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मंगलवार, 12 अगस्त 2014

Kitchen Helping Artical

राजेश  मिश्रा , समाचार संपादक
News Editor , Magzine /
News  Paper, Kolkata , W.B.   

रसोईघर- से रसोई सुझाव----------

राज की प्रस्तुति…  








  • सख्त नींबू या संतरे को अगर गरम पानी में कुछ देर के लिए रख दिया जाये तो उसमें से आसानी से अधिक रस निकाला जा सकता है। 
  • आलू उबालते समय पानी में थोड़ा-सा नमक मिला दें तो आलू फटेंगे नहीं और आसानी से छिल जाएँगे। 
  • करेले और अरबी को बनाने से पहले काटकर नमक के पानी में भिगो दें। करेले की कड़वाहट और अरबी की चिकनाहट निकल जाएगी। 
  • मेथी के साग की कड़वाहट हटाने के लिये उसे काटें, नमक मिलाकर, थोड़ी देर के लिये अलग रखें और दबाकर थोड़ा रस निकाल दें। 
  • फूलगोभी की सब्जी में एक छोटा चम्मच दूध या सिरका डालें तो फूलगोभी का सफ़ेद रंग पीला नहीं पड़ेगा। 
  • हरी मिर्च को फ्रिज में अधिक दिनों तक ताज़ा रखने के लिए उसके डंठल तोड़कर हवाबंद डिब्बे में रखें। 
  • आलू और प्याज को एक ही टोकरी में एक साथ न रखें। ऐसा करने से आलू जल्दी खराब हो जाते हैं। 
  • यदि दूध फटने की संभावना हो, तो थोड़ा बेकिंग पाउडर डालकर उबालें, दूध नहीं फटेगा।
  • आटा गूँधते समय पानी के साथ थोड़ा दूध मिला दें तो रोटी या पराठे अधिक नर्म और स्वादिष्ट बनते हैं। 
  • बेसन, नीबू, हल्दी और नारियल के तेल को मिलाकर बनाए गए लेप से होली के रंग आसानी से छूटते हैं और त्वचा भी स्वस्थ रहती है। 
  • पालक को पकाते समय उसमें एक चुटकी चीनी मिला दी जाए तो उसका रंग और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं। 
  • एक छोटे चम्मच शक्कर को भूरा होने तक गरम करके केक के मिश्रण में मिला देने पर केक का रंग और स्वाद बढ़ जाता है। 
  • स्वादिष्ट शोरबा बनाने के लिए प्याज, लहसुन, अदरक, पोस्ता और दो-चार दाने भुने हुए बादाम महीन पीसें और मसाले के साथ भूनें। 
  • बादाम का छिलका आसानी से उतारने के लिए उसे १५-२० मिनट के लिए गरम पानी में भिगो दें। 
  • बर्तन से खाना जलने की महक और चिपकन छुड़ाने के लिए उसमें कटे प्याज और उबला पानी डालकर पाँच मिनट तक रखें। बर्तन आसानी से साफ हो जाएगा। 
  • कच्चे नारियल की बर्फी को जल्दी और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए ताज़े दूध के स्थान पर मिल्क पाउडर का प्रयोग करें।
  • पुराने पापड़ के छोटे टुकड़े करें, पानी में उबालें, छानें, राई का छौंक लगाकर टमाटर और दही मसाले के साथ स्वादिष्ट सब्जी बनाएँ। 
  • दही खट्टा हो तो उसमें दो प्याले ठंडा पानी डालें, आधे घंटे बाद धीरे धीरे पानी गिरा दें खटास निकल जाएगी। 
  • मिर्च के डिब्बे में थोड़ी सी हींग डाल दें तो मिर्च लम्बे समय तक ख़राब नही होगी।
  • चीनी के डिब्बे में 5 -6  लौंग डाल दी जायें तो उसमें चींटिया नही आयेंगी। 
  • कढ़ी में दही मिलाने से पहले उसमें थोड़ा बेसन डालकर फेंट लें। इससे कढ़ी नरम बनेगी दही के दाने दिखाई नहीं देंगे। 
  • नूडल्स का चिपचिपापन दूर करने के लिए उबालते समय उसमें थोड़ा सा तेल डालें और उबालने के बाद ठंडा पानी। 
  • अंडे को उबालने से पहले उसमें पिन से एक छेद कर दें। इसके छिलके आसानी से उतर जाएँगे। 
  • नारियल की छिलका आराम से निकालने के लिए छिलका निकालने से पहले उसे आधे घंटे तक पानी में डालकर रखें। 
  • अंडे की ताज़गी की पहचान के लिए उसे नमक मिले ठंडे पानी में रखें। यदि डूब जाए तो ताज़ा है और यदि ऊपर आ जाए तो पुराना। 
  • बची हुई इडली और डोसे के घोल को अधिक देर तक ताज़ा रखने के लिए उस पर पान का एक पत्ता रख दें। 
  • आलू की कचौड़ी बनाते समय मसाले में थोड़ा बेसन भूनकर डाल दें। इससे कचौड़ी को बेलना आसान होता है और स्वाद भी बढ़ता है। 
  • पनीर को नर्म रखने के लिए उसे तलने के बाद गरम पानी में डालें। इसके बाद ही उसे सब्ज़ी में मिलाएँ और हल्का पकाएँ। 
  • उबले अंडों को आसानी से सफ़ाई के साथ छीलने के लिए उन्हें उबलने के बाद पाँच मिनट के लिए ठंडे पानी में डाल दें। 
  • चना, मटर जैसे चीज जल्दी गलाने के लिए उबालतले समय पानी में नमक और रिफाइड तेल की कुछ बूंदे डाल दें। 
  • स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मेहमानों के स्वागत के लिए तिरंगी बर्फी और तिरंगे सैंडविच से बेहतर और कुछ नहीं। 
  • पालक पनीर बनाने से पहले पालक की पत्तियों को एक चम्मच चीनी वाले पानी में आधे घंटे तक भिगोकर रखें, अधिक स्वादिष्ट बनेगा। 
  • अगर आलू को छीलकर काटें और पानी में एक चम्मच सिरका डालकर उबालें तो आलू अपेक्षाकृत जल्दी उबलेंगे और टूटेंगे नहीं। 
  • केले, बैंगन या आलू काटकर तुरंत पानी में रख दें, फिर चाहें जितनी देर बाद पकाएँ वे काले नहीं पड़ेंगे, न उनका स्वाद खराब होगा। 
  • तरबूज़ के छिलके सुखाकर पीस लें। ये पाउडर सोडा बाई कार्ब की जगह प्रयोग किया जा सकता है।
  • संतरे का सूखा छिलका सुखाकर डिब्बे में बंद करके रखें। सुगंधित चाय बनाने के लिए चाय का पानी उबालते समय थोड़ा सा डाल दें। 
  • पनीर को तलने के बाद यदि तुरंत उबलते नमकीन पानी या सब्ज़ी के शोरबे में डाल दिया जाय तो वह अधिक नर्म और स्पंजी होता है। 
  • धनिये और पुदीने की चटनी को पीसने के बाद उसमें दो तीन चम्मच दही मिला दिया जाए तो वह अधिक स्वादिष्ट बनती है।
  • दीपावली सुझाव--मिट्टी के दीये अच्छी तरह जलें और तेल अधिक न सोखें इसके लिए उन्हें तीन घंटे तक पानी में भिगोने के बाद सुखाकर प्रयोग करें।
  • पराठे के आटे में मोयन के लिए एक चम्मच तेल के स्थान पर दो बड़े चम्मच दही डालने से पराठे अधिक नर्म व स्वादिष्ट बनते हैं। 
  • जमाने से पहले अगर दूध में पिसी हुई बड़ी इलायची और केसर डालकर दो तीन उबाल दिए जाएँ तो ऐसा दही खाने से सर्दी नहीं होती। 
  • व्यंजन के उबलते ही गैस को धीमा करने और जहाँ तक संभव हो छोटे बर्नर के प्रयोग से ईंधन की बचत की जा सकती है।
  • दोसे के घोल में एक चम्मच चीनी मिला देने से दोसे अधिक कुरकुरे, गहरे सुनहरे और ज्यादा स्वादिष्ट बनते हैं। 
  • सूजी को हल्का भूनने के बाद ठंडा कर के हवाबंद डिब्बों में रख दिया जाए तो उसमें कीड़े नहीं लगते। 
  • पूरी का आटा माड़ते समय पानी के साथ थोड़ा दूध मिला दिया जाए तो पूरियाँ नर्म और अगर घी या तेल मिला दिया जाए तो कुरकुरी बनती हैं। 
  • जले हुए बर्तन को आसानी से साफ़ करने के लिए उसमें एक प्याला पानी, एक बूँद बर्तन धोने वाले साबुन के साथ उबालें, फिर धोएँ। 
  • केक की ५०० ग्राम आइसिंग में अगर एक चाय का चम्मच ग्लीसरीन मिला दी जाय तो आइसिंग सूखती नहीं और देर तक ताज़ी रहती है। 
  • बेसन को प्लास्टिक के थैले में रबरबैंड से मुँह बंद कर के फ्रिज में रखें तो बहुत दिनों तक ताज़ा रहेगा और उसमें कीड़े भी नहीं पड़ेंगे। 
  • टमाटर की लुगदी को चेहरे पर लगाकर लगभग बीस मिनट बाद धो देने से मुँहासे व अन्य धब्बे दूर होते है। 
  • बालों से रूसी दूर करने और उन्हें चमकदार बनाने के लिए १ एक नीबू का रस बालों में माँग बनाकर लगाएँ और दस मिनट बाद धो दें। 
  • रात में सोने से पहले नाभि में तीन बूँद जैतून का तेल डालें तो सर्दियों में ओंठ नहीं फटते और सामान्य त्वचा भी स्वस्थ होती है। 
  • रोज़ रात में सोने से पहले आँखों में एक-एक बूँद गुलाबजल डालने से आँखें स्वस्थ और सुंदर बनी रहती हैं। 
  • एक गिलास पानी में एक चाय का चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन बिना मुँह धोए पीने से पेट साफ होता है और चेहरे पर निखार आता है। 
  • तैलीय त्वचा से मुक्ति के लिए एक बड़ा चम्मच बेसन, एक छोटा चम्मच गुलाबजल, और चुटकी भर हल्दी में आधा नीबू मिलाकर बनाए गए लेप को चेहरे पर बीस मिनट तक लगाएँ और सादे पानी से धो दें। 
  • चाय के पानी में चुकंदर का रस मिलाकर ओंठों पर लगाने से उनका रंग गुलाबी होता है और वे फटते नहीं। 
  • 10 लीटर पानी में दो बड़े चम्मच गुलाबजल मिलाकर नहाने से त्वचा स्वस्थ और सुंदर बनती है। 
  • होली खेलने से पहले बालों में अगर तेल लगा लिया जाए और चेहरे पर क्रीम तो होली का रंग आसानी से छूट जाता है।
  • एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नीबू और दो चम्मच शहद मिलाकर रोज़ सुबह खाली पेट पीने से पेट ठीक रहता है, रक्त शुद्ध होता है और चेहरे पर निखार आता है। 
  • टमाटर के रस को मट्ठे में मिलाकर लगाने से धूप में जली हुई त्वचा को आराम मिलता है और वह जल्दी स्वस्थ हो जाती है। 
  • पिसी हुई दो बड़े चम्मच मसूर की दाल में चुटकी भर हल्दी और दस बूँद नीबू मिलाकर दूध में बनाया गया उबटन चेहरे पर लगाने से मुहाँसे और उसके दाग दूर होते हैं। 
  • एक बाल्टी पानी में चुटकी भर पिसी हुई फिटकरी मिलाकर नहाएँ तो त्वचा से पसीने की गंध दूर रहती है। 
  • रोज़ दोपहर में खाने के साथ एक गाजर सलाद की तरह कच्ची खाने से आँखों के चारों और पड़े काले निशान दूर हो जाते हैं। कच्चे आलू को पीसकर चेहर पर दस मिनट तक लगाएँ और फिर सादे पानी से धो दें। इससे हर प्रकार के दाग धब्बे और झांईं दूर हो कर त्वचा पर निखार आता है। 
  • टमाटर के गूदे में मट्ठा मिलाकर लगाने से धूप से जली हुई त्वचा को आराम मिलता है और वह जल्दी स्वस्थ हो जाती है। 
  • एक गिलास पानी में दो चम्मच चाय डालकर अच्छी तरह उबालें और छानकर ठंडा होने के बाद फ्रिज में रखें। धूप में बाहर निकलने पहले चेहरे और हाथों-पैरों में यह पानी लगा लेने से त्वचा झुलसेगी नहीं। 
  • गेंदे और गुलाब की पंखुड़ियाँ व नीम की पत्तियों को एक कटोरी पानी में उबालकर चेहरे पर लगाने से मुहाँसे दूर होते हैं। 
  • प्रतिदिन एक बाल्टी पानी (दस लीटर) में दो बड़े चम्मच गुलाबजल मिलाकर नहाने से त्वचा स्वस्थ व सुंदर होती है। 
  • नारियल के तेल में नीबू का रस मिलाकर सिर में लगाएँ और एक घंटे बाद धो दें। इससे सिर की खुश्की को आराम मिलता है। 
  • तुलसी के पत्तों का रस निकाल कर उसमें बराबर मात्रा मे नीबू का रस मिला कर चेहरे पर लगाने से झाईं दूर होती है। 
  • दो चम्मच सोयाबीन का आटा, एक बड़ा चम्मच दही व शहद मिलाकर बनाए गए लेप को चेहर पर लगाने से झुर्रियाँ कम होती हैं। 
  • प्रतिदिन नाखूनों पर जैतून के तेल की हल्की मालिश करने से नाखूनों का टूटना रुक जाता है। 
  • आँखों के काले घेरों से छुटकारा पाने के लिए मिल्क पाउडर में नीबू का रस मिलाकर आँखों के चारों ओर हल्की मालिश करें। 
  • कमल की पत्तियों को पीस कर झुलसी त्वचा पर लगाने से त्वचा की जलन दूर होती है और झुलसने का निशान भी चला जाता है। 
  • उड़द की छिलके वाली दाल को उबालकर उसके पानी से बाल धोने पर वे सुंदर और आकर्षक दिखाई देते हैं। 
  • एक एक-एक चम्मच ग्लिसरीन, गुलाबजल और नींबू का रस मिलाकर हाथों से मलें और सूख जाने पर धो दें। इससे सख्त हाथ मुलायम हो जाएँगे। 
  • उँगलियों पर ज़रा-सा बादाम या जैतून का तेल लेकर नियमित रूप से भौंहों और बरौनियों पर लगाने से वे घनी और चमकदार बन जाती हैं। बालों में चमक लाने के लिए १ प्याला पानी मे ३ बडे चम्मच सफेद सिरका मिलाकर लगाएँ और १५ मिनट बाद धो दें। 
  • आँखों के पास गहरे घेरों और सूजन के लिए खीरे के पतले टुकड़ों को आँखों पर रखकर बीस मिनट आराम करें, फिर चेहरा धो दें। 
  • मुहाँसों से मुक्ति पाने के लिये चुटकी भर कपूर में पुदीने और तुलसी की पत्तियों का रस मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएँ। 
  • कोमल हाथों के लिये तून के तेल से हाथों की मालिश करें, फिर इन्हें दो से पाँच मिनट तक नमक मिले पानी में भिगोकर रखें। 
  • सुंदर चेहरे के लिये बदाम, गुलाब के फूल, चिरौंजी और पिसा जायफल रात को दूध में भिगोएँ और सुबह पीसकर मुख पर लगाएँ। 
  • नारियल को कसकर निकाले गए ताज़े दूध को चेहरे पर लगाने से त्वचा स्वस्थ व आकर्षक बनती है।
  • बराबर मात्रा में गाजर और खीरे का एक गिलास रस नियमित रूप से लेने पर बाल, नाखून और त्वचा स्वस्थ रहते हैं। 
  • कच्चे दूध में रूई का फाहा भिगोकर चेहरा साफ़ करने से कील मुहाँसे और झाँई दूर होकर त्वचा स्वस्थ बनती है। 
  • हल्दी और चंदन का चूर्ण दूध में भिगोकर चेहरे पर लगाने से थकी और मुरझाई त्वचा स्वस्थ होती है।
  • तरबूज़ के रस को चेहरे पर लगाएँ और सूख जाने पर धो दें। इससे दाग धब्बे दूर होते हैं तथा त्वचा साफ़ होकर निखर जाती है। 
  • मसूर की दाल और दूध के उबटन में घी मिलाकर शरीर पर लगाने से त्वचा नर्म और चमकदार बन जाती है। 
  • छह चम्मच पेट्रोलियम जेली, दो चम्मच ग्लीसरीन और दो चम्मच नीबू के रस को मिलाकर फ्रिज में एक जार में रख दें। सप्ताह में दो बार हाथ पैर में इसकी मालिश करने से रूखी त्वचा को आराम मिलता है। 
  • मेथी की पत्तियों का लेप बनाकर चेहरे पर लगाने से कील मुँहासे और झाँई दूर हो जाते हैं। 
  • त्वचा का रूखापन दूर करने के लिये जैतून का तेल, दूध और शहद बराबर मात्र में मिलाकर चेहरे पर लगाएँ और 20  मिनट बाद गुनगुने पानी से धो दे। 
  • चेहरे, हाथों और पैरों पर थोड़ा सा एरंड तैल (कैस्टर ऑयल) लगा कर हल्की मालिश करने से झुर्रियाँ दूर होती हैं। 

