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मंगलवार, 12 अगस्त 2014

Kitchen Helping Artical

राजेश  मिश्रा , समाचार संपादक
News Editor , Magzine /
News  Paper, Kolkata , W.B.   

रसोईघर- से रसोई सुझाव----------

राज की प्रस्तुति…  








  • सख्त नींबू या संतरे को अगर गरम पानी में कुछ देर के लिए रख दिया जाये तो उसमें से आसानी से अधिक रस निकाला जा सकता है। 
  • आलू उबालते समय पानी में थोड़ा-सा नमक मिला दें तो आलू फटेंगे नहीं और आसानी से छिल जाएँगे। 
  • करेले और अरबी को बनाने से पहले काटकर नमक के पानी में भिगो दें। करेले की कड़वाहट और अरबी की चिकनाहट निकल जाएगी। 
  • मेथी के साग की कड़वाहट हटाने के लिये उसे काटें, नमक मिलाकर, थोड़ी देर के लिये अलग रखें और दबाकर थोड़ा रस निकाल दें। 
  • फूलगोभी की सब्जी में एक छोटा चम्मच दूध या सिरका डालें तो फूलगोभी का सफ़ेद रंग पीला नहीं पड़ेगा। 
  • हरी मिर्च को फ्रिज में अधिक दिनों तक ताज़ा रखने के लिए उसके डंठल तोड़कर हवाबंद डिब्बे में रखें। 
  • आलू और प्याज को एक ही टोकरी में एक साथ न रखें। ऐसा करने से आलू जल्दी खराब हो जाते हैं। 
  • यदि दूध फटने की संभावना हो, तो थोड़ा बेकिंग पाउडर डालकर उबालें, दूध नहीं फटेगा।
  • आटा गूँधते समय पानी के साथ थोड़ा दूध मिला दें तो रोटी या पराठे अधिक नर्म और स्वादिष्ट बनते हैं। 
  • बेसन, नीबू, हल्दी और नारियल के तेल को मिलाकर बनाए गए लेप से होली के रंग आसानी से छूटते हैं और त्वचा भी स्वस्थ रहती है। 
  • पालक को पकाते समय उसमें एक चुटकी चीनी मिला दी जाए तो उसका रंग और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं। 
  • एक छोटे चम्मच शक्कर को भूरा होने तक गरम करके केक के मिश्रण में मिला देने पर केक का रंग और स्वाद बढ़ जाता है। 
  • स्वादिष्ट शोरबा बनाने के लिए प्याज, लहसुन, अदरक, पोस्ता और दो-चार दाने भुने हुए बादाम महीन पीसें और मसाले के साथ भूनें। 
  • बादाम का छिलका आसानी से उतारने के लिए उसे १५-२० मिनट के लिए गरम पानी में भिगो दें। 
  • बर्तन से खाना जलने की महक और चिपकन छुड़ाने के लिए उसमें कटे प्याज और उबला पानी डालकर पाँच मिनट तक रखें। बर्तन आसानी से साफ हो जाएगा। 
  • कच्चे नारियल की बर्फी को जल्दी और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए ताज़े दूध के स्थान पर मिल्क पाउडर का प्रयोग करें।
  • पुराने पापड़ के छोटे टुकड़े करें, पानी में उबालें, छानें, राई का छौंक लगाकर टमाटर और दही मसाले के साथ स्वादिष्ट सब्जी बनाएँ। 
  • दही खट्टा हो तो उसमें दो प्याले ठंडा पानी डालें, आधे घंटे बाद धीरे धीरे पानी गिरा दें खटास निकल जाएगी। 
  • मिर्च के डिब्बे में थोड़ी सी हींग डाल दें तो मिर्च लम्बे समय तक ख़राब नही होगी।
  • चीनी के डिब्बे में 5 -6  लौंग डाल दी जायें तो उसमें चींटिया नही आयेंगी। 
  • कढ़ी में दही मिलाने से पहले उसमें थोड़ा बेसन डालकर फेंट लें। इससे कढ़ी नरम बनेगी दही के दाने दिखाई नहीं देंगे। 
  • नूडल्स का चिपचिपापन दूर करने के लिए उबालते समय उसमें थोड़ा सा तेल डालें और उबालने के बाद ठंडा पानी। 
  • अंडे को उबालने से पहले उसमें पिन से एक छेद कर दें। इसके छिलके आसानी से उतर जाएँगे। 
  • नारियल की छिलका आराम से निकालने के लिए छिलका निकालने से पहले उसे आधे घंटे तक पानी में डालकर रखें। 
  • अंडे की ताज़गी की पहचान के लिए उसे नमक मिले ठंडे पानी में रखें। यदि डूब जाए तो ताज़ा है और यदि ऊपर आ जाए तो पुराना। 
  • बची हुई इडली और डोसे के घोल को अधिक देर तक ताज़ा रखने के लिए उस पर पान का एक पत्ता रख दें। 
  • आलू की कचौड़ी बनाते समय मसाले में थोड़ा बेसन भूनकर डाल दें। इससे कचौड़ी को बेलना आसान होता है और स्वाद भी बढ़ता है। 
  • पनीर को नर्म रखने के लिए उसे तलने के बाद गरम पानी में डालें। इसके बाद ही उसे सब्ज़ी में मिलाएँ और हल्का पकाएँ। 
  • उबले अंडों को आसानी से सफ़ाई के साथ छीलने के लिए उन्हें उबलने के बाद पाँच मिनट के लिए ठंडे पानी में डाल दें। 
  • चना, मटर जैसे चीज जल्दी गलाने के लिए उबालतले समय पानी में नमक और रिफाइड तेल की कुछ बूंदे डाल दें। 
  • स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मेहमानों के स्वागत के लिए तिरंगी बर्फी और तिरंगे सैंडविच से बेहतर और कुछ नहीं। 
  • पालक पनीर बनाने से पहले पालक की पत्तियों को एक चम्मच चीनी वाले पानी में आधे घंटे तक भिगोकर रखें, अधिक स्वादिष्ट बनेगा। 
  • अगर आलू को छीलकर काटें और पानी में एक चम्मच सिरका डालकर उबालें तो आलू अपेक्षाकृत जल्दी उबलेंगे और टूटेंगे नहीं। 
  • केले, बैंगन या आलू काटकर तुरंत पानी में रख दें, फिर चाहें जितनी देर बाद पकाएँ वे काले नहीं पड़ेंगे, न उनका स्वाद खराब होगा। 
  • तरबूज़ के छिलके सुखाकर पीस लें। ये पाउडर सोडा बाई कार्ब की जगह प्रयोग किया जा सकता है।
  • संतरे का सूखा छिलका सुखाकर डिब्बे में बंद करके रखें। सुगंधित चाय बनाने के लिए चाय का पानी उबालते समय थोड़ा सा डाल दें। 
  • पनीर को तलने के बाद यदि तुरंत उबलते नमकीन पानी या सब्ज़ी के शोरबे में डाल दिया जाय तो वह अधिक नर्म और स्पंजी होता है। 
  • धनिये और पुदीने की चटनी को पीसने के बाद उसमें दो तीन चम्मच दही मिला दिया जाए तो वह अधिक स्वादिष्ट बनती है।
  • दीपावली सुझाव--मिट्टी के दीये अच्छी तरह जलें और तेल अधिक न सोखें इसके लिए उन्हें तीन घंटे तक पानी में भिगोने के बाद सुखाकर प्रयोग करें।
  • पराठे के आटे में मोयन के लिए एक चम्मच तेल के स्थान पर दो बड़े चम्मच दही डालने से पराठे अधिक नर्म व स्वादिष्ट बनते हैं। 
  • जमाने से पहले अगर दूध में पिसी हुई बड़ी इलायची और केसर डालकर दो तीन उबाल दिए जाएँ तो ऐसा दही खाने से सर्दी नहीं होती। 
  • व्यंजन के उबलते ही गैस को धीमा करने और जहाँ तक संभव हो छोटे बर्नर के प्रयोग से ईंधन की बचत की जा सकती है।
  • दोसे के घोल में एक चम्मच चीनी मिला देने से दोसे अधिक कुरकुरे, गहरे सुनहरे और ज्यादा स्वादिष्ट बनते हैं। 
  • सूजी को हल्का भूनने के बाद ठंडा कर के हवाबंद डिब्बों में रख दिया जाए तो उसमें कीड़े नहीं लगते। 
  • पूरी का आटा माड़ते समय पानी के साथ थोड़ा दूध मिला दिया जाए तो पूरियाँ नर्म और अगर घी या तेल मिला दिया जाए तो कुरकुरी बनती हैं। 
  • जले हुए बर्तन को आसानी से साफ़ करने के लिए उसमें एक प्याला पानी, एक बूँद बर्तन धोने वाले साबुन के साथ उबालें, फिर धोएँ। 
