सएन एक्शन अवार्डस पर आनररी डॉक्टरेट डिग्री अपने अल्मा मटर दिल्ली यूनिवर्सिटी द्वारा 2007 भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए स्पेशल अवार्ड नौवें एमएएमआई के मौके पर चीनी कम के लिए स्टार स्क्रीन अवार्ड्स फार बेस्ट एक्टर (क्रिटिक्स) इंडियन टेलीविजन अकाडमी अवार्ड फार अचीविंग द अल्टीमेट एमीनेंस इन द वर्ल्ड ऑफ इंटरटेनमेंट 2009 स्टारडस्ट बेस्ट एक्टर अवार्ड फार द लास्ट लीयर इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में 40 साल पूरे करने पर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 11 वें एमएएमआई के मौके पर मोस्ट पावरफुल एंटरटेनर ऑफ द डिकेड अवार्ड भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए, आईफा-फिक्की द्वारा दशक के 5 सबसे प्रभावशाली भारतीयों में शुमार 2010 लाइंस गोल्ड अवार्ड: बेस्ट एक्टर फार पा फिक्की फ्रेम्स 2010 एक्सीलेंस अवार्डस: बेस्ट एक्टर फार पा टाइमलेस आईकान अवार्ड एट द हेलो हाल ऑफ फेम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मसाला अवार्ड के मौके पर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड एशियानेट फिल्म अवार्डस द्वारा स्टारडस्ट स्टार ऑफ द इयर अवार्ड- मेल फार पा नेशनल फिल्म अवार्ड फार बेस्ट एक्टर फार पा आइफा बेस्ट एक्टर अवार्ड फार पा स्टार स्क्रीन अवार्ड बेस्ट एक्टर फार पा स्टार स्क्रीन अवार्ड जोड़ी नं-1 अभिषेक बच्चन के साथ पा के लिए अप्सरा अवार्डस: लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड्स 2011 अप्सरा अवार्ड्स: बेस्ट एक्टर फार पा फिल्मफेयर स्पेशल अवार्ड भारतीय फिल्म उद्योग में 40 साल पूरा करने पर स्टारडस्ट प्राइड ऑफ इंडस्ट्री अवार्ड

अमिताभ बच्चन की नायिकाएँ

Anniversary Thursday And Have Been Receiving
Bollywood Megastar Amitabh Bachchan And His
Wife,Veteran Actress Jaya Bachchan, Rang In
Their 37th Wedding...
अपने लंबे करियर में अमिताभ बच्चन परदे पर कई नायिकाओं के नायक बने हैं। नूतन, माला सिन्हा जैसी सीनियर नायिका के भी वे नायक रहे हैं तो दूसरी ओर मनीषा कोइराला और शिल्पा शेट्टी जैसी कम उम्र की नायिकाओं के साथ भी उन्होंने ठुमके लगाए हैं। कुमुद छुगानी (बंधे हाथ), लक्ष्मी छाया (रास्ते का पत्थर), सुमिता सान्याल (आनंद) जैसी गुमनाम नायिकाओं के साथ भी उन्होंने काम किया। कुछ नायिकाओं के साथ उनकी जोड़ी खूब सराही गई।

अमिताभ-रेखा
रेखा और अमिताभ की केमेस्ट्री दर्शकों को बेहद पसंद आई। 9 फिल्मों में रेखा, अमिताभ की नायिका बनीं। लंबे करियर में अमिताभ का नाम केवल एक नायिका से जुड़ा और वो हैं रेखा। कहा जाता है कि रेखा के व्यक्तित्व में अमिताभ ने ही परिवर्तन कर उन्हें समझदार बनाया। ‘कुली’ फिल्म की शूटिंग के दौरान हुए एक्सीडेंट के बाद अमिताभ ने रेखा से अपने संबंध खत्म कर लिए। दो अंजाने, आलाप, गंगा की सौगंध, खून-पसीना, मि.नटवरलाल, मुकद्दर का सिकंदर, सुहाग, राम बलराम और सिलसिला में रेखा अमिताभ की नायिका बनीं। इनमें से पाँच फिल्में सुपरहिट रहीं। बरसों बाद आज भी अमिताभ से रेखा और रेखा से अमिताभ के बारे में प्रश्न पूछा जाता है। बीच-बीच में यह अफवाह भी उड़ती रहती है कि दोनों साथ काम करने वाले हैं, परंतु यह शायद अब मुमकिन नहीं है।