बुधवार, 12 सितंबर 2012

राष्ट्रीय महिला आयोग और इनके कार्य



राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन राष्ट्रीय आयोग के तहत जनवरी 1992 में, एक संवैधानिक निकाय के रूप में किया गया था। यह अधिनियम संख्या 20 के तहत पार्लियामेंट द्वारा 1990 में पारित की गई थी। महिला आयोग का काम महिलाओं के संवैधानिक हित और उनके लिए कानूनी सुरक्षा उपायों को लागू करना होता है। वह महिलाओं के सुरक्षा हित को देखते हुए कई मामलों में स्वत: संज्ञान ले सकती है। महिला आयोग बाल विवाह मुद्दे को भी देखती हैं। आयोग को राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के तहत यह अधिकार है कि वह महिला लोक अदालत लगाएं और दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961, पीएनडीटी अधिनियम 1994 के रूप में, भारतीय दंड संहिता 1860 जैसे कानून की समीक्षा कर उन्हें कठोर और अधिक प्रभावी बनाएं। आप अपनी शिकायत मौखिक, लिखित रूप से कर सकते हैं। आयोग एनसीडब्लू, एक्ट की धारा 10 के तहत स्वत: भी संज्ञान ले सकती है।

शिकायत रजिस्टर्ड करने से पहले ध्यान रखें। महिला आयोग में निम्नलिखित मुद्दों पर अपनी शिकायतें की जा सकती है।
 
घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने पर, ससुराल पक्ष या पति द्वारा प्रताड़ित किए जाने पर, पति द्वारा छोड़े जाने पर, यदि पति द्विविवाह किया हो, बलात्कार, पुलिस द्वारा प्राथमिकी इनकार करने पर, ऑफिस में सहयोगी या बॉस द्वारा लिंग भेद, यौन उत्पीड़न या क्रूरता दिखाने पर। इसके अलावा राष्ट्रीय महिला आयोग अप्रवासी भारतीय नागरिकों (एनआरआई) से शादियों की बढ़ती धोखाधड़ी के मामले भी देखती है।  दरअसल, दिनोंदिन अप्रवासी भारतीय नागरिकों (एनआरआई) द्वारा विवाह करने के बाद महिलाओं को छोड़ देने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। एनआरआई से शादियों की बढ़ती धोखाधड़ी को ध्यान में रखते हुए और ऐसी स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने एक विशेष शाखा का गठन किया है जिसमें एनआरआई के खिलाफ भारतीय महिलाओं से संबंधित शिकायतें दर्ज करवाई जा सकती है। यह सेल ऐसी महिलाओं की सभी शिकायतों को सुनकर उनका निपटारा भी करती है। एनआरआई सेल दोनों पक्षों के बीच सुलह और मध्यस्थता सहित सभी संभावित सहायता उपलब्ध करवाती है और संबंधित मसले पर शिकायतकर्ता को सुझाव भी देती है।
विशेष एनआरआई शाखा को दोहरी नागरिकता, नए कानून या अंतरराष्ट्रीय समझौतों के कार्यान्वयन तथा अन्य देशों के विवाह संबंधी कानून से जुड़ी शिकायतों के मुद्दों जैसे संबंधित क्षेत्रों में शोध और अध्ययन को भी बढ़ावा और सहयोग देने का अधिकार है।यह एनआरआई सेल देश-विदेश के गैर सरकारी संगठनों, सामाजिक संगठनों और तथा राज्य महिला आयोगों के साथ जुड़कर, उनसे सहयोग और नेटवर्किग के जरिये इस दिशा में काम करती है। आप्रवासी भारतीय मामलों के मंत्रालय ने महिला सशक्तीकरण मामले की संसदीय समिति की सिफारिश पर एनआरआई शादी से जुड़े विवाद सुलझाने के लिए महिला आयोग को राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय समिति के रूप में नामित किया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग


राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन राष्टीय आयोग के तहत जनवरी 1992 में, एक संवैधानिक निकाय के रूप में किया गया था। यह अधिनियम संख्या 20 के तहत पार्लियामेंट द्वारा 1990 में पारित की गई थी। महिला आयोग का काम महिलाओं के संवैधानिक हित और उनके लिए कानूनी सुरक्षा उपायों को लागू करना होता है। वह महिलाओं के सुरक्षा हित को देखते हुए कई मामलों में स्वत: संज्ञान ले सकती है।  यहां हम आपकी सुविधा के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग के पते और फोन नंबर दे रहे हैं। आप अपनी शिकायत यहां दर्ज करवा सकती हैं।

National Commission for Women, India
4, Deen Dayal Upadhayaya Marg,
New Delhi - 110 002
Phone: 91-11-23237166/23236988
Fax: 91-23236154
Complaints Cell: 91-11-23219750
Email: ncw@nic.in
NCW NRI Cell
National Commission for women
 4, Deen dayal upadhya Marg,
 New Delhi -110002
Telephone +91 - 11 - 23234918
Fax : +91 - 11 –23236154/ 23236988
Email : ncw.nricell@gmail.com
Website: http://ncw.nic.in/

4, Deen dayal upadhya Marg, N.Delhi -110002, Telephone : +91-11 - 23234918
Fax : +91 - 11 –23236154/23236988
Email : ncw.nricell@gmail.com
State Commission for women,
West Bengal
Second Floor, 10 Rainey Park,
Kolkata-700 019
Phone: 033-24745609, 24751324, 24745608
Website: http://www.wbcw.org/

गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

हेल्थ टिप्स : Health Tips

गर्मियों में रखें अपना खास ख्याल



मौसम का मिजाज बदल गया है और अब गर्मी अपना असर दिखाने लगी है। बदले मौसम में फिट बने रहने के लिए लाइफ स्टाइल में भी बदलाव जरूरी है। अपने रूटीन में बदलाव की शुरुआत करने की जरूरत है, ताकि आने वाले महीनों में आप पूरी तरह स्वस्थ रह सकें।


गर्मी में तमाम बीमारियां भी लोगों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे मौसम में जरूरी है कि अपने खानपान से लेकर पहनावे में भी बदलाव किया जाए। वहीं, अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। शहर की तेज गर्मी को देखते हुए जरूरी है कि पहले से ही इस मौसम के लिए अपनी प्लानिंग कर ली जाए। इससे मौसम के नकारात्मक असर से बचा जा सकेगा। एक्सपर्ट की मानें तो गर्मी ज्यादा परेशान न करे इसके लिए जरूरी है कि सुबह जल्दी उठकर अपना रूटीन बनाया जाए। खासतौर पर अपनी डाइट का ध्यान रखा जाए।

जरूरी काम दोपहर तक पूरे करें

तेज धूप से बचने के लिए जरूरी है कि अपने दिन के जरूरी कामों को दोपहर एक बजे तक पूरा कर लिया जाए। इसके लिए सुबह जल्दी उठकर अपने दिन की प्लानिंग करें। इसमें अपने जरूरी कामों की लिस्ट तैयार कर उन्हें धूप के तेज होने से पहले पूरा करने की कोशिश करें।

डाइट में शामिल करें हेल्थ ड्रिंक

गर्मी में सबसे ज्यादा जरूरत एनर्जी ड्रिंक्स की होती है। इससे बॉडी में पानी की कमी नहीं होती। गर्मी में छाछ, फ्रूट ज्यूस, मिल्क शेक, ग्रीन सलाद को शामिल करना चाहिए। सलाद में इस मौसम में आने वाले खीरा, ककड़ी भी इस्तेमाल करें।

पानी की कमी को पूरा करने के लिए तरबूज भी फायदेमंद होगा। नाश्ते में भी ज्यूस लेने की आदत शुरू कर दें, इससे दिनभर एनर्जी बनी रहेगी। लंच में हल्का खाना लें। इस मौसम में स्पाइसी खाना लेने से बचें। अगर जरूरी है तो सिर्फ डिनर में ही लें, वह भी नियमित नहीं।

लंच और डिनर के बीच एनर्जी ड्रिंक लेते रहना जरूरी है। एल्कोहलयुक्त कोल्ड ड्रिंक का उपयोग गर्मी में कम से कम करें, क्योंकि इनसे कुछ देर के लिए राहत तो मिलती है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए यह नुकसानदायक होते हैं।

फैशनेबल दिखें, कूल रहें

फैशन डिजाइनर्स के अनुसार गर्मी में कूल बने रहने के लिए कार्गाे, बरमूडा, जार्जेट, कॉटन और चिकन सूट कूल अहसास कराने के साथ ही आरामदायक भी हैं। इस मौसम में चटक रंगों के बजाए हल्के रंगों का इस्तेमाल करें। गर्मियों के लिए सफेद रंग सबसे उपयुक्त हैं।

कॉटन फ्रेब्रिक अपनाएं

गर्मी में हल्के कपड़ों के साथ-साथ फैशन भी बरकरार रखा जा सकता है। इस बार मार्केट में कॉटन फ्रेब्रिक्स की कई वैराइटीज मौजूद हैं, जो कूल फीलिंग्स के साथ ही फैशनेबल लुक भी देंगी। लेनिन और कॉटन गर्मियों के लिहाज से सबसे उपयुक्त है।

स्किन के लिए अपनाएं हर्बल पैक

गर्मियों में स्किन प्रॉब्लम से छुटकारा पाने के लिए हर्बल फेस पैक अपनाएं। गर्मियों में धूप की वजह से चेहरे पर रूखापन आ जाता है, अधिक समय तक रूखापन बने रहने से त्वचा संबंधी रोगों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं और इससे एलर्जी की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। ऐसे में हर्बल फेस पैक रूखापन हटाने के साथ ही पोषण भी प्रदान करते हैं।

चेहरे पर कपड़ा बांधकर निकलें

इन दिनों धूप तेज होने के कारण शरीर के खुले हिस्से सीधे प्रभावित होते हैं, इसलिए घर से बाहर निकलने से पूर्व चेहरे को सफेद कपड़े से बांधकर ही बाहर निकलें, इससे कानों से गर्म हवा शरीर के अंदर प्रवेश नहीं करेगी। हाथों व पैरों को भी खुला न रखें, धूप से त्वचा खराब होने के साथ ही धूल की वजह से एलर्जिक प्रॉब्लम हो सकती है।

धूप के बाद ठंडी हवा से बचें

इन दिनों दिन के समय गर्मी व धूप तेज रहती है। फिटनेस व हेल्थ कंसल्टेंट बताते हैं कि दिन में यदि आप तेज धूप में रहते हैं तो इसके तुरंत बाद एकदम ठंडी हवा में जाने से बचें। प्रायः बाहर से आते ही लोग घरों में एसी ऑन कर लेते हैं या फ्रीज का पानी इस्तेमाल करते हैं, इससे उनका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। रात्रि में सोने से पूर्व ठंडी हवा में कुछ देर टहलना बेहतर रहेगा।

आंखों का रखें ख्याल

गर्मी में बॉडी के साथ ही आंखों पर भी ज्यादा नेगेटिव असर पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि इनका भी खास ख्याल रखा जाए। चिकित्सक बताते हैं कि गर्मी के मौसम में एलर्जी कंजक्टीवाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। धूल की वजह से भी आंखों में परेशानी बढ़ जाती है, इसलिए खुली हवा या धूप में निकलने पर चश्मे का प्रयोग जरूर करें। आंखों को ठंडे पानी में थोड़े अंतराल के बाद धोते रहें। इससे ड्राइनेस दूर होती है। विटामिन सी देने वाले फलों को भी अपने आहार में शामिल करें।

ये बरतें सावधानियां

- आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मे का उपयोग करें।
- ज्यूस, मिल्क शेक जैसे एनर्जी ड्रिंक रूटीन में शामिल करें।
- ज्यादा से कम और कम से ज्यादा तापमान में जाने से पहले थोड़ा ब्रेक लें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
- पहनावे में हल्के रंगों वाले कपड़ों का इस्तेमाल करें।
- सुबह जल्दी उठें और नियमित रूप से हल्का व्यायाम करें।

इन बातों का रखें ध्यान

- सुबह के नाश्ते में ज्यूस और ग्रीन वेजिटेबल्स से बनी हुई डिश से दिन की शुरुआत करें।
- घर से बाहर निकलने से पहले पानी अधिक मात्रा में पिएं।
- लंच दोपहर 11.30-12.30 के बीच लेना शुरू करें। लंच में ग्रीन सलाद व दही को शामिल करें।
- शाम को कुछ ड्रायफ्रूट्स, फ्रूट चाट या मिल्क शेक लें, इससे बॉडी को एनर्जी मिलेगी।
- चाय का इस्तेमाल सिर्फ सुबह के समय ही करें। दिन के समय ज्यूस को विकल्प के रूप में अपनाएं।
- डिनर सोने से करीब दो घंटे पहले लें। इसमें ज्यादा स्पाइसी और ऑयली फूड का इस्तेमाल करने से बचें।
Rajesh Mishra in The Wake Office

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

महिलाओं के लिए कानून

इन्हें अपनाएं और अपनी सुरक्षा खुद करें



महिलाएं हमारे समाज में आज भी अक्सर भेदभाव का शिकार होती हैं। उन्हें घरों के भीतर ही शारीरिक और मानसिक हिंसा झेलनी पड़ती है। महिलाओं को इस तरह के अत्याचारों से बचाने और इंसाफ दिलाने के लिए दहेज कानून (498 ए) और घरेलू हिंसा निरोधक कानून बनाए गए हैं। हालांकि कई बार 498 ए के बेजा इस्तेमाल के मामले भी सामने आते हैं। महिलाओं के हितों के लिए बनाए गए इन दोनों कानूनों का सही इस्तेमाल कैसे करें, एक्सपर्ट्स से बात करके महिलाओं को सबल बनाने की कोशिश किया है...