  • केक की ५०० ग्राम आइसिंग में अगर एक चाय का चम्मच ग्लीसरीन मिला दी जाय तो आइसिंग सूखती नहीं और देर तक ताज़ी रहती है। 
  • बेसन को प्लास्टिक के थैले में रबरबैंड से मुँह बंद कर के फ्रिज में रखें तो बहुत दिनों तक ताज़ा रहेगा और उसमें कीड़े भी नहीं पड़ेंगे। 
  • टमाटर की लुगदी को चेहरे पर लगाकर लगभग बीस मिनट बाद धो देने से मुँहासे व अन्य धब्बे दूर होते है। 
  • बालों से रूसी दूर करने और उन्हें चमकदार बनाने के लिए १ एक नीबू का रस बालों में माँग बनाकर लगाएँ और दस मिनट बाद धो दें। 
  • रात में सोने से पहले नाभि में तीन बूँद जैतून का तेल डालें तो सर्दियों में ओंठ नहीं फटते और सामान्य त्वचा भी स्वस्थ होती है। 
  • रोज़ रात में सोने से पहले आँखों में एक-एक बूँद गुलाबजल डालने से आँखें स्वस्थ और सुंदर बनी रहती हैं। 
  • एक गिलास पानी में एक चाय का चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन बिना मुँह धोए पीने से पेट साफ होता है और चेहरे पर निखार आता है। 
  • तैलीय त्वचा से मुक्ति के लिए एक बड़ा चम्मच बेसन, एक छोटा चम्मच गुलाबजल, और चुटकी भर हल्दी में आधा नीबू मिलाकर बनाए गए लेप को चेहरे पर बीस मिनट तक लगाएँ और सादे पानी से धो दें। 
  • चाय के पानी में चुकंदर का रस मिलाकर ओंठों पर लगाने से उनका रंग गुलाबी होता है और वे फटते नहीं। 
  • 10 लीटर पानी में दो बड़े चम्मच गुलाबजल मिलाकर नहाने से त्वचा स्वस्थ और सुंदर बनती है। 
  • होली खेलने से पहले बालों में अगर तेल लगा लिया जाए और चेहरे पर क्रीम तो होली का रंग आसानी से छूट जाता है।
  • एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नीबू और दो चम्मच शहद मिलाकर रोज़ सुबह खाली पेट पीने से पेट ठीक रहता है, रक्त शुद्ध होता है और चेहरे पर निखार आता है। 
  • टमाटर के रस को मट्ठे में मिलाकर लगाने से धूप में जली हुई त्वचा को आराम मिलता है और वह जल्दी स्वस्थ हो जाती है। 
  • पिसी हुई दो बड़े चम्मच मसूर की दाल में चुटकी भर हल्दी और दस बूँद नीबू मिलाकर दूध में बनाया गया उबटन चेहरे पर लगाने से मुहाँसे और उसके दाग दूर होते हैं। 
  • एक बाल्टी पानी में चुटकी भर पिसी हुई फिटकरी मिलाकर नहाएँ तो त्वचा से पसीने की गंध दूर रहती है। 
  • रोज़ दोपहर में खाने के साथ एक गाजर सलाद की तरह कच्ची खाने से आँखों के चारों और पड़े काले निशान दूर हो जाते हैं। कच्चे आलू को पीसकर चेहर पर दस मिनट तक लगाएँ और फिर सादे पानी से धो दें। इससे हर प्रकार के दाग धब्बे और झांईं दूर हो कर त्वचा पर निखार आता है। 
  • टमाटर के गूदे में मट्ठा मिलाकर लगाने से धूप से जली हुई त्वचा को आराम मिलता है और वह जल्दी स्वस्थ हो जाती है। 
  • एक गिलास पानी में दो चम्मच चाय डालकर अच्छी तरह उबालें और छानकर ठंडा होने के बाद फ्रिज में रखें। धूप में बाहर निकलने पहले चेहरे और हाथों-पैरों में यह पानी लगा लेने से त्वचा झुलसेगी नहीं। 
  • गेंदे और गुलाब की पंखुड़ियाँ व नीम की पत्तियों को एक कटोरी पानी में उबालकर चेहरे पर लगाने से मुहाँसे दूर होते हैं। 
  • प्रतिदिन एक बाल्टी पानी (दस लीटर) में दो बड़े चम्मच गुलाबजल मिलाकर नहाने से त्वचा स्वस्थ व सुंदर होती है। 
  • नारियल के तेल में नीबू का रस मिलाकर सिर में लगाएँ और एक घंटे बाद धो दें। इससे सिर की खुश्की को आराम मिलता है। 
  • तुलसी के पत्तों का रस निकाल कर उसमें बराबर मात्रा मे नीबू का रस मिला कर चेहरे पर लगाने से झाईं दूर होती है। 
  • दो चम्मच सोयाबीन का आटा, एक बड़ा चम्मच दही व शहद मिलाकर बनाए गए लेप को चेहर पर लगाने से झुर्रियाँ कम होती हैं। 
  • प्रतिदिन नाखूनों पर जैतून के तेल की हल्की मालिश करने से नाखूनों का टूटना रुक जाता है। 
  • आँखों के काले घेरों से छुटकारा पाने के लिए मिल्क पाउडर में नीबू का रस मिलाकर आँखों के चारों ओर हल्की मालिश करें। 
  • कमल की पत्तियों को पीस कर झुलसी त्वचा पर लगाने से त्वचा की जलन दूर होती है और झुलसने का निशान भी चला जाता है। 
  • उड़द की छिलके वाली दाल को उबालकर उसके पानी से बाल धोने पर वे सुंदर और आकर्षक दिखाई देते हैं। 
  • एक एक-एक चम्मच ग्लिसरीन, गुलाबजल और नींबू का रस मिलाकर हाथों से मलें और सूख जाने पर धो दें। इससे सख्त हाथ मुलायम हो जाएँगे। 
  • उँगलियों पर ज़रा-सा बादाम या जैतून का तेल लेकर नियमित रूप से भौंहों और बरौनियों पर लगाने से वे घनी और चमकदार बन जाती हैं। बालों में चमक लाने के लिए १ प्याला पानी मे ३ बडे चम्मच सफेद सिरका मिलाकर लगाएँ और १५ मिनट बाद धो दें। 
  • आँखों के पास गहरे घेरों और सूजन के लिए खीरे के पतले टुकड़ों को आँखों पर रखकर बीस मिनट आराम करें, फिर चेहरा धो दें। 
  • मुहाँसों से मुक्ति पाने के लिये चुटकी भर कपूर में पुदीने और तुलसी की पत्तियों का रस मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएँ। 
  • कोमल हाथों के लिये तून के तेल से हाथों की मालिश करें, फिर इन्हें दो से पाँच मिनट तक नमक मिले पानी में भिगोकर रखें। 
  • सुंदर चेहरे के लिये बदाम, गुलाब के फूल, चिरौंजी और पिसा जायफल रात को दूध में भिगोएँ और सुबह पीसकर मुख पर लगाएँ। 
  • नारियल को कसकर निकाले गए ताज़े दूध को चेहरे पर लगाने से त्वचा स्वस्थ व आकर्षक बनती है।
  • बराबर मात्रा में गाजर और खीरे का एक गिलास रस नियमित रूप से लेने पर बाल, नाखून और त्वचा स्वस्थ रहते हैं। 
  • कच्चे दूध में रूई का फाहा भिगोकर चेहरा साफ़ करने से कील मुहाँसे और झाँई दूर होकर त्वचा स्वस्थ बनती है। 
  • हल्दी और चंदन का चूर्ण दूध में भिगोकर चेहरे पर लगाने से थकी और मुरझाई त्वचा स्वस्थ होती है।
  • तरबूज़ के रस को चेहरे पर लगाएँ और सूख जाने पर धो दें। इससे दाग धब्बे दूर होते हैं तथा त्वचा साफ़ होकर निखर जाती है। 
  • मसूर की दाल और दूध के उबटन में घी मिलाकर शरीर पर लगाने से त्वचा नर्म और चमकदार बन जाती है। 
  • छह चम्मच पेट्रोलियम जेली, दो चम्मच ग्लीसरीन और दो चम्मच नीबू के रस को मिलाकर फ्रिज में एक जार में रख दें। सप्ताह में दो बार हाथ पैर में इसकी मालिश करने से रूखी त्वचा को आराम मिलता है। 
  • मेथी की पत्तियों का लेप बनाकर चेहरे पर लगाने से कील मुँहासे और झाँई दूर हो जाते हैं। 
  • त्वचा का रूखापन दूर करने के लिये जैतून का तेल, दूध और शहद बराबर मात्र में मिलाकर चेहरे पर लगाएँ और 20  मिनट बाद गुनगुने पानी से धो दे। 
  • चेहरे, हाथों और पैरों पर थोड़ा सा एरंड तैल (कैस्टर ऑयल) लगा कर हल्की मालिश करने से झुर्रियाँ दूर होती हैं। 

शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

नाक में डालो पानी...सर्दीं हो जाएगी छूमंतर


सर्दी-जुकाम की तकलीफ ऐसी होती है कि इंसान को लगता है कि इससे तो बुखार का आना ज्यादा अच्छा है। आइये चलते हैं एक ऐसे उपाय की ओर जो सर्दी-जुकाम जैसी नामुराद बीमारी को जड़ से मिटा सकता है और वो भी सदा के लिये....

जलनेती:

यह एक यौगिक क्रिया है, जिसको बगैर किसी अनुभवी मार्गदर्शक के कभी भी नहीं करना चाहिये। इस क्रिया में नाक के बाएं छेद से पानी डालते हुए शरीर को कुछ इस तरह से रखा जाता है कि सारा का सारा पानी दाहिने नाक की तरफ से निकल जाता है। यही क्रिया दाएं से बाएं भी दोहराई जाती है इस तरह एक चक्र पूरा होता है।

सावधानी:


किसी अनुभवी मार्गदर्शक की देखरेख में ही इस क्रिया को प्रारंभ करना चाहिये। प्रारंभ में बहुत कम समय के लिये ही इस क्रिया को प्रारंभ करना चाहिये।

विशेष :


इस क्रिया के करने से यकीनन पुरानी से पुरानी सर्दी-जुकाम और एलर्जी तक का भी जड़ से से सफाया हो जाता है।

गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

हेल्थ टिप्स : Health Tips

गर्मियों में रखें अपना खास ख्याल



मौसम का मिजाज बदल गया है और अब गर्मी अपना असर दिखाने लगी है। बदले मौसम में फिट बने रहने के लिए लाइफ स्टाइल में भी बदलाव जरूरी है। अपने रूटीन में बदलाव की शुरुआत करने की जरूरत है, ताकि आने वाले महीनों में आप पूरी तरह स्वस्थ रह सकें।


गर्मी में तमाम बीमारियां भी लोगों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे मौसम में जरूरी है कि अपने खानपान से लेकर पहनावे में भी बदलाव किया जाए। वहीं, अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। शहर की तेज गर्मी को देखते हुए जरूरी है कि पहले से ही इस मौसम के लिए अपनी प्लानिंग कर ली जाए। इससे मौसम के नकारात्मक असर से बचा जा सकेगा। एक्सपर्ट की मानें तो गर्मी ज्यादा परेशान न करे इसके लिए जरूरी है कि सुबह जल्दी उठकर अपना रूटीन बनाया जाए। खासतौर पर अपनी डाइट का ध्यान रखा जाए।

जरूरी काम दोपहर तक पूरे करें

तेज धूप से बचने के लिए जरूरी है कि अपने दिन के जरूरी कामों को दोपहर एक बजे तक पूरा कर लिया जाए। इसके लिए सुबह जल्दी उठकर अपने दिन की प्लानिंग करें। इसमें अपने जरूरी कामों की लिस्ट तैयार कर उन्हें धूप के तेज होने से पहले पूरा करने की कोशिश करें।

डाइट में शामिल करें हेल्थ ड्रिंक

गर्मी में सबसे ज्यादा जरूरत एनर्जी ड्रिंक्स की होती है। इससे बॉडी में पानी की कमी नहीं होती। गर्मी में छाछ, फ्रूट ज्यूस, मिल्क शेक, ग्रीन सलाद को शामिल करना चाहिए। सलाद में इस मौसम में आने वाले खीरा, ककड़ी भी इस्तेमाल करें।

पानी की कमी को पूरा करने के लिए तरबूज भी फायदेमंद होगा। नाश्ते में भी ज्यूस लेने की आदत शुरू कर दें, इससे दिनभर एनर्जी बनी रहेगी। लंच में हल्का खाना लें। इस मौसम में स्पाइसी खाना लेने से बचें। अगर जरूरी है तो सिर्फ डिनर में ही लें, वह भी नियमित नहीं।

लंच और डिनर के बीच एनर्जी ड्रिंक लेते रहना जरूरी है। एल्कोहलयुक्त कोल्ड ड्रिंक का उपयोग गर्मी में कम से कम करें, क्योंकि इनसे कुछ देर के लिए राहत तो मिलती है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए यह नुकसानदायक होते हैं।

फैशनेबल दिखें, कूल रहें

फैशन डिजाइनर्स के अनुसार गर्मी में कूल बने रहने के लिए कार्गाे, बरमूडा, जार्जेट, कॉटन और चिकन सूट कूल अहसास कराने के साथ ही आरामदायक भी हैं। इस मौसम में चटक रंगों के बजाए हल्के रंगों का इस्तेमाल करें। गर्मियों के लिए सफेद रंग सबसे उपयुक्त हैं।

कॉटन फ्रेब्रिक अपनाएं

गर्मी में हल्के कपड़ों के साथ-साथ फैशन भी बरकरार रखा जा सकता है। इस बार मार्केट में कॉटन फ्रेब्रिक्स की कई वैराइटीज मौजूद हैं, जो कूल फीलिंग्स के साथ ही फैशनेबल लुक भी देंगी। लेनिन और कॉटन गर्मियों के लिहाज से सबसे उपयुक्त है।

स्किन के लिए अपनाएं हर्बल पैक

गर्मियों में स्किन प्रॉब्लम से छुटकारा पाने के लिए हर्बल फेस पैक अपनाएं। गर्मियों में धूप की वजह से चेहरे पर रूखापन आ जाता है, अधिक समय तक रूखापन बने रहने से त्वचा संबंधी रोगों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं और इससे एलर्जी की आशंका सबसे ज्यादा रहती है। ऐसे में हर्बल फेस पैक रूखापन हटाने के साथ ही पोषण भी प्रदान करते हैं।

चेहरे पर कपड़ा बांधकर निकलें

इन दिनों धूप तेज होने के कारण शरीर के खुले हिस्से सीधे प्रभावित होते हैं, इसलिए घर से बाहर निकलने से पूर्व चेहरे को सफेद कपड़े से बांधकर ही बाहर निकलें, इससे कानों से गर्म हवा शरीर के अंदर प्रवेश नहीं करेगी। हाथों व पैरों को भी खुला न रखें, धूप से त्वचा खराब होने के साथ ही धूल की वजह से एलर्जिक प्रॉब्लम हो सकती है।