अमिताभ-जया बच्चन
कई लोगों को मानना है कि जया बच्चन के साथ अमिताभ ने अपने जीवन की श्रेष्ठ फिल्में की हैं। साथ काम करते हुए दोनों में रोमांस हुआ और जया बच्चन रील लाइफ से निकलकर रीयल लाइफ में भी अमिताभ की नायिका बनी। बंसी बिरजू, शोले, मिली, अभिमान, चुपके-चुपके, सिलसिला, जंजीर, एक नजर और कभी खुशी कभी गम जैसी यादगार फिल्में दोनों ने दी। जया बच्चन उन चुनिंदा ना‍यिकाओं में से एक हैं, जिन्हें अमिताभ के रहते हुए भी जोरदार भूमिका निभाने को मिली।‘सिलसिला’ में रेखा और जया दोनों अमिताभ की नायिकाएँ थीं।

अमिताभ-राखी
राखी अमिताभ की नायिका भी बनी और बाद में माँ भी। दोनों की साथ की गई फिल्मों को ज्यादा सफलता तो नहीं मिली, लेकिन उनकी जोड़ी को खासा सराहा गया। दोनों का रोमांस परदे पर खामोशी के साथ पेश किया गया। बेमिसाल, त्रिशूल, कभी-कभी, काला पत्थर, बरसात की एक रात, कस्मे-वादे और जुर्माना में दोनों साथ नजर आएँ। ‘शक्ति’ में राखी ने अमिताभ की माँ की भूमिका अदा की थी।

अमिताभ-परवीन बॉबी
ग्लैमरस परवीन बॉबी 8 फिल्मों में अमिताभ की नायिका बनीं और दोनों की जोड़ी को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया। दीवार, खुद्दार, शान, दो और दो पाँच, महान, मजबूर, कालिया और अमर अकबर एंथोनी में दोनों साथ दिखाई दिए। इनमें से पाँच फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रहीं। बाद में परवीन बॉबी बीमार हो गई और दोनों की जोड़ी टूट गई। अपने जीवन के आखिरी दिनों में परवीन ने अमिताभ पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, परंतु बिग-बी ने परवीन की मानसिक स्थिति को देख चुप रहना ही बेहतर समझा।

अमिताभ-ज़ीनत अमान
परवीन की तरह ज़ीनत अमान को अमिताभ की फिल्मों में ग्लैमर बढ़ाने के लिए लिया जाता था, क्योंकि अमिताभ की फिल्मों में नायिकाओं को करने को कुछ खास नहीं रहता था। द ग्रेट गैम्बलर, डॉन, लावारिस, दोस्ताना, पुकार और महान में दोनों साथ दिखाई दिए।

अमिताभ-जयाप्रदा
जया नाम की नायिका के साथ अमिताभ की जोड़ी दूसरी बार जमी। परवीन बॉबी, जीनत अमान और राखी जैसी नायिकाओं का जादू ढल गया तो जयाप्रदा ने अमिताभ के साथ जोड़ी जमाई। शराबी, गंगा जमुना सरस्वती, आखिरी रास्ता, जादूगर, इंद्रजीत और आज का अर्जुन में अमिताभ और जयाप्रदा साथ नजर आएँ। इनमें से तीन फिल्में सुपरहिट हुईं और तीन सुपरफ्लॉप।

अमिताभ-हेमा मालिनी
सत्ते पे सत्ता, देश प्रेमी, नास्तिक, नसीब, बाबुल और बागबाग में स्वप्न सुंदरी हेमा मालिनी अमिताभ की नायिका बनीं। जिसमें से तीन फिल्म सफल रही। हेमा मालिनी ने अमिताभ के बजाय धर्मेन्द्र को ज्यादा प्राथमिकता दी, इसलिए दोनों ने कम फिल्मों में साथ काम किया। हेमा मालि नी ‘गहरी चाल’ में की अमिताभ की बहन बनी थीं।
Rajesh Mishra in Studio

रविवार, 4 सितंबर 2011

AAMIR KHAN


आमिर खान : एक सफल अभिनेता



आमिर खान का रजतपट पर प्रवेश एक सुनहरे सपने जैसा है। नब्बे के दशक का देश का युवा वर्ग जब दिशाहीन होता जा रहा था। आमिर खान ने अपने आगमन से उनके सपनों को आकार दिया। युवा वर्ग परदे पर जो देखना चाहता था, उसे फिल्म 'कयामत से कयामत तक' के माध्यम से प्रस्तुत किया। आधुनिक रोमियो-जूलियट अंदाज में आई इस फिल्म से आमिर 'नेक्स्ट-डोअर' पड़ोसी लड़के की तरह युवा वर्ग के चहेते बन गए।