औरत के हक में...
दहेज के लिए पति या ससुराल पक्ष के किसी दूसरे शख्स के उत्पीड़न से महिला को बचाने के लिए 1986 में आईपीसी में सेक्शन 498-ए (दहेज कानून) शामिल किया गया। अगर महिला को दहेज के लिए शारीरिक, मानसिक, आर्थिक या भावनात्मक रूप से परेशान किया जाता है तो वह दहेज कानून के तहत केस दर्ज करा सकती है। दहेज के लिए तंग करने के साथ-साथ क्रूरता और भरोसा तोड़ने को भी इसमें शामिल किया गया है। यह गंभीर और गैरजमानती अपराध है।

कब कर सकती है केस
दहेज के लिए अगर महिला का उत्पीड़न हो।
ऐसी क्रूरता, जिससे मानसिक और शारीरिक हानि हो सकती है।
शादी से पहले (रिश्ता तय होने के बाद), शादी के दौरान या शादी के बाद दहेज की मांग करने पर इस कानून के तहत मामला दर्ज कराया जा सकता है।

कहां करें शिकायत
क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल के अलावा 100 नंबर या महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 पर कभी भी (सातों दिन चौबीसों घंटे) कॉल कर या अपने इलाके के थाने में शिकायत की जा सकती है। दिल्ली में नानकपुरा के अलावा हर जिले में अलग से भी क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी, राष्ट्रीय महिला आयोग, एनजीओ आदि की डेस्क क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल में हैं। साथ ही विमिन सेल के पुलिस अधिकारियों खासकर महिला अधिकारियों को पूरी दिलचस्पी और धीरज के साथ पीड़िता की बात सुननी चाहिए ताकि वह खुलकर अपनी बात कह सके। शिकायत मिलने के बाद केस दर्ज करने से पहले पुलिस लड़के वालों को बुला लेती है। लेकिन अगर पति समझौता नहीं चाहता, न ही बातचीत करना चाहता है तो सीडब्ल्यूसी उसे हाजिर होने का प्रेशर नहीं डाल सकता। अगर दोनों पक्ष राजी हैं तो सीडब्ल्यूसी उनके बीच समझौता कराने की कोशिश करता है। जिन मामलों में लड़की या उसके घरवालों की इच्छा अलग होने की नहीं होती, वहां पुलिस की मध्यस्थता से काम हो जाता है। अगर मामला सुलझता नहीं है तो पति और उसके परिजनों के खिलाफ केस दर्ज किया जाता है।

कैसे होता है निपटान
आमतौर पर ऐसे मामलों को तीन चरणों में निपटाया जाता है :
1. काउंसलिंग : राष्ट्रीय महिला आयोग और कुछ एनजीओ आदि ने प्रफेशनल काउंसलर सीडब्ल्यूसी में नियुक्त किए हुए हैं। अगर महिला अपने पति के साथ रहना चाहती है और पुलिस को लगता है कि उसकी जान को कोई खतरा नहीं है तो उसकी और पति की काउंसलिंग के जरिए दोनों को साथ रहने के लिए तैयार किया जाता है। इसके लिए काउंसलिंग की जाती है। जरूरत पड़ने पर काउंसलर पीड़िता और आरोपी के घर भी जाते हैं। दोनों के बीच आगे की जिंदगी को लेकर कुछ बातें तय की जाती हैं।
2. मीडिएशन : दिल्ली लीगल सर्विसेज अथॉरिटी ने कानूनी सलाह के लिए महिला सेल में सीनियर वकील नियुक्त किए हैं। साथ ही, दिल्ली हाई कोर्ट लीगल सर्विसेज कमिटी की देखरेख में दोनों पक्षों के बीच मीडिएशन की कोशिश की जाती है। गरीब या पिछड़े तबके की जो महिलाएं सिर्फ अपने सामान की वापसी के मकसद से आती हैं, उन्हें भी उनका हक यहां दिला दिया जाता है। काउंसलिंग फेल हो जाए तो कोर्ट की लंबी लड़ाई से बचाने के लिए मीडिएटर के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से आपसी सहमति से अलग कराने की कोशिश होती है।
3. अदालत : बहुत से मामलों में अदालत की कोशिश भी सुलह की होती है। नाकाम होने पर शांतिपूर्ण ढंग से अलग होने को प्रॉयरिटी दी जाती है। मामला नहीं बनता तो पूरी अदालती प्रक्रिया होती है।

सबूत रखें
पति या ससुराल वालों के सताने पर चुप न रहें। जान लें, आपको उतना ही सताया जाएगा, जितना आप सहनकरना चाहेंगी।
अपने पैरंट्स, परिवार के बाकी लोगों, दोस्तों आदि को उत्पीड़न और पूरे मामले की जानकारी दें। लेटर, ई-मेल या एसएमएस के जरिए अपने परिवार, दोस्तों या रिश्तेदारों से संपर्क साधें। ऐसे ई-मेल या एसएमएस डिलीट न करें।
अगर उनसे संपर्क नहीं कर सकतीं तो ससुराल के पड़ोसियों को खुद पर हो रहे अत्याचार की जानकारी दें।
जरूरत पड़ने पर पुलिस से संपर्क करें। यह बिल्कुल न सोचें कि इससे रिश्ता टूटेगा क्योंकि आपकी चुप्पी घातक हो सकती है।
शादी में जो कुछ भी पैसा खर्च हुआ है, उसकी रसीद संभालकर रखें।
अगर मारपीट की गई है तो सरकारी अस्पताल में जाकर मेडिकल कराएं और रिपोर्ट संभालकर अपने पास रखें।
100 और महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 को अपने मोबाइल में स्पीड डायल पर रखें। परेशानी होने पर फौरन कॉल करें।

क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल के पते और फोन नंबर
1.असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल (हेडक्वॉर्टर्स), नानकपुरा, मोती बाग गुरुद्वारा के पास, नई दिल्ली-110021
फोन : 2467-3366, 2412-1234
2.असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल, साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट,पुलिस स्टेशन वसंत विहार, नई दिल्ली-110067
फोन : 2614-0186, 2615-2810,एक्स-7203, 7299
3. असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल, साउथ डिस्ट्रिक्ट पुलिस पोस्ट,अमर कॉलोनी, लाजपत नगर-4, नई दिल्ली-110024 फोन : 2648-2871, 2685-2588, एक्स-4411
4. असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल, वेस्ट डिस्ट्रिक्ट पुलिस पोस्ट,कीर्ति नगर, नई दिल्ली-110005फोन : 2591-5314, 2544-7100,2592-6101, एक्स-4240
5. असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल (हेडक्वॉर्टर्स), नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस पोस्ट,सराय रोहिल्ला, दिल्ली-110055फोन : 2396-2201, एक्स-6411, 6642
6. असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल, नॉर्थ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट,ओल्ड बिल्डिंग, प्रशांत विहार, दिल्ली-110085फोन : 2756-6476, 2732-3566
7. असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट, न्यू राजेंद्र नगर, नई दिल्ली-110060,फोन : 2573-7951, 2874-3369,एक्स-7436
8.असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल, नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट,पुलिस स्टेशन सीलमपुर, दिल्ली-110053फोन : 2256-4166
9. असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस,क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल,ईस्ट डिस्ट्रिक्ट,कृष्णा नगर, दिल्ली-110051फोन : 2209-195010. असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल, न्यू डेल्ही डिस्ट्रिक्ट,पार्ल्यामेंट स्ट्रीट, नई दिल्ली - 110001 फोन : 2336 1231, एक्स-3410, 3447

न जाने कितनी 'नीनाएं'
नीना की उम्र 58 साल है। वह दिल्ली के सबसे पॉश इलाकों में से एक में रहती थीं। वह बेहद खूबसूरत, सभ्य और क्लासी दिखती हैं। नीना ने दो-तिहाई जिंदगी अकेले काटी। बीमार मां की खातिर उन्होंने शादी न करने का फैसला किया था। नौकरी से वह इतना कमा लेती थीं कि मां-बेटी एक अच्छी जिंदगी जी सकें। 46 साल की उम्र में नीना ने जिंदगी की सबसे बड़ी भूल की। उन्होंने मैट्रिमोनियल ऐड के जरिए एक शख्स से कुछ मुलाकातों के बाद शादी का फैसला कर लिया। मां की मौत के बाद अकेलेपन से बाहर निकलने की चाह में उन्होंने यह फैसला किया। नीना के पति की पहली शादी से दो बेटियां थीं और पहली पत्नी की एक साल पहले मौत हुई थी। बड़ी बेटी अपने नाना-नानी के पास और दूसरी अपने पिता और नई मां (नीना) के साथ रहती थी। पहली पत्नी एक रईस परिवार से थी। नीना का पति अच्छे फ्लैट में रहता था और मर्सडीज चलाता था। फिर भी वह नीना के खर्चों के लिए कोई पैसा नहीं देता था। उलटे घर खर्च में पैसे देने के लिए नीना पर दबाव डालता।