धूप के बाद ठंडी हवा से बचें

इन दिनों दिन के समय गर्मी व धूप तेज रहती है। फिटनेस व हेल्थ कंसल्टेंट बताते हैं कि दिन में यदि आप तेज धूप में रहते हैं तो इसके तुरंत बाद एकदम ठंडी हवा में जाने से बचें। प्रायः बाहर से आते ही लोग घरों में एसी ऑन कर लेते हैं या फ्रीज का पानी इस्तेमाल करते हैं, इससे उनका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। रात्रि में सोने से पूर्व ठंडी हवा में कुछ देर टहलना बेहतर रहेगा।

आंखों का रखें ख्याल

गर्मी में बॉडी के साथ ही आंखों पर भी ज्यादा नेगेटिव असर पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि इनका भी खास ख्याल रखा जाए। चिकित्सक बताते हैं कि गर्मी के मौसम में एलर्जी कंजक्टीवाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। धूल की वजह से भी आंखों में परेशानी बढ़ जाती है, इसलिए खुली हवा या धूप में निकलने पर चश्मे का प्रयोग जरूर करें। आंखों को ठंडे पानी में थोड़े अंतराल के बाद धोते रहें। इससे ड्राइनेस दूर होती है। विटामिन सी देने वाले फलों को भी अपने आहार में शामिल करें।

ये बरतें सावधानियां

- आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मे का उपयोग करें।
- ज्यूस, मिल्क शेक जैसे एनर्जी ड्रिंक रूटीन में शामिल करें।
- ज्यादा से कम और कम से ज्यादा तापमान में जाने से पहले थोड़ा ब्रेक लें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
- पहनावे में हल्के रंगों वाले कपड़ों का इस्तेमाल करें।
- सुबह जल्दी उठें और नियमित रूप से हल्का व्यायाम करें।

इन बातों का रखें ध्यान

- सुबह के नाश्ते में ज्यूस और ग्रीन वेजिटेबल्स से बनी हुई डिश से दिन की शुरुआत करें।
- घर से बाहर निकलने से पहले पानी अधिक मात्रा में पिएं।
- लंच दोपहर 11.30-12.30 के बीच लेना शुरू करें। लंच में ग्रीन सलाद व दही को शामिल करें।
- शाम को कुछ ड्रायफ्रूट्स, फ्रूट चाट या मिल्क शेक लें, इससे बॉडी को एनर्जी मिलेगी।
- चाय का इस्तेमाल सिर्फ सुबह के समय ही करें। दिन के समय ज्यूस को विकल्प के रूप में अपनाएं।
- डिनर सोने से करीब दो घंटे पहले लें। इसमें ज्यादा स्पाइसी और ऑयली फूड का इस्तेमाल करने से बचें।
Rajesh Mishra in The Wake Office

बुधवार, 21 मार्च 2012

किस बीमारी में क्या खाएं, किससे करें परहेज


बैलेंस्ड डायट का सीधा कनेक्शन हमारी सेहत के साथ है। बैलेंस्ड डायट से न सिर्फ बीमारियों से बचा जा सकता है , बल्कि बीमार होने के बाद रिकवरी भी जल्दी हो सकती है। क्रॉनिक और लाइफस्टाइल बीमारियों में अच्छी डायट की भूमिका और बढ़ जाती है। एक्सपर्ट्स की सलाह से हम बता रहे हैं , कुछ आम बीमारियों में डायट क्या हो।

डायबीटीज़

शुगर के मरीजों के लिए जरूरी है कि वे बैलेंस्ड डायट लें। ज्यादा न खाएं , लेकिन तीनों वक्त खाना खाएं और बीच में दो बार स्नैक्स भी लें। उन्हें प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का अच्छा कॉम्बिनेशन लेना चाहिए। मसलन , नाश्ते में दूधवाला दलिया लें या फिर ब्रेड के साथ अंडा लें। इसी तरह खाने में सब्जी के साथ दाल भी लें। इससे शुगर का लेवल सही रहता है। असल में , कार्बोहाइड्रेट से शुगर जल्दी बनती है , जबकि प्रोटीन से धीरे-धीरे शुगर रिलीज़ होती है , जिससे ज्यादा देर तक पेट भरा हुआ लगता है और ज्यादा खाने से बच जाते हैं। कुल खाने की 55-60 फीसदी कैलरी कार्बोहाइड्रेट से , 15-20 फीसदी प्रोटीन से और 15-20 फीसदी फैट से मिलनी चाहिए। ज्यादा तला-भुना न खाएं।


  • लो ग्लाइसिमिक इंडेक्स वाली चीजें यानी जो शरीर में जाकर धीरे-धीरे ग्लूकोज़ में बदलती हैं , खानी चाहिए। इनमें हरी सब्जियां , सोया , मूंग दाल , काला चना , राजमा , ब्राउन राइस , अंडे का सफेद हिस्सा आदि शामिल हैं।
  • खाने में करीब 20 फीसदी फाइबर जरूर होना चाहिए। गेहूं से चोकर न निकालें। लोबिया , राजमा , स्प्राउट्स आदि खाएं क्योंकि इनसे प्रोटीन और फाइबर दोनों मिलते हैं। स्प्राउट्स में ऐंटि-ऑक्सिडेंट भी काफी होते हैं।
  • दिन भर में 4-5 बार फल और सब्जियां खाएं लेकिन एक ही बार में सब कुछ खाने की बजाय बार-बार थोड़ा-थोड़ा करके खाएं। फलों में चेरी , स्ट्रॉबेरी , सेब , संतरा , अनार , पपीता , मौसमी आदि और सब्जियों में करेला , घीया , तोरी , सीताफल , खीरा , टमाटर आदि खाएं।

  • रोजाना एक मुट्ठी ड्राइ-फ्रूट्स खाएं यानी 10-12 बादाम या 5-7 बादाम और 3-4 अखरोट खा सकते हैं।
  • घीया , करेला , खीरा , टमाटर , अलोवेरा और आंवला का जूस खास फायदेमंद है।
  • लो फैट दही और स्किम्ड/डबल टोंड दूध लेना चाहिए। ग्रीन टी पीना अच्छा है। चाय के साथ हाई फाइबर बिस्किट या फीके बिस्किट ले सकते हैं। बीपी नहीं है तो नमकीन बिस्किट भी खा सकते हैं।
  • जौ (बारले) , काला चना , मूंग दाल और जामुन खासतौर पर फायदेमंद हैं। इनका ग्लाइसिमिक इंडेक्स भी कम है और ये पित्त के इंबैलेंस को कम करने के साथ-साथ अगर अंदर सूजन हो गई है तो उसे भी कम करते हैं।
  • काला नमक डालकर छाछ पिएं। नारियल पानी पिएं। घर में बने सूप पिएं।
  • नीम-करेला पाउडर ले सकते हैं। हालांकि इसका कोई फौरी फायदा नहीं होता कि कोई उलटा-सीधा खाने के बाद सोचे कि दो चम्मच नीम-करेला पाउडर खा लेंगे तो ठीक हो जाएगा। यह गलत है। लेकिन लंबे वक्त में यह जरूर फायदा पहुंचाता है।