अपने 'पावर हाउस परफार्मेंस' से आमिर खान हर फिल्म में दर्शकों को लुभाते रहे हैं। उनकी संवेदनशीलता उनका ऐसा निजी गुण है, जिससे आमिर ने अपने समकालीन नायकों को तेजी से पीछे छोड़ दिया। कम फिल्मों में काम करना और बेहतर किरदारों का सावधानी से चयन उनकी विशेषता रही है। अपने बोंसाई कद के बावजूद उनके द्वारा निभाए गए किरदार 'लार्जर देन लाइफ' साबित हुए हैं, इसीलिए आमिर को 'परफेक्शनिस्ट एक्टर' माना जाता है।

आमिर खान की सबसे बड़ी क्षमता है अपने चरित्र को जीवंत बना देना। यही वजह रही है कि फ्‍लॉप या नए डायरेक्टर आमिर की उपस्थि‍ति से सुपरहिट की श्रेणी में आ गए। रामगोपाल वर्मा (रंगीला), धर्मेश दर्शन (राजा हिन्दुस्तानी), विक्रम भट्‍ट (गुलाम), आशुतोष गोवारीकर (लगान), जॉन मैथ्‍यू मथान (सरफरोश), फरहान अख्तर (दिल चाहता है), गजनी, ३ इदियेट्सके नाम गिनाए जा सकते हैं।


फिल्म लगान आमिर खान की ऐसी ऑल टाइम ग्रेट मास्टर पीस पीरियड फिल्म है, जो देश से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मंच पर सराही एवं पसंद की गई। ऑस्कर के लिए नामांकन एक उपलब्धि है। देश के बिजनेस मैनेजमेंट इंस्टीट्‍यूशंस में लगान को लेकर शोध प्रबंध प्रस्तुत किए गए और कक्षाओं में उसे 'टेक्स्ट फिल्म' की तरह पढ़ाया-समझाया गया।

‘तारे जमीं पर’ निर्देशक के रूप में उनकी पहली फिल्म है। अमोल गुप्ते का काम आमिर को जब पसंद नहीं आया तो उन्होंने निर्देशन की कमान अपने हाथों में ली। इस फिल्म के जरिये आमिर ने बताया कि बच्चों पर उनके माता-पिताओं को अपने सपनों को नहीं थोपना चाहिए। जरुरत है कि बच्चों के नजरिये को समझने की। आमिर खान इस फिल्म में एकमात्र स्टार हैं और वे भी मध्यांतर के ठीक पहले स्क्रीन पर आते हैं। आमिर ने अपने कुशल निर्देशन से साबित किया कि बिना सेक्स, फूहड़ कॉमेडी और बिना स्टार्स के भी सफल फिल्म बनाई जा सकती है।

आमिर की श्रेष्ठ फ़िल्में : 

1) 3 इडियट्स (2009) : 45 वर्ष के आमिर ने 20 वर्ष के स्टुडेंट की भूमिका निभाई। चेहरे से, हावभाव से, एक्टिंग से आमिर ने अपने इस रोल को जस्टिफाई किया। रणछोड़दास श्यामलदास चांचड़ के रूप में उन्होंने ऐसा अभिनय किया जो क्रिटिक्स से लेकर आम दर्शकों तक को खूब भाया। ‘3 इडियट्स’ का नाम भारत की सफलतम फिल्मों की सूची में दर्ज हो गया। मनोरंजन के साथ-साथ एजुकेशन सिस्टम पर इस फिल्म के जरिये सवाल उठाए गए।


2) गजनी (2008) : यह फिल्म शुद्ध रुप से व्यावसायिक फिल्म है। बदले के थीम पर आधारित इस फिल्म में रोमांस और एक्शन उभरकर सामने आता है। आमिर ने प्रचार के महत्व को जानकर इस फिल्म के प्रचार के लिए नई रणनीति बनाई। अपनी एट पैक एब्स बॉडी का उन्होंने जमकर प्रचार किया कि लोग फिल्म देखने के लिए टूट पड़े। यह फिल्म भारतीय फिल्म इतिहास की सफलतम फिल्मों में से एक है।