दूसरे, वह पारिवारिक समारोहों में नीना को अपने साथ नहीं ले जाता था। वह ऐसा क्यों करता है, नीना ने न जाने कितनी बार पूछा, पर कोई जवाब नहीं मिला। उसे नीना का दोस्तों से मिलना बिल्कुल पसंद नहीं था। तंग आकर नीना ने अपना दायरा समेट लिया। शादी के एक साल बाद पहली बार पति ने नीना पर हाथ उठाया। करीब 10 साल तक जिल्लत भरी जिंदगी जीने के बाद एक दिन मारने के लिए उठा पति का हाथ पकड़कर नीना ने कॉलर थाम लिया। उन्होंने उसे साफ-साफ बताया कि आगे से ऐसा किया तो ठीक नहीं होगा। पति चुपचाप चला गया। शायद मार खाते-खाते महिलाएं इसे अपनी नियति समझ लेती हैं, लेकिन अगर वे हिम्मत दिखाएं तो तस्वीर बदल सकती है। बहरहाल, अब नीना की समस्या यह भी थी कि वह अपना खर्च कैसे चलाएगी। इस उम्र में फिर से नौकरी करना उसे मुश्किल लग रहा था। पति की माली हालत की उसे कोई जानकारी नहीं थी। जिस फ्लैट में वे लोग रह रहे थे, उसे भी पति ने चुपके से छोटी बेटी के नाम कर दिया था। इन सब सवालों के बावजूद बार-बार मार खाने के बाद नीना ने क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल में शिकायत दर्ज कराई। अब नीना को रोशनी की किरणें साफ नजर आ रही हैं।
(ये अंश किताब रूम 103 नानकपुरा थाना से लिए गए हैं,जिसकी लेखिका रश्मि आनंद और सुमन नलवा हैं।)

घरेलू हिंसा भी नहीं चलेगी
कब दर्ज हो सकती है शिकायत

अगर महिला के साथ मारपीट हो, उसे घर में रहने न दिया जाए, जेबखर्च न दिया जाए, मेडिकल सुविधाएं न दी जाएं, प्रॉपर्टी में जायज हक न दिया जाए, उसके जेवर या पैसे उसे न दिए जाएं, उसकी पसंद का काम न करने दिया जाए, उसकी मर्जी के खिलाफ बार-बार उससे संपर्क किया जाए, उसे या उसके परिवार को धमकी या ताने दिए जाएं, उसे बच्चा या बेटा न होने का दोषी ठहराया जाए आदि मामलों में महिला इस कानून की मदद ले सकती है।

इस कानून के दायरे में महिला के पति के अलावा पिता, भाई, देवर और प्रेमी भी आते हैं। मोटे तौर पर इस कानून के तहत पुरुषों के खिलाफ ही कार्रवाई होती है लेकिन अगर परिवार की कोई महिला भी टॉर्चर करती है तो पीड़ित महिला इस कानून का सहारा ले सकती है। हाल में महिलाओं के खिलाफ भी इस ऐक्ट के तहत शिकायत के मामले सामने आए हैं। इसी तरह पत्नी या किसी और रिश्तेदार महिला से पीड़ित पुरुष भी इस कानून का सहारा ले सकता है।

बच्चे को भी इस कानून का लाभ मिल सकता है। कोई भी बालिग उसकी ओर से शिकायत दर्ज कर सकता है।

यह सिविल ऐक्ट यानी दीवानी कानून है। इसमें दोषी को सजा का प्रावधान नहीं है लेकिन पीड़िता को राहत जरूर मुहैया कराई जाती है। हालांकि जरूरत पड़ने पर यह कानून फौजदारी में भी बदलता है, मसलन पीड़िता मारपीट से जख्मी हो जाए तो यह मामला क्रिमिनल केस में तब्दील हो जाएगा। कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हो तो भी पुलिस केस दर्ज करती है।

क्या-क्या राहतें
यह कानून महिलाओं को फिजिकल, मेंटल, इमोशनल, इकनॉमिक और सेक्सुअल वॉयलेंस से सुरक्षा प्रदान करता है।
महिला के साथ जबरन संपर्क की कोशिश, उसकी मर्जी के खिलाफ उसके काम करने की जगह या रहने की जगह जाने पर इस कानून की मदद ले सकते हैं।
स्त्रीधन को महिला से कोई नहीं ले सकता। उसके या दोनों के जॉइंट अकाउंट या लॉकर को उसकी मजीर् के खिलाफ ऑपरेट नहीं किया जा सकता।
महिला या उसके मायकेवालों के साथ मौखिक या शारीरिक हिंसा नहीं की जा सकती।ठ्ठ कोर्ट साझा मकान में से पुरुष को निकलने का आदेश दे सकता है, महिला को नहीं दे सकता।
महिला जिस हिस्से में रह रही है, पुरुष के उसमें जाने पर रोक लगाई जा सकती है।
साझा मकान या उसके किसी हिस्से को महिला की मर्जी के खिलाफ नहीं बेचा जा सकता। महिला अगर अलग रहना चाहे तो उसे किराए पर मकान मुहैया कराना पुरुष की जिम्मेदारी है। उसका गुजारा और मेडिकल का खर्च उठाना भी पुरुष की जिम्मेदारी है।
महिला को बच्चों की टेंपरेरी कस्टडी मिल सकती है।
महिला को किसी भी तरह के शारीरिक, मानसिक नुकसान की भरपाई व इलाज का खर्च मिल सकता है।

ध्यान दें
इस कानून को दूसरे कानूनों के साथ-साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। खासकर 498 ए के साथ इसके इस्तेमाल से महिला को ज्यादा राहत मिल सकती है।
तलाक या गुजारे भत्ते की अर्जी के साथ इसे दायर किया जा सकता है।
मामला अगर कोर्ट में है तो भी महिला अपने रहने का इंतजाम करने के लिए अर्जी दायर कर सकती है।

कैसे होती है कार्रवाई
महिला लोअर कोर्ट में शिकायत दर्ज कर सकती है। अगर वह घर से नहीं निकल सकती या दूसरी वजहें हैं तो वह कोर्ट द्वारा नियुक्त सर्विस प्रवाइडर को फोन कर बुला सकती है। कोर्ट सुरक्षा अधिकारी भी नियुक्त करता है, जो महिला की सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं। शिकायत के बाद कोर्ट पुलिस को आदेश देता है।
किसी भी तरह का उत्पीड़न होने पर पुलिस को बुलाएं और एफआईआर की कॉपी अपने साथ रखें।
इस कानून के तहत अदालत पीड़िता के बयान को सबसे ज्यादा अहमियत देती है। हालांकि अगर आपके पास किसी भी तरह के उत्पीड़न के सबूत हैं, तो उन्हें संभाल कर रखें और कोर्ट में पेश करें।
इस कानून के तहत केस दो महीने में सुलझ जाना चाहिए। वैसे ज्यादा वक्त भी लग जाता है।
यह दीवानी मामला है लेकिन अगर आरोपी कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करता है तो सजा का प्रावधान भी है। क्रिमिनल कोर्ट में 498 ए के तहत केस दर्ज नहीं किया जा रहा तो यह कोर्ट इस धारा के तहत केस दर्ज करने का आदेश दे सकता है।

...ताकि पिसे न पति
दहेज कानून जहां महिलाओं को सपोर्ट करता है, वहीं इसके गलत इस्तेमाल के भी मामले आए दिन सुनाई देते हैं। कई बार पति-पत्नी के बीच छोटे-मोटे झगड़े और आपसी ईगो की वजह से पत्नियां 498 ए के तहत मामला दर्ज कराने की ठान लेती हैं और ससुराल पक्ष के ज्यादातर लोगों का नाम रिपोर्ट में लिखवा देती हैं। हाल में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मामले में पति, उसके परिवार वालों और रिश्तेदार निचली अदालत में पेश किए जाएं तो अदालत उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा कर दे। इसके बाद मामला मीडिएशन सेंटर में भेज दिया जाए क्योंकि पति-पत्नी के छोटे-मोटे झगड़े अदालत की दहलीज पर पहुंचकर नासूर बन जाते हैं। सरकार 498 ए में संशोधन लाने की कोशिश कर रही है, ताकि किसी को झूठे मामलों में न फंसाया जा सके।

क्या हैं गाइडलाइंस
498 ए को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कई गाइडलाइंस दर्ज की हैं, जिनका पालन करना संबंधित अधिकारियों या निकायों के लिए जरूरी है। कानून के सही इस्तेमाल के लिए इन्हें फॉलो करना जरूरी है।

पुलिस के लिए
डीसीपी या अडिशनल डीसीपी की इजाजत के बिना 498 ए के तहत केस दर्ज नहीं किया जा सकता।
मामले की जांच सब-इंसपेक्टर और उससे सीनियर अधिकारी ही कर सकता है। हर 15 दिन में एसीपी और हर महीने डीसीपी या अडिशनल डीसीपी रैंक का अधिकारी जांच-पड़ताल की प्रोग्रेस को देखे।
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी अच्छी तरह पड़ताल और डीसीपी के आदेश के बाद ही होनी चाहिए। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी पर भी यही नियम लागू होते हैं।
जिन लोगों के खिलाफ शारीरिक या मानसिक अत्याचार, भरोसा तोड़ने के मजबूत सबूत हों, उन्हीं के खिलाफ केस दर्ज किया जाना चाहिए।
अगर किसी भी तरह समझौता होता नजर नहीं आता तो पुलिस को केस दर्ज करना चाहिए। केस दर्ज करने के बाद सबसे पहले स्त्री धन और दहेज का पैसा दिलाने की कोशिश होनी चाहिए।
अगर पुलिस को यकीन हो जाता है कि शिकायतों को जबरन बढ़ा-चढ़ा कर लिखा गया है, तो उसे आरोपी के साथ नरमी से पेश आना चाहिए।

वकीलों के लिए
किसी भी पक्ष के वकील को झूठे आरोप लगाने की सलाह नहीं देनी चाहिए। आरोपों को जबरन साबित करने की कोशिश भी गलत है। दोनों पार्टियों में से किसी के भी चरित्र हनन की सलाह देने से बचें।