परहेज करें


  • चीनी , शक्कर , गुड़ , गन्ना , शहद , चॉकलेट , पेस्ट्री , केक , आइसक्रीम आदि मीठी चीजें न खाएं।
  • हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजों से बचें क्योंकि ये जल्दी ग्लूकोज में बदल जाती हैं। इससे शरीर में शुगर एकदम से बढ़ जाता है। ऐसे में इंसुलिन को शुगर कंट्रोल करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। इनमें प्रमुख हैं मैदा , सूजी , सफेद चावल , वाइट ब्रेड , नूडल्स , पिज़्ज़ा , बिस्किट , तरबूज , अंगूर , सिंघाड़ा , चीकू , केला , आम , लीची आदि।
  • पूरी , पराठें , पकौड़े आदि न खाएं। इनसे वजन के साथ-साथ कॉलेस्ट्रॉल भी बढ़ता है।
  • जूस से बचना चाहिए क्योंकि इनमें शुगर की मात्रा ज्यादा होती है। पैक्ड जूस बिल्कुल न लें। सीधे फल खाना ज्यादा फायदेमंद है।
  • सब्जियों में आलू , अरबी , कटहल , जिमिकंद , शकरकंद , चुकंदर न खाएं। इनमें स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होता है , जो शुगर बढ़ा सकते हैं। वैसे , इन्हें उबाल कर कभी-कभी खाया जा सकता है लेकिन फ्राई करके कभी न खाएं।
  • फलों में आम , चीकू , अंगूर , केला , पाइन ऐपल , शरीफा आदि से परहेज करें क्योंकि इनमें शुगर काफी ज्यादा होती है।
  • मैदा और मक्के का आटा न खाएं। इनका ग्लाइसिमिक इंडेक्स ज्यादा होता है और ये रिफाइन भी होते हैं।
  • वाइट राइस की बजाय ब्राउन राइस खाएं। चावलों का मांड निकालकर खाना सही नहीं है क्योंकि इससे सारे विटामिन और मिनरल निकल जाते हैं।
  • ऐनिमल फैट (मक्खन , पनीर , मीट आदि) कम कर देना चाहिए।
  • शराब डॉक्टर की सलाह पर ही पीएं। खाली पेट बिल्कुल न पीएं। इससे हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर लेवल का एकदम नीचे गिर जाना) हो सकता है। ज्यादा शराब पीने से यूरिक एसिड और ट्राइग्लाइसराइड बढ़ता है और शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल होता है।

नोट : शुगर के इलाज में डायट का रोल 60 फीसदी है। बाकी 40 फीसदी एक्सर्साइज और स्ट्रेस मैनेजमेंट पर निर्भर करता है।

कॉलेस्ट्रॉल

कॉलेस्ट्रॉल के मरीजों को हेल्थी और बैलेंस्ड डायट लेनी चाहिए। वजन कंट्रोल में रखने के लिए उन्हें कम कैलरी खानी चाहिए। ध्यान देनेवाली बात यह है कि कॉलेस्ट्रॉल के कई मरीज फैट पूरी तरह बंद कर देते हैं। यह सही नहीं है क्योंकि शरीर के लिए फैट्स भी जरूरी हैं , बस क्वॉलिटी और क्वॉन्टिटी का ध्यान रखें।


  • तेलों का सही बैलेंस जरूरी है। एक दिन में कुल तीन चम्मच तेल काफी है। तेल बदल-बदल कर और कॉम्बिनेशन में खाएं , मसलन एक महीने सरसों और मूंगफली का तेल यूज करें तो दूसरे महीने रिफाइंड और कनोला का। ये सिर्फ उदाहरण हैं। आप अपनी पसंद से कॉम्बिनेशन बना सकते हैं। कॉम्बिनेशन और बदल-बदल कर तेल खाने से शरीर को सभी जरूरी फैट्स मिल जाते हैं। ऑलिव ऑइल यूज करें। इससे कॉलेस्ट्रॉल कम होता है , लेकिन इसे ज्यादा गरम न करें। इसे सलाद आदि पर डालकर खा सकते हैं।
  • ऐसी चीजें खाएं , जिनमें फाइबर खूब हो , जैसे कि गेहूं , ज्वार , बाजरा , जई आदि। दलिया , स्प्राउट्स , ओट्स और दालों के फाइबर से कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। आटे में चोकर मिलाकर इस्तेमाल करें।
  • हरी सब्जियां , साग , शलजम , बीन्स , मटर , ओट्स , सनफ्लावर सीड्स , अलसी आदि खाएं। इनसे फॉलिक एसिड होता है , जो कॉलेस्ट्रॉल लेवल को मेंटेन करने में मदद करता है।
  • अलसी , बादाम , बीन्स , फिश और सरसों तेल में काफी ओमेगा-थ्री होता है , जो दिल के लिए अच्छा है।
  • मेथी , लहसुन , प्याज , हल्दी , बादाम , सोयाबीन आदि खाएं। इनसे कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। एक चम्मच मेथी के दानों को पानी में भिगो लें। सुबह उस पानी को पी लें। मेथी के बीजों को स्प्राउट्स में मिला लें , उसमें फाइबर होता है।
  • एचडीएल यानी गुड कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाने के लिए रोजाना पांच-छह बादाम खाएं। इसके अलावा ओमेगा थ्री वाली चीजें अखरोट , फिश लीवर ऑयल , सामन मछली , फ्लैक्स सीड्स (अलसी के बीज) खाने चाहिए।
  • कॉलेस्ट्रॉल लिवर के डिस्ऑर्डर से बढ़ता है। लिवर को डिटॉक्सिफाइ करने के लिए अलोवेरा जूस , आंवला जूस और वेजिटेबल जूस लें। इन तीनों को मिलाकर रोजाना एक गिलास जूस लें। कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा है तो दिन में दो गिलास भी पी सकते हैं।
  • नारियल पानी पीएं। शहद ले सकते हैं क्योंकि इससे इम्युनिटी बढ़ती है।

परहेज करें


  • तला-भुना खाना न खाएं। भाप में पकाकर खाना खाएं। देसी घी , डालडा , मियोनिज , बटर न लें। बिस्किट , कुकीज , मट्ठी आदि में काफी ट्रांसफैट होता है , जो सीधा लिवर पर असर करता है। उससे बचें।
  • प्रोसेस्ड और जंक फूड से बचें। पेस्ट्री , केक , आइसक्रीम , मीट , पोर्क , भुजिया आदि से भी परहेज करें।
  • फुल क्रीम दूध और उससे बना पनीर या खोया न खाएं।
  • नारियल और नारियल के दूध से परहेज करें। इसमें तेल होता है।
  • उड़द दाल , नमक , और चावल ज्यादा न खाएं। कॉफी भी ज्यादा न पिएं।

नोट : खूब एक्सर्साइज करें क्योंकि सिर्फ खाने से बहुत फायदा नहीं होता। दवाओं खासकर पेनकिलर दवाओं और स्टेरॉइड क्रीम/इंजेक्शन का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करें , क्योंकि इनका लिवर पर सीधा बुरा असर हो सकता है और शरीर में पानी भी रुक सकता है। स्टेरॉइड हॉर्मोंस होते हैं और इनका इस्तेमाल इनफर्टिलिटी , सर्जरी , साइनस आदि में परेशानी बढ़ने पर होता है। शराब या सिगरेट पीने से बचें। लिवर और कॉलेस्ट्रॉल के बीच सीधा संबंध है। लिवर को ठीक रखना जरूरी है क्योंकि लिवर ठीक है तो कॉलेस्ट्रॉल बढ़ेगा ही नहीं। दूसरी ओर , कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा है तो फैटी लिवर हो सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर

हाई बीपी दिल की बीमारी का इशारा हो सकता है। डायट में सैचुरेटिड फैट जैसे कि मक्खन , घी , मलाई आदि कम करें क्योंकि इससे दिल की नलियों के संकरा होने का खतरा बढ़ जाता है। जितना हो सके , लो फैट डायट लें।