3) तारे जमीं पर (2007) : अभिनेता आमिर पर निर्देशक आमिर भारी पड़े। बिना स्टार्स, अंग-प्रदर्शन और फूहड़ हास्य के ‍सफल फिल्म बनाकर आमिर ने साबित किया कि अच्छी फिल्म बनाई जाए तो भी बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाई जा सकती है। इस फिल्म ने आमिर के कद को और ऊँचा किया।

4) रंग दे बसंती (2006) : युवा वर्ग की ताकत की ओर यह फिल्म इंगित करती है। हमारे देश में कई युवा ऐसे हैं, जिनके सामने कोई लक्ष्य नहीं है और वे निरर्थक बातों में अपनी शक्ति को जाया करते हैं। आमिर ने पूरी तरह डूबकर अपनी भूमिका अभिनीत की और बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने कामयाबी हासिल की।


5) दिल चाहता है (2001) : फरहान अख्तर जैसे नए और युवा निर्देशक के साथ आमिर ने काम करना स्वीकार किया। इस फिल्म को भारतीय फिल्म इतिहास का टर्निंग पाइंट कहा जा सकता है। ताजगी से भरी इस फिल्म ने कई लोगों को नई सोच की फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया। आमिर इस फिल्म में अनोखे हेयर स्टाइल में नजर आए और अपने अभिनय में उन्होंने नए प्रयोग किए।

6) लगान (2001) : क्रिकेट और देशभक्ति को जोड़कर आमिर और आशुतोष गोवारीकर ने एक महान फिल्म की रचना की। आमिर ने इस फिल्म पर पैसा लगाकर जोखिम मोल लिया था। भुवन का किरदार हमेशा याद किया जाएगा, जो क्रिकेट के जरिये अँग्रेजों से टकराता है। ‘लगान’ की गिनती श्रेष्ठ भारतीय फिल्मों में की जाती है।

7) सरफरोश (1999) : ‘सरफरोश’ आमिर की बेहतरीन फिल्मों में से गिनी जाती है। पुलिस वाले की भूमिका आमिर नहीं निभा सकते हैं, शायद यह बात गलत साबित करने के लिए उन्होंने ‘सरफरोश’ की।

8) रंगीला (1995) : एक टपोरी युवक की भूमिका को आमिर ने इतनी खूबसूरती के साथ पेश किया कि मिमिक्री आर्टिस्ट आमिर को इसी अंदाज में दर्शकों के सामने दोहराते हैं।


9) अंदाज अपना-अपना (1994) : कई बार देखने पर भी यह फिल्म बोर नहीं करती। आमिर-सलमान की कैमेस्ट्री खूब जमी। इस फिल्म में आमिर के अंदर का हास्य अभिनेता उभरकर सामने आया। अनेक लोग चाहते हैं कि इस फिल्म का सीक्वल बनाया जाना चाहिए।

10) जो जीता वही सिकंदर (1992) : स्कूली जीवन को यह फिल्म नजदीक से दिखाती है। आमिर ने स्कूली छात्र की भूमिका निभाई। आमिर पर फिल्माया ‘पहला नशा’ गाना लोगों को अब तक याद है। इस फिल्म को खास कामयाबी नहीं मिली, शायद यह समय से आगे की फिल्म थी।

11) कयामत से कयामत तक (1998) : किसी हीरो को लांच करने के लिए टिपीकल बॉलीवुड फिल्म। प्रेमी-प्रेमिका। घर वाले रुकावट। प्यार के लिए जीने-मरने की कसमें। लेकिन आमिर की मासूमियत लोगों को इस कदर अच्छी लगी कि धीरे-धीरे इस फिल्म ने सफलता के झंडे गाड़ दिए। इस फिल्म ने आमिर की इमेज ‘लवर बॉय’ की बना दी, जिससे बाहर निकलने में उन्हें काफी समय लगा।


आमिर खान को परदे पर देखना कुछ उस तरह है, जैसे जीवन बीमा की प्रीमियम अदा करना।

आमिर खान : एक नजर 
नाम : आमिर खान 
जन्म : 14 मार्च 1965 
शिक्षा : 12वीं 
पिता : ताहिर हुसैन
माता : जीनत हुसैन 
भाई : फैसल खान
बहन : निखत और फरहत
पत्नी : रीना दत्ता (अब तलाकशुदा) किरण राव (वर्तमान) 
बच्चे : जुनैद (बेटा), इरा (बेटी) 
पता : 11, बेला विस्टा अपार्टमेंट्‍स, पाली हिल, बान्द्रा (पश्चिम), 
मुंबई : 400050