अदालतों के लिए
अदालतों को सबसे पहले दोनों पक्षों में समझौते की कोशिश करनी चाहिए ताकि पति-पत्नी फिर सेसाथ रह सकें।
अगर किसी वजह से ऐसा मुमकिन न हो तो शांतिपूर्ण तरीके से अलग हो जाएं।
अदालत को इसके लिए एक्स्ट्रा वक्त देने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए।
सुलह समझौते की कार्यवाही कैमरे की देखरेख में होनी चाहिए।

सोच-समझकर करें इस्तेमाल
कई बार ससुराल पक्ष का इस दौरान हुआ अपमान सुलह की सारी संभावनाओं को खत्म कर देता है। इसके बाद शादी की कोई गुंजाइश नहीं बचती।

गैर-जमानती होने की वजह से कई बार मुजरिम उस वक्त तो डर से समझौता कर लेता है लेकिन बाद में वह बदला लेने पर उतारू हो जाता है।

हो सकती हैं ये वजहें
पति या किसी और के साथ छोटी-मोटी तकरार
सास/ससुर या ससुराल में किसी और के साथ पटरी नहीं बैठना
लड़की का किसी और के साथ अफेयर होना और उसके साथ शादी करने की इच्छा
दोनों में से किसी की भी जबरन शादी होना
प्रॉपर्टी पर निगाहें
परिवार से अलग होने की कोशिश

क्या होता है आमतौर पर
आमतौर पर लड़की या उसके घरवाले शुक्रवार को केस दर्ज कराते हैं, ताकि अगले दो दिन छुट्टी होने की वजह से कम-से-कम दो दिन सलाखों के पीछे रहना पड़े। अगर पहले से अंदेशा हो तो ऐंटिसिपेटरी बेल ली जा सकती है।
कई मामलों में लड़की वाले अलग होने के मिजाज से साथ आते हैं। वे लड़के वालों से पैसा बटोरकर अपनी बेटी की दूसरी शादी करना चाहते हैं। ऐसे में वे शादी का पूरा खर्च, जेवर, अपने रिश्तेदारों को भी दिए गिफ्ट आदि का पूरा पैसा जोड़ देते हैं।
ऐसे बहुत-से मामलों में कोशिश तलाक पाने की होती है। हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13 में तलाक का विधान है। तलाक दीवानी प्रक्रिया है, जिसमें आमतौर पर डेढ़-दो साल तक का वक्त लग जाता है। 13-बी में आपसी सहमति से तलाक का प्रावधान है, जोकि करीब छह महीने में ही निपट जाता है। इसमें गवाह और सबूतों की भी जरूरत नहीं पड़ती।

फंसें ही नहीं, इसके लिए क्या करें
लड़की अगर 498 ए में फंसाने की धमकी दे तो चीफ जूडिशल मैजिस्ट्रेट के यहां इन्फमेर्टिव पिटिशन दाखिल कर उसकी एक कॉपी रिसीव करा लें।
अगर लड़की की हरकतों से लगे कि वह मायके में ही रहना चाहती है और बचने का कोई रास्ता नहीं है तो लड़के वालों को अपनी ओर से तलाक केस फाइल करना चाहिए।

परिवार के बाकी लोग भी फंस जाएं तो...
अगर परिवार के लोग अलग रहते हैं तो वे अपनी तरफ से अलग से पिटिशन दायर करें कि हम साथ नहीं रहते। इससे जमानत मिल जाएगी और आरोपों से छूट भी सकते हैं।

पति अलग रहता है, फिर भी शिकायत...
पति अगर पत्नी के साथ हुए कथित अत्याचार के वक्त वहां मौजूद नहीं था तो उसे अदालत को बताना होगा कि वह उस वक्त कहां था। इसके लिए सबूत भी पेश करने होंगे।
अगर पत्नी अलग रह रही है तो यह साबित करने के लिए पति के पास सबूत होना चाहिए। पत्नी को उसके पते पर लीगल नोटिस भेजें और उससे वापस आने को कहें।

शिकायत के बाद क्या करें
शिकायत मिलने और एफआईआर दर्ज होने के बीच काफी वक्त होता है, इसलिए घबराएं नहीं।
तमाम डॉक्युमेंट्स के साथ पुलिस के पास जाकर अपना पक्ष रखें। अगर शादी में कोई मीडिएटर रहा है तो उसे भी साथ लेकर जाएं।
पुलिस के पास खुले दिमाग के साथ जाएं। अगर कुछ समझौते करने हैं तो तैयार रहें।
इसमें क्रिमिनल केस बनता है, इसलिए अच्छी साख वाला क्रिमिनल लॉयर करें, न कि तलाक का वकील।
अगर पत्नी को आपने रुपये चेक से दिए हैं तो सबूत के लिए उसकी एक कॉपी अपने पास रखें। अपने इलाके के डीजीपी को रजिस्टर्ड लेटर भेजें। ऐसा ही लेटर महिला आयोग को भी भेजें।
अगर निचली अदालत जमानत अर्जी खारिज कर दे, नियमित जमानत के लिए निचली अदालत समेत हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी जमानत अर्जी दाखिल करें।
जो लोग 498 ए के मामलों में फंस चुके हों, उनसे बातें करें और जानकारी हासिल करें।

पुलिस के सामने कैसा बर्ताव करें
खुद पर कंट्रोल रखें और कन्फ्यूजन न दिखाएं।
जुर्म कबूल करने के लिए पुलिस को आपको टॉर्चर करने का कोई हक नहीं है। इस बारे में अदालतकई बार फैसले सुना चुकी है।
अगर पुलिस वाले धमकाएं तो फोन में रिकॉर्ड कर लें और सीनियर अफसर ऑफिसर को रिपोर्ट करें।
18 साल से कम उम्र के किसी भी शख्स से उसके घर से अलग कहीं और पूछताछ नहीं की जा सकती।
महिला को सूरज ढलने और दिन निकलने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। महिला को लेडी पुलिस कर्मचारी की मौजूदगी में ही गिरफ्तार किया जा सकता है।
एफआईआर की कॉपी जरूर लें। यह आपका हक है। इसके आधार पर आपको बचाव कामौका भी मिलेगा।

शनिवार, 17 सितंबर 2011

INDIAN WOMEN


ऑंखों में पानी नहीं साहस का तूफान समाया है इन महिलाओं में


इरादे यदि हो बुलंद
तो बीच तूफान में समंदर भी रास्ता देता है।
पल-पल की कहानी लिखने को
समय खुद अपने हाथों से रोशनाई देता है। 

भारतीय नारी महान है, यह उक्ति अब धुँधली पड़ने लगी है। अब तो यह कहा जा सकता है कि भारतीय नारी महानतम होने लगी है। अब कोई भी ऐसा क्षेत्र नही। बचा, जिसमें उसका दखल न हो। फिर चाहे राजनीति हो या खेल, विज्ञान का क्षेत्र हो या फिर कोई अन्य क्षेत्र। भाारतीय नारियों की एक बड़ी श्रृंखला है, जिन्होंने कई ऐसे क्षेत्रों में कदम रखा है, जहाँ अब तक पुरुषों का ही वर्चस्व था। 
आज इक्कसवीं सदी में जीते हुए जब हम संपूर्ण विश्व की ओर देखते हैं, तो पाते हैं कि नारी शक्ति पूरी तरह से जाग्रत हो चुकी है। अपने इस्पाती इरादों के साथ वह लक्ष्य सिद्धि की ओर आगे बढ़ रही है। कड़ी मेहनत, योग्यता का सदुपयोग और परिस्थितियों को अपने अनुकूल बना लेने की स्वस्फूर्त प्रेरणा के द्वारा आज वह इतनी आगे निकल चुकी है कि उसकी शारीरिक और भावनात्मक निर्बलता भी उसके मार्ग की बाधा नहीं बन पाई। इसका ताजा उदाहरण देखने को मिला महामहिम प्रतिभा पाटिल में। 
राष्ट्रपति के सर्वोच्च पद पर आसीन श्रीमती प्रतिभा पाटिल देश की सर्वप्रथम महिला राष्ट्रपति हैं। इन्होंने इस जवाबदारी को सँभालते हुए देश की अन्य प्रथम पंक्ति की महिलाओं की याद ताजा कर दी, जिन पर केवल नारी जाति को ही नहीं, बल्कि संपूर्ण देश को गर्व है। राष्ट्र के सर्वोच्च पद पर विराजमान प्रतिभा पाटिल को इस उपलब्धि के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्हें हाशिए पर लाने के लिए टीकाकारों ने कई दावपेंच खेले, किन्तु जीत बुलंद इरादों की हुई और वे अपने लक्ष्य तक पहुँच ही गई। जब उन्होंने अपने पद की शपथ ली, तो हर कहीं उनकी जीत की ही चर्चा हो रही थी। हर नारी की जबान पर उनका नाम था। चर्चा करते समय प्रत्येक नारी के मुख की गर्वीली मुस्कान यही कह रही थी, मानों वे स्वयं ही उस पद पर विराजमान हो। । 
ऐसा नहीं है कि हमारे देश में महिलाएँ कभी किसी उच्च पद पर रही ही नही। प्रधानमंत्री के पद पर आसीन स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी भी प्रथम महिला प्रधानमंत्री थी, जो अपने दृढ़ निश्चय से ही शीर्ष तक पहुँची। आज नारी ने हर क्षेत्र में उन्नति की है। यही कारण है कि आज वह केवल रसोईघर की रानी न होकर प्रत्येक क्षेत्र में अपनी योग्यता का लोहा मनवा रही है। उसकी रसोईघर वाली छवि धीरे-धीरे धूमिल हो रही है, किन्तु इसकी शुरुआत वर्षों पहले हो चुकी है। 