  • कैल्शियम , मैग्नीशियम और पोटैशियम आदि प्रचुर मात्रा में खाएं। ये तत्व दूध , हरी सब्जियां , दालें , संतरा , स्ट्रॉबेरी , खुबानी , बादाम , केला और सीताफल आदि में खूब मिलते हैं।
  • सूप , सलाद , खट्टे फल , नीबू पानी , नारियल पानी , काला चना , लोबिया , अलसी , आडू , सोया आदि खाना फायदेमंद है।
  • गाजर , पत्ता गोभी , ब्रोकली , पालक , कटहल , टमाटर , लहसुन , प्याज और पत्तेदार सब्जियां खाएं। मौसमी फल खूब खाएं।
  • पानी खूब पीएं। दिन भर में करीब 10 गिलास पानी पिएं।
  • ओमेगा थ्री वाली चीजें , जैसे कि अखरोट , बादाम , फिश ऑयल , अलसी आदि खाएं। रोजाना पांच-सात बादाम और 3-4 अखरोट जरूर खाएं।
  • बीपी के लिए इन दिनों DASH डायट यानी डायट्री अप्रोचिस टु स्टॉप हाइपरटेंशन खूब चलन में है। इसमें क्या न खाएं से ज्यादा जोर इस बात पर होता है कि क्या खाएं। इसे अमेरिकन हार्ट असोसिएशन के साथ-साथ इंडियन नैशनल कैंसर इंस्टिट्यूट ने भी रेकमेंड किया है। इसमें दिन भर में एक किलो तक फल-सब्जियां और कार्बोहाइड्रेट व लो फैट मिल्क प्रॉडक्ट्स पर खूब जोर होता है।

परहेज करें


  • नमक कम खाएं। दिन में करीब आधा चम्मच नमक काफी है। टेबल सॉल्ट यूज न करें। दिन भर में आधा चम्मच के करीब नमक खाएं। यह हमें खाने से आसानी से मिल जाता है। वैसे , अनाज , फल , सब्जियों आदि से भी हमें नैचरल तरीके से नमक मिल जाता है। हफ्ते में एक बार बिना नमक के खाने की आदत डालें।
  • सॉस , अचार , चटनी , अजीनोमोटो , बेकिंग पाउडर आदि से परहेज करें। पापड़ भी बिना नमक वाला खाएं।
  • पैक्ड या फ्रोजन आइटम न खाएं। इनमें प्रिजरवेटिव होते हैं और नमक भी ज्यादा होता है। इसी तरह बेकरी आइटम्स में सैचुरेटिड फैट ज्यादा होता है। चिप्स , बिस्कुट , भुजिया , कुकीज , फ्रोजन मटर , केक , पेस्ट्री आदि से बचें।
  • खाने में ऊपर से नमक न मिलाएं। सलाद , रायते आदि में भी नमक न डालें।
  • नियमित रूप से नॉन वेज खासकर हेवी नॉन वेज (रेड मीट आदि) खाने से बीपी की आशंका बढ़ जाती है।


नोट : बीपी कंट्रोल करने में डायट का रोल 50 फीसदी है। स्ट्रेस मैनेजमेंट और एक्सर्साइज से बाकी फायदा मिलता है। योगासन , प्राणायाम और मेडिटेशन करें। भ्रामरी प्राणायाम खासतौर से फायदेमंद है।

लो ब्लडप्रेशर

लो बीपी में खाने का कोई खास परहेज नहीं होता। उन्हें हेल्थी चीजें खानी चाहिए और तीनों वक्त खाना और दो बार स्नैक्स लेने चाहिए। इन्हें ध्यान रखना होगा कि खाने की क्वॉलिटी के साथ क्वॉन्टिटी भी अच्छी हो , यानी भरपूर खाएं। कम खाने से बीपी और लो हो सकता है।


  • अगर बीपी एकदम लो हो गया है तो कॉफी या चाय पी लें। इससे फौरी राहत मिलती है और चाय-कॉफी में मौजूद टेनिन व निकोटिन बीपी को बढ़ा देता है। लेकिन लंबे समय में इसका कोई फायदा नहीं होगा।
  • नॉर्मल बैलेंस डायट लें। स्प्राउट्स , दालें , काला चना , फल या सब्जियां खूब खाएं। हर दो-तीन घंटे में हल्का-फुल्का खाएं। इससे बीपी में बहुत उतार-चढ़ाव नहीं होगा।
  • केसर , खजूर , केला , दालचीनी और काली मिर्च खाएं।
  • पानी खूब पीएं। दिन में 10-12 गिलास पानी जरूर पीएं। अगर मरीज के अंदर सोडियम लेवल कम है तो डॉक्टर उससे डायट में नमक बढ़ाने को कहते हैं।

नोट : एक्सर्साइज न करने से बीपी लो हो सकता है। नियमित रूप से एक्सर्साइज जरूर करें।

हेपटाइटिस

हेपटाइटिस ए , बी , सी , डी और ई के मरीजों को नॉर्मल हेल्थी डायट लेनी चाहिए। किसी भी हेपटाइटिस में खाने का खास परहेज नहीं होता। बस , सिरोसिस होने पर नमक कम खाना बेहतर होता है। बहुत तला-भुना खाना नहीं खाना चाहिए। इससे लिवर पर दबाव पड़ता है। कार्बोहाइट्रेड खूब खाने चाहिए और उनके मुकाबले प्रोटीन थोड़े कम क्योंकि इन्हें पचाने के लिए लिवर को काफी मेहनत करनी पड़ती है। हालांकि मरीज की लिवर की स्थिति देखकर भी डॉक्टर प्रोटीन की मात्रा तय करते हैं। ज्यादातर लोग मानते हैं कि उन्हें हेल्थी और तेल नहीं लेना चाहिए , जो कि सही नहीं है।


  • हाई कार्बोहाइड्रेट और मीठी चीजें खाएं , जैसे कि केला , चीकू , आलू , शकरकंद , जैम , ग्लूकोज , रूहअफजा आदि। मीठे में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा होते हैं , जिनसे एनर्जी ज्यादा मिलती है और लिवर पर भी जोर नहीं पड़ता।
  • ऐनिमल प्रोटीन के मुकाबले वेजिटेबल प्रोटीन ज्यादा खाएं। जैसे कि मूंग दाल , काला चना , लोबिया , अरहर , मलका मसूर आदि। मूंग दाल खासतौर से फायदेमंद है। खिचड़ी में भी डालकर खा सकते हैं।
  • गाय का फैट-फ्री दूध और छाछ ले सकते हैं। दूध से बने हुए कस्टर्ड , खीर आदि भी फायदेमंद है।
  • खिचड़ी , दलिया , चावल , रोटी , मक्का , सूप , उपमा , पोहा , इडली आदि खाएं। मीठे फल खूब खाएं। सब्जियों में हरी सब्जियां , आलू और जिमिकंद खाएं।
  • सलाद को हल्का भाप में पका लें। इससे इनफेक्शन होने का खतरा कम होता है।
  • फ्रेश जूस , सोया मिल्क और नारियल पानी पिएं।
  • तला-भुना न खाएं। इससे पहले से कमजोर हो चुके लिवर पर प्रेशर पड़ता है।
  • गैस बनानेवाली चीजें जैसे राजमा , छोले , उड़द दाल आदि कम खाएं।
  • नमक कम कर दें। खासकर सिरोसिस है तो नमक बेहद कम कर दें। ज्यादा खाने से शरीर में पानी जमा हो सकता है।
  • कच्ची सब्जियां खाने से बचना चाहिए। इससे इनफेक्शन होने की आशंका बढ़ जाती है।
  • शराब पीना बिल्कुल बंद कर दें। इलाज के बाद अगर डॉक्टर इजाजत दे तो ही शराब पिएं और वह भी लिमिट में।


नोट : शरीर के बाकी अंगों के मुकाबले लिवर में ठीक होने और फिर से तैयार होने की क्षमता सबसे ज्यादा होती है , इसलिए मरीज संयम न खोए और अपनी दवा और डायट का पूरा ध्यान रखें।

अस्थमा

अस्थमा के मरीजों के लिए अलग से कोई डायट रेकमेंड नहीं की जाती। उन्हें बस न्यूट्रिशन से भरपूर खाना खाने की सलाह दी जाती है। ये लोग आमतौर पर ऐलर्जी के शिकार जल्दी बनते हैं , इसलिए इन्हें उन चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है , जिनसे ऐलर्जी हो सकती है , जैसे कि अंडा , मछली या तीखी महक वाली चीजें। हालांकि हर किसी को ऐलर्जी हो , या सबको एक ही चीज से ऐलर्जी हो , यह जरूरी नहीं है।