सरोजिनी नायडू की बात करें, तो वे हमारे देश की एक प्रतिभावान महिला थी, जो स्वतंत्रता के बाद प्रथम महिला गर्वनर बनी। 'स्वर कोकिला' के नाम से जानी जाने वाली सरोजिनी नायडू राजनीति में होने के बाद भी सरल हृदय कवयित्री थी। राजनीति पैंतरेबाजी उनके स्वभाव का हिस्सा कभी न बन पाई। भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जिस प्रकार राष्ट्रपति भवन के दरवाजे बच्चों के लिए खुले रखते थे, उसी प्रकार सरोजिनी नायडू ने भी राजभवन के द्वार सभी के लिए खुले रख दिए थे। प्रत्येक व्यक्ति के साथ अपनेपन से मिलना उनके स्वभाव में शामिल था। इसी कारण वह सामान्य लोगों में लोकप्रिय हो गई थी। पुरूष जहाँ अपने रूखे स्वभाव के कारण कई कामों में पीछे रह जाता है, वहीं नारी मेलजोल एवं अपनेपन के कारण कई कठिनाइयों को पार कर लेती है। यह बात सरोजिनी नायडू में थी। वे अपने सरल एवं मूदुल व्यवहार के कारण सभी को अपना बना लेती थी। । 
उत्तर प्रदेश की प्रथम मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी को कौन नहीं जानता? 1963 में जब इन्होंने अपना पदभार सँभाला तो किसे पता था कि उनकी इस सफलता के साथ ही उत्तरप्रदेश महिलाओं के मामले में एक भाग्यशाली राज्य बनने जा रहा है। राजनीति के क्षेत्र में या अन्य कई क्षेत्रों में इस बीच कई बदलाव आए और हमेशा यह प्रदेश अपनी महिला प्रतिभा का लोहा मनवाता रहा। सुचेता कृपलानी कभी भी 'नोट और वोट' के लिए काम नहीं किया। वे एक अच्छी प्रबंधक थीं। उनके साथ काम करने वालों की राय उनके बारे में यही थी कि वे अत्यंत बुध्दिशाली महिला थीं। केवल विधानसभा सदस्यों के साथ ही अपनेपन से नहीं मिलती थीं, बल्कि वे सामान्य लोगों से भी अपनापे के साथ बात करती थीं। छोटे से छोटे लोगों की परेशानियों की ओर ध्यान देती थीं। यही कारण है कि उन्होंने अपने यहाँ काम करने वाली एक स्त्री की बंध्यत्व की पीड़ा को समझा और उसका अच्छे से अच्छे डॉक्टर के पास इलाज करवाया। परिणाम स्वरूप उसे पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई। अपनी व्यस्तताओं के बीच भी ऐसे सेवा कार्य के लिए समय निकाल लेना उनके स्वभाव में शामिल था। 

अपने देश की प्रथम मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली की प्रथम महिला जज लीला शेठ किसी परिचय की मोहताज नहीं। इस महिला पर केवल गुजराती भाई-बहनों को ही नहीं, संपूर्ण देशवासियों को गर्व अनुभव होता है। दिल्ली हाईकोर्ट में जब उन्होंने न्यायमूर्ति की कुर्सी पर बैठ कर अपना पदभार संभाला, तो अनेक व्यक्ति केवल समाज में आए इस परिवर्तन को देखने के लिए ही उमड़ पड़े थे। 1971 में हिमाचल प्रदेश की हाईकोर्ट में उन्हें मुख्य न्यायाधीश के रूप में चुना गया। उसके पहले उन्होंने पूरे बारह वर्षों तक जज के पद पर आसीन होकर अपना कार्यभार ईमानदारी पूर्वक संभाला था। इसलिए उन्हें यह मुख्य पद दिया जाना अपने आपमें कोई आश्चर्य न था, किंतु खुशी इस बात की थीं कि वे देश की प्रथम मुख्य न्यायाधीश बनीं। इस सफलता को प्राप्त करने में उन्हें कई चुनौतियाें का सामना करना पड़ा। वे इस बात को अच्छी तरह जानती थीं कि कई टीकाकारों की नजरें उन पर गड़ी हुई हैं। इसलिए वे इस मामले में हमेशा सतर्क एवं अपने इरादों में दृढ़ रहीं। 
अब हम बात करते हैं इंग्लिश चैनल पर करने वाली प्रथम ऐशियन महिला आरती शाह की। जब उन्होंने इस उपलब्धि को प्राप्त किया, तब वे केवल 19 वर्ष और 5 दिन की थीं। कोलकाता की इस बंग्ला संस्कृति को करीब से जानने वाली गुजराती बाला ने अपने दृढ़ नि ्चय के बल पर केवल 16 धंटे और 20 मिनट में ही 42 मील तैर कर ईंग्लिश चैनल को पार कर लिया। 1960 में उन्हें इस साहसिक कार्य के लिए पद्मश्री से विभूशित किया गया। उनके द्वारा यह साहसिक कार्य करने के बाद इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए महिलाओं के लिए राह खुल गई। कितने ही राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने के बाद आरती शाह ने ओलम्पिक में भी देश का नाम शीर्ष पर पहुँचाया। सन् 1952 में उनके साथ ओलम्पिक खेलों में हिस्सा लेने के लिए मुंबई की डॉली नजीर भी गई थीं। दोनों ने ही सेंडगेट में भारत की विजय पताका फहराई थी। ये भारत के खेल के इतिहास के सुनहरे क्षण थे, जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता। 
कार रैली की बात करें, तो आमतौर पर यह पुरुषों का ही क्षेत्र माना जाता है। किंतु इस क्षेत्र में भी महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। सन् 2002 में हिमालय कार रैली मेें मारूति-800 कार में 18 पुरूषों के साथ स्पर्धा में आने वाली सारिका शेरावत ने आठवाँ स्थान प्राप्त किया। भारतीय कार रैली के भीष्म पितामह माने जाने वाले हरि सिंह से आशीर्वाद प्राप्त कर वे कभी पीछे नहीं रहीं। दोगुने जोश के साथ आगे बढ़ने वाली इस महिला ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और कार रैली में हमेशा साहसिकता के साथ भाग लिया। 2006 में स्पर्धा के दौरान उनकी जिप्सी पलट गई थी, तब वे गंभीर रूप से घायल हो गई थी, किंतु उनका मनोबल नहीं टूटा। ऐसी कई छोटी-मोटी दुर्घटनाओं को हँसते हुए झेलते ये महिला लगातार अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ती गई। 
क्या आपने आग से जुड़ी हुई किसी दुर्घटना के समय अग्निशमन अधिकारी के रूप में किसी महिला को देखा है? आपको आश्चर्य होगा कि हर्शिनी कानेकर हमारे देश की प्रथम महिला अग्निशमन अधिकारी हैं। जब इंटरव्यू के दौरान बोर्ड के सदस्यों कहा कि वे अग्निशमन दल की ''किरण बेदी'' बनने जा रही हैं, तो उनके चेहरे पर साहस और उत्साह की मुस्कान खिल उठीं और दृढ़ संकल्प के साथ यह महिला अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने को तत्पर हो उठी।
साहस की साकार मूर्ति बचेन्द्री पाल को कौन नहीं जानता! माउन्ट ऐवरेस्ट पर भारत की विजय पताका फहराने वाली यह प्रथम भारतीय महिला बनीं। एक ऐसी पर्वतारोही जिन्होंने 13 वर्ष की छोटी उम्र में ही कुछ अलग कर दिखाने का निश्चय कर लिया। उनकी प्रेरणा बनीं- ईंदिरा गांधी की वे तस्वीरें, जो वे बचपन में अखबारों में देखी थीं। इन तस्वीरों ने उन्हें जीवन में कुछ नया कर दिखाने का जोश भर दिया। एक ग्रामीण बाला के लिए जहाँ साक्शर होना भी अपने आपमें एक उपलब्धि होता है, वो यदि स्नातकोत्तर करने के बाद माउन्टेनियरींग का कोर्स भी कर ले, तो यह एक आश्चर्य होता है। इसी आश्चर्य के साथ वे उस सपने को पूरा करने में लग गईं जो उन्होेंने बचपन में देखा था। 23 मई 1984 में उन्होंने माउन्ट एवरेस्ट पर जब भारत की विजय पताका फहराई तो भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पन्नों पर एक और नाम जुड़ गया। 
भारतीय सफल महिलाओं की सूची इतनी लम्बी है कि उन्हें गिनाते हुए समय गुजर जाएगा, पर नामों की इतिश्री नहीं होगी। होनी भी नहीं चाहिए। आज महिलाएँ जिस साहस और उत्साह के साथ अपने लक्ष्य में आगे बढ़ रही है, उसमें कोई बाधा उन्हें डिगा नहीं सकती। किरण बेदी, कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स, अरूंधती रॉय, हरिता देओल, सानिया मिर्जा, झूलन गोस्वामी, मेधा पाटकरे के अलावा कार्पोरेट जगत में नित नए नाम आ रहे हैं, जो अपनी सूझबूझ से लगातार आगे बढ़ रही हैं। इन महिलाओं ने हर क्षेत्र में साहस का परिचय दिया है। इससे यह कहा जा सकता है कि अब किसी भी महिला को चारदीवारी के भीतर बाँधना मुश्किल है, क्योंकि उसने अब अपना आसमान बना लिया है। अब उसे आवश्यकता नहीं है पुरुषों के सहारे की, अपने हाथों से अपना भविष्य लिखने वाली भारतीय महिलाएँ एक दिन पूरे विश्व में छा जाएँगी देखते रहना। 

गुरुवार, 15 सितंबर 2011

Mother and child relationship


बच्चो के जीवन से गायब होती मॉ……..