  • जिस वक्त अस्थमा का अटैक होता है , उस वक्त मरीज को पानी ज्यादा पीना चाहिए। पानी के साथ-साथ जूस , नारियल पानी , लस्सी आदि भी भरपूर पिएं क्योंकि लगातार तेज-तेज सांस लेने से पानी की कमी हो जाती है।
  • हाई फाइबर और प्रोटीन से भरपूर डायट लेनी चाहिए। इस दौरान मसल्स ज्यादा काम करती हैं , इसलिए प्रोटीन से भरपूर दालें , सोयाबीन , अंडा आदि खाएं।
  • विटामिन बी वाली चीजें जैसे कि हरी पत्तेदार सब्जियां और दालें खाएं। ब्रोकली खासतौर पर फायदेमंद है। मैग्नीशियम से भरपूर सूरजमुखी का तेल या बीज खाएं।
  • इनफेक्शन से बचने की कोशिश करें। जिस चीज से ऐलर्जी है , वह न खाएं। साथ ही बहुत ज्यादा ठंडा या गर्म खाना न खाएं। सामान्य तापमान वाली चीजें खाना बेहतर है।
  • अस्थमा के मरीज को खट्टा और सामान्य ठंडा नहीं खाना चाहिए , यह मिथ है। जिन्हें इनसे ऐलर्जी होती है , उन्हें ही इससे नुकसान होता है। बाकी मरीज खा सकते हैं , लेकिन एक्ट्रीम टेंपरेचर यानी बहुत ज्यादा ठंडी और बहुत ज्यादा गर्म चीजों से बचें।
  • आयुर्वेद के मुताबिक कफ बढ़ानेवाली चीजें न खाएं , जैसे कि दूध से बनी चीजें और खट्टी व ठंडी चीजें।

शुगर के मरीज ऐसे रखें रोजे

रमजान का महीना शुरू हो रहा है। डायबीटीज के मरीजों को रोजे रखते हुए खास ध्यान रखने की जरूरत है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक शुगर के मरीजों को रोजे रखने से बचना चाहिए , खासकर जिनकी शुगर कंट्रोल में नहीं है या फिर जो इंसुलिन पर हैं क्योंकि इससे उनका ब्लड शुगर कंट्रोल से बाहर जा सकता है। लेकिन जो लोग रोजे रखना ही चाहते हैं , उन्हें पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और उनकी बताई दवाओं और खाने का पूरा ख्याल रखना चाहिए। वैसे , कुरान में भी बच्चों , गर्भवती महिलाओं , विकलांगों के साथ - साथ बीमारों को भी रोजे रखने से छूट दी गई है।

13 देशों में रमजान के दौरान रोजे रखने वाले 12,243 मरीजों पर स्टडी की गई। पाया गया कि इस दौरान मरीजों की सेहत संबंधी समस्याएं बढ़ गईं। लंबे समय तक रोजा रखने से शरीर में जमा शुगर इस्तेमाल होकर खत्म हो सकती है , नतीजन हाइपोग्लाइसिमिया हो सकता है। अगर किसी को हाइपोग्लाइसिमिया यानी ब्लड में शुगर 70 एमजी से कम होने का डर हो तो उसे रोजा रखने से पहले दवा के इस्तेमाल में बदलाव करना चाहिए। ज्यादा पसीना आना , एकाग्रता में कमी , हाथ - पैरों में सुई - सी चुभना , घबराहट , कंपकंपी , आवाज लड़खड़ाना , बेहोशी आदि हाइपोग्लाइसिमिया के लक्षण हैं। वैसे , जिन्हें भी शुगर है , वे अपनी डाइट का पूरा ध्यान रखें।

मैक्स में कंसल्टेंट एंडोक्रॉनॉलजिस्ट डॉ . सुजीत झा के मुताबिक रोजों के दौरान रिफाइंड चीजें जैसे कि मैदा , वाइट ब्रेड , वाइट राइस आदि न खाएं। वाइट शुगर से भी बचें क्योंकि ग्लाइसिमिक इंडेक्स ज्यादा होने की वजह से ये चीजें शुगर में फटाफट बदल जाती हैं , जिससे शुगर लेवल गड़बड़ा जाएगा।

सहरी
सहरी ( सूर्योदय से पहले ) में स्टार्च वाली चीजें जैसे कि ब्राउन राइस , चपाती , होल वीट ब्रेड , मसूर की दाल , दलिया आदि खाएं। प्रोटीन वाली चीजें दूध , छैना और ड्राई फ्रूट्स आदि खाना अच्छा है। इन सब चीजों से शुगर धीरे - धीरे रिलीज होती है और लंबे समय तक शुगर का लेवल मेंटेन रहता है। पेट भी ज्यादा देर तक भरा रहता है। सहरी खत्म होने से पहले पानी और लस्सी आदि लें। लस्सी फैट - फ्री दूध की हो। खाने और पानी के बीच फासला रखें। चाय , कॉफी , पैक्ड जूस से बचें। चाय - कॉफी में मौजूद कैफीन से शरीर में पानी की कमी हो सकती है और पैक्ड जूसों में शुगर काफी ज्यादा होती है।

इफ्तार
इफ्तार ( सूर्यास्त के बाद ) में खजूर लेने की परंपरा रही है। कैलरी और फाइबर के अच्छे सोर्स हैं खजूर , इसलिए इनसे रोजा तोड़ सकते हैं। इस दौरान पूरा खाना खाएं। जितना मुमकिन हो , फल और सब्जियों को छिलके समेत खाएं। इससे कब्ज नहीं होगी। तली - भुनी और मीठी चीजें न खाएं। इफ्तार के दौरान ज्यादा ऑइली खाने से वजन बढ़ सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर के मरीज रोजों के दौरान पानी और नारियल पानी खूब पीएं। नमक कम खाएं और मन को शांत रखें। कॉलेस्ट्रॉल के मरीजों ऑयली चीजों और हेवी नॉनवेज से परहेज रखें। हालांकि ये चीजें इस दौरान खूब बनती हैं , लेकिन बचें तो सेहत के लिए फायदेमंद रहेगा।

किसका सोर्स क्या

कार्बोहाइड्रेट : अनाज , चावल , दलिया , कॉर्नफ्लैक्स , ब्रेड , बिस्कुट , नूडल्स , मैदा , शुगर , आलू , शकरकंद , चुकंदर आदि। दालों में भी करीब 50 फीसदी कार्बोहाइड्रेट होते हैं। किशमिश , मुनक्का जैसे ड्राइ-फ्रूट्स में हेल्थी कार्बोहाइड्रेट होते हैं।

प्रोटीन : नॉनवेज , अंडा , फिश , दालें , स्प्राउट्स , सोया आदि प्रोटीन के मुख्य सोर्स हैं।

विटामिन/मिनरल : सब्जियां , फल , ड्राइ-फ्रूट्स , छिलके वाली चीजें जैसे कि दालें , गेहूं का चोकर , ब्राउन राइस आदि।

फैट : बादाम , अखरोट , पिस्ता , चिलकोजा , सनफ्लावर बीज , ऑलिव ऑइल आदि में हेल्थी फैट होते हैं। बाकी सभी तरह के तेल और घी फैट का सोर्स हैं।

फाइबर : फल , सब्जियां , दलिया , ब्राउन राइस , चोकर आदि।

ओमेगा थ्री : फिश , अलसी , बीन्स , बादाम , सरसों का तेल आदि।

खा-खाकर कर हो जाएं पतले



वजन कम करना या कंट्रोल में रखना आसान काम नहीं है। इसके लिए न जाने क्या-क्या जतन करने पड़ते हैं। सबसे ज्यादा जोर डाइटिंग पर होता है लेकिन यह वजन कम करने का सही तरीका नहीं है। डाइटिंग से बेहतर है सही डाइट, जिसके जरिए आप वजन कंट्रोल में रख सकते हैं और अच्छी सेहत भी पा सकते हैं। कैसे-
वजन कम करने का जिक्र आते ही सबसे पहले दिमाग में आती है डाइटिंग, लेकिन एक्सपर्ट इसे सही तरीका नहीं मानते। इससे बेहतर है, वक्त पर सही डाइट लेना। डाइटिंग से आंखों के नीचे काले घेरे, स्किन का बेजान और ढीला होना, बाल झड़ना, मेमरी कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