दुनिया ने आज भले ही चाहे कितनी तरक्की कर ली हो, पर हम लोगो द्वारा स्थापित दिखावे की तैयार की गई इस संस्कृति से हमारे अपने जीवन और समाज में अशांति और विषमता आज लगातार बढती जा रही है। जिसने कई बुनियादी रिश्तों के साथ ही आज समाज में मॉ और बच्चे के रिश्तों की बुनियाद को हिला कर रख दिया है। आज भागमभाग वाले इस जमाने में अधिकतर मॉओ को अपने बच्चो के पास रहने का वक्त ही नही है। आज भयंकर मंहगाई के इस दौर में रोजमर्रा की जरूरतो को पूरा करने में परिवार के दोनो पहिये कमाई करने में लगे है। नतीजन बच्चे को आया पाल रही है या फिर परिवार का दूसरा कोई सदस्य। ऐसी स्थिति में बच्चे को मॉ का प्यार दुलार नही मिल पा रहा है, वो गोद नही मिल पा रही है जिस में लेट कर वो घंटो घंटो गहरी नींद सोता है, वो कंधा नही मिल पा रहा है जिस से लग कर उसे मॉ के दिल की घडकन सुनाई देती है, वो छाती नही मिल पा रही है जिस से मुॅह लगा कर वो अपना पेट भरता है। बच्चे के जीवन के शुरूआती सालो में ही नैतिक कार्य की जडे उस में विकसित होती है अगर इस समयावधि में बच्चे की सही देखभाल न की जाये तो आगे चलकर उस के शारीरिक और मानसिक विकास और जीवन पर इस का बहुत बडा असर पडता है। स्वभाविक है कि ऐसी स्थिति में जब बच्चे को मॉ की गोद, स्नेह, दुलार नही मिलेगा तो वो सारा दिन रोते हुए ही व्यतीत करेगा। आज देखने में ये आता है कि मॉ के घर से निकलते ही आया बच्चे पर कोई ध्यान नही देती बच्चे को सोफे या पालने में डाल आया टीवी देखने में व्यस्त हो जाती है बच्चा हॅस रहा है या रो रहा है उस की सेहत पर इस का कोई असर नही पडता। बच्चा घंटो घंटो रोता रहता है बग्घी या पालने में पडा रहता है। आज बच्चो के अपहरण की वजह से हाई सोसाईटी के ये मॉ बाप अपनी आया या परिवार के किसी सदस्य को बच्चो को घर के बाहर घुमाने की इजाजत भी नही देते। आज बच्चे का समुचित विकास नही हो पा रहा है जिस से आज हमारे समाज में एक अपेक्षाकृत अक्ष्म पीढी तैयार हो रही है।
सचमुच आज हमारे समाज में ऐसा ही हो रहा आज बच्चो के जीवन से मॉ गायब हो चुकी है। अब से दो दशक पहले तक बच्चो को मॉ हमेशा अपने साथ और सीने से लगा कर रखती थी। पर अब बच्चो का ज्यादा समय बग्गी, ट्रॉली, पालने, बेबी सीट, आया की गोद या फिर कार की सीट पर बीतता है। पहले मॉ बच्चे के रोने या किसी भी हरकत पर उसे लेकर फौरन हरकत में आ जाती थी। बच्चा ज्यादा देर मॉ से दूर होकर परेशान नही हो पाता था। पर आज बच्चो को रोने के लिये छोड दिया जाता है। आज की आधुनिक मॉए इस के पीछे ये तर्क देती है कि इस से बच्चा रात में खुद भी सही से सोएगा और हमे भी चैन से सोने देगा। पहले जमाने में बच्चो को तीन चार साल तक मॉ अपना दूध पिलाती थी। आज कुछ चुंनिदा माताए ही अपने बच्चो को दूध पिलाती है। आध्ुनिक मॉए तीन दिन भी अपने नवजात बच्चे को दूध नही पिलाती और तर्क देती है कि स्तन खोलकर बच्चे को दूध पिलाने से बैकवर्ड फीलिंग होता है। फीगर बिगड जाती है वो खुद को देहाती मॉ कहलाना नही चाहती। जब कि एक शोध के अनुसार बच्चो को साथ साथ रखने, उसे सीने से लगाकर पुचकारने, दुलारने, रोने के लिये अकेला न छोडने, ज्यादातर समय घर के बाहर व्यतीत करने और महीनो की जगह वर्षो बच्चो को स्तनपान कराने से शरीर ताकतवर होने के साथ ही उन के कल्याण और नैतिक मूल्यो में वृद्वि होती है। मॉ द्वारा बच्चो का जोश-ओ-खरोश और जिम्मेदारी पूर्वक ध्यान रखने से बच्चा शांत रहने के साथ ही दिन रात चैन की नींद लेता है जिस के कारण बीमारियो से बचने के साथ ही बच्चे के शरीर का संपूर्ण विकास होता है। पहले जमाने में मॉ बाप के आलावा बच्चे का ध्यान पारिवारिक सदस्य रखते थे। पर आज गुजरे कुछ वर्षा मे हमारे घरो की तस्वीर तेजी से बदली है बच्चो से बात करने की उनके पास बैठने उसे दुलारने निहारने की आज की आधुनिक मॉ को फुरसत नही। क्यो कि वो तो नौकरी, किटटी पार्टियों ,शॉपिंग घरेलू कामो में उलझी है। दादा दादी ज्यादातर घरो में है नही। ज्यादातर हाई सोसायटी घरो में एक बच्चा है। घर में अकेला बच्चा रोने के अलावा क्या करे किस से बोले किस के साथ खेले आया के साथ माली के साथ, आखिर कब तक खेले इन से लिपट कर चिपट कर इन कंधे से लगकर उसे वो गंध वो सुगंध नही आती जो उस की मॉ की है। इन के सीने से लग कर बच्चे को वो धडकन सुनाई नही देती जो इस के मॉ के दिल से निकलती है। पडोस, पडोसी से इन पॉष कालोनी वालो का कोई वास्ता नही होता। बच्चा अकेलेपन ,सन्नाटे ,घुटन और उपेक्षा के बीच बडा होता है। बच्चे को ना तो अपने मिलते है और ना ही अपनापन। पहले जमाने में बच्चे को घर से बाहर निकलकर अलग अलग आयु वर्ग के बच्चो के साथ खेलने की पूरी आजादी थी। पर आज बच्चे को एक काल कोठरी रूपी कमरे में बंद कर दिया जाता है। जिस में उसे सोफे पर बैठ कर पूरे दिन अकेले टीवी, डीवीडी, कंप्यूटर पर वीडियो गेम्स खेलते हुए समय काटना पडता है।
आज दूधमुहे बच्चो की दुनिया लाचारी भरी होने के साथ ही उन के जीवन से मॉ का प्यार, दुलार, लोरी, मॉ की गोद और मॉ का दूध खत्म होता जा रहा है। आने वाले समय में हम किसी को ये भी नही कह कर ललकार सकते की मॉ का दूध पीया है तो सामने आजा। आज की आधुनिक मॉ को बच्चा गोद में लेकर चलने में शर्म आती है। हा अब तो बच्चे को पीठ पर कपडे के एक झिगोले में ठंूसकर लेकर चलने का चलन भी शहरों में बडी तेजी से चल निकला है। जैसे बच्चा न हो कोई सामान हो। पर मॉ की गोद की बात ही निराली होती है। मॉ के द्वारा चलते हुए थकान से बच्चे का बार बार बदलता कंधा, मॉ के दोनो हाथो का सिर से लेकर पॉव तक बच्चे को बार बार करता स्पर्ष, मॉ के धडकते हुए दिल की धडकन का बच्चे की धडकन से बार बार टकराने और इन धडकनो का एक दूसरे को महसूस करना, बच्चा पूरी तरह से मॉ के दिल में उतरा हुआ रहता था। बच्चा मॉ की ममता को पूरी षिद्दत के साथ जीता था। जिगर से जिगर के टुकडे का नाता ऐसे बनता था की एक बच्चे में एक मॉ को पूरी कायनात, कायनात की सारी खुशियाँ दिखाई देती थी। उसे उस बच्चे में अपना पूरा जीवन अपनी पूरी ताकत दिखाई देती थी। आज के दौर की मॉए आखिर ऐसी क्यो नही सोचती, क्यो ऐसा महसूस नही करती, समझ नही आता। क्या ये सब बदलाव बच्चे के जन्म देने की प्रक्रिया के बदलाव के कारण हुआ या आधुनिक समाज की संरचना ने मॉ के सामाजिक ताने बाने को बिखेर कर रख दिया शयड आज इस पर एक लम्बी बहस की जरूरत है। बच्चे के जन्म देने की प्रक्रिया भले ही बदली हो पर आज भी बच्चे के पहली बार मॉ कहने का सम्बोधन वही है। मॉ की गोद वही है, मॉ चाहे आधुनिक समाज की हो या पिछडे समाज की बच्चा चाहे प्राकृतिक तरीके से पैदा हुआ हो या मेडीकल तकनीक के द्वारा बच्चे के जन्म के बाद दोनो मॉओ की छाती में दूध एक जैसा ही उतरता है, फिर मॉ क्यो बदलती जा रही आज ये सवाल हमारे सामने एक बडा सवाल बनकर खडा हो रहा है।
दरअसल इस का एक बडा कारण ये भी है कि आज शहरो में जो मॉए प्राकृतिक रूप से बच्चो जनना पसंद नही करती वो उस मॉ बनने के अहसास को जीवन भर महसूस नही कर पाती। उस पीडा उस दर्द को महसूस ही नही करती जो मॉ और बच्चे के बीच में प्यार का रिश्ता बनाता है। आज बडे बडे शहरों में हाई सोसायटी की महिलाए बच्चा जनने की पीढा के डर से आप्रेषन द्वारा बच्चा पैदा कराना आसान समझती है। जिस कारण आज बच्चा मॉ के जिगर का टुकडा नही बन पा रहा है। नर्सिग होम का बिल चुका कर बच्चा एक बाजार से खरीदे सामान की तरह घर आ जाता है। और छोड दिया जाता व्हीकल टैक पर ट्रॅाली में गुमसुम अनाथो की तरह आया या नौकरो के हवाले ट्रॅाली धकेलने के लिये। कोई उस की कौली नही भरता उस के खिल खिलाने पर उठाकर कोई उसे चूमता नही। अपने कंधो से कोई उसे प्यार से नही लगाकर चिपकाता। आज कोई इन आधुनिक माओ को बताए की बच्चे को गोद में लेने से कोई मॉ देहाती मॉ नही कहलाता बल्कि एक जिम्मेदार मॉ कहलाई जाती है। बाजार या सडक पर बच्चे को गोद में लेकर चलने से बैकवर्ड फीलिग नही बल्कि फील गुड महसूस होता है। आज बच्चे मॉ से गोद और अपने हिस्से का दूध ही तो मॉग रहे बाकी जीवन की लडाई तो इन्हे खुद ही लडनी है।
Rajesh Mishra, Kolkata, West Bengal