वजन घटाने के लिए भूखे रहना या पूरी तरह खाना छोड़ना सही नहीं है। सही वक्त पर, सही खाना ही वजन घटाने का सही फंडा है। सो, जब भी वजन कम करने की सोचें, बेशक खूब खाएं, बार-बार खाएं, पर हेल्दी और कम कैलरी वाली चीजें खाएं।

कैसा हो खाना
वजन कम करना चाहते हैं तो ऐसा खाना खाएं, जिसमें फैट कम हो और प्रोटीन व फाइबर ज्यादा हो। एक ग्राम कार्बोहाइड्रेट में चार कैलरी होती हैं, जबकि एक ग्राम फैट नौ कैलरी देता है। साथ ही हाई फाइबर डाइट पचने में ज्यादा वक्त लेती है। इससे बॉडी को धीरे-धीरे ग्लूकोज मिलता है और देर तक पेट भरे होने का अहसास होता है। ज्यादा कैलरी वाली चीजों के अलावा हाई ग्लाइसिमिक इंडेक्स यानी वे खाने जो शरीर में जाकर जल्दी ग्लूकोज में बदलते हैं, नहीं खाने चाहिए।

इनमें प्रमुख हैं मैदा, सूजी, सफेद चावल, वाइट ब्रेड, नूडल्स, पित्जा, बिस्कुट आदि। खाना जितना जल्दी शुगर में बदलेगा, बॉडी में उतना ज्यादा फैट आएगा। इसके बजाय लो ग्लाइसिमिक इंडेक्स वाले खाने जैसे हरी सब्जियां, सोया, मूंग दाल, काला चना, राजमा, ब्राउन राइस, अंडे का सफेद हिस्सा आदि खाना चाहिए। इसे इस तरह भी समझ सकते हैं। एक कटोरी दाल में अगर सौ कैलरी हैं तो बॉडी में डाइजेस्ट होते-होते 30 कैलरी रह जाएंगी। वहीं, अगर एक कटोरी खीर खाएंगे तो उसमें कैलरी तो ज्यादा होंगी ही, साथ ही वे सीधे फैट बन जाएंगी।

वजन कम करने का सही तरीका यह है कि अगर हम एक्सरसाइज नहीं कर पा रहे हैं तो हेल्दी खाने के जरिए अपनी डाइट में से रोजाना 500 कैलरी कम कर दें। इससे हफ्ते में आधा किलो वजन कम हो सकता है। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं - दो परांठों की बजाय दो रोटी खाएं, खाने के बाद मिठाई न खाएं या फिर शाम को स्नैक्स में समोसे के बजाय मुरमुरे की नमकीन खाएं, तो आप आसानी से 400-500 कैलरी कम कर सकते हैं।

क्या खाएं और क्यों
- ताजा सलाद, स्प्राउट्स, घर में बना सूप, वेज सैंडविच आदि खाएं। सलाद में क्रीम या म्योनिज और रेडी-टु-कुक सूप से बचें क्योंकि इनमें कैलरी काफी ज्यादा होती हैं। सैंडविच होल-वीट या ब्राउन ब्रेड का बनाएं और उसमें बटर या म्योनिज की जगह पुदीना और आंवले की चटनी ले सकते हैं। यह चटनी इम्युनिटी बढ़ाती है। मौसमी सब्जियों की स्टफिंग भी कर सकते हैं।

- फ्रूट्स और सब्जियों ज्यादा खानी चाहिए क्योंकि इनमें एंटी-ऑक्सिडेंट काफी होते हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाते हैं।

- सब्जियां मिलाकर या भरकर रोटियां बनाएं। भरवां परांठे खाने की बजाय भरवां रोटी खाएं। इससे एक्स्ट्रा फैट से बचेंगे और सब्जियां भी पेट में जाएंगी।

- ढोकला, इडली, उपमा, पोहा आदि खाएं। इनमें दाल, चावल और नीबू आदि होते हैं, जो प्रोटीन और विटामिन-सी से भरपूर होते हैं।

- ग्रीन टी पिएं। इसमें एंटी ऑक्सिडेंट होते हैं, जो दिल के लिए फायदेमंद हैं। यह वजन कम करने में भी मदद करती है। दिन में तीन-चार बार ग्रीन टी ले सकते हैं।

- सुबह उठकर नीबू-पानी लेना चाहिए। हालांकि कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है कि इससे वजन कम होता है या नहीं, लेकिन यह बॉडी को डिटॉक्स जरूर करता है। इसमें नमक या चीनी की बजाय थोड़ा-सा शहद डाल सकते हैं।

- मौसमी फल खाएं। इनमें मौजूद फाइबर की मदद से वजन कम होता है। पैक्ड जूस नहीं पिएं क्योंकि उसमें शुगर की मात्रा काफी ज्यादा होती है।

- नॉर्मल आटे से बेहतर है चोकर वाले आटे का इस्तेमाल। पैक्ड आटे में चोकर नहीं होता, इसलिए मार्केट में ब्रैन नाम पैक्ड चोकर मिलता है। उसे आटे में मिला लें। चार हिस्से आटे में एक हिस्सा ब्रैन मिला लें। इससे पाचन बेहतर होता है।

किसकी बजाय क्या खाएं
वाइट ब्रेड सैंडविच के बदले होल वीट या ब्राउन ब्रेड
भरवां परांठा के बदले भरवां रोटी
पुलाव/बिरयानी/वाइट राइस के बदले ब्राउन राइस (मांड निकला)
समोसे/पकौड़े के बदले इटली/उपमा/पोहा
मिठाई के बदले गुड़/सूखे मेवे
कोल्ड ड्रिंक के बदले नारियल पानी/नीबू-पानी
दूध वाली चाय के बदले हर्बल टी/ लेमन टी
फुल क्रीम दूध के बदले डबल टोंड दूध
जूस के बदले संतरा/मौसमी
मीठी लस्सी के बदले छाछ
पनीर के बदले पनीर (टोंड मिल्क से बना)/टोफू
अंडा (फुल) के बदले अंडे का सफेद हिस्सा

इन्हें भी आजमाएं - कई बार हमारा दिमाग पहचान नहीं पाता कि भूख है या प्यास। ऐसे में जब भी भूख लगे, एक गिलास पानी पी लें। अगर फिर भी भूख लगे तो कुछ खा लें। इससे खाने का हिस्सा कम हो जाता है और पेट के भरे होने का अहसास भी होता है।

- तीन बार खाना न खाकर, पांच या सात बार खाएं। ध्यान रहे कि मेन मील कभी वजन नहीं बढ़ाता। बीच-बीच में जो खाते हैं, वही वजन बढ़ाता है। स्नैक्स हमेशा हेल्दी खाएं क्योंकि इससे देर तक पेट भरे होने का अहसास होता है।

- बहुत ज्यादा भूख लगने से पहले कुछ खा लें। मसलन रात 8 बजे डिनर का इंतजार करने से अच्छा है 7 बजे कोई फल खा लेना।

- खाना खाने के 20 मिनट बाद दिमाग को पेट भरे होने का मेसेज मिलता है और उसके बाद ही भूख शांत होने का अहसास होता है, इसलिए धीरे-धीरे और चबा-चबाकर खाएं।

- वजन घटाने के लिए कुकिंग का तरीका बदलना बहुत जरूरी है। डीप फ्राई से बचें और खाने में तेल की मात्रा कम करें। खाना जितना मुमकिन हो, भाप में पकाएं।

- फैट कम लें, लेकिन पूरी तरह बंद न करें। विटामिन ए, डी, ई और के फैट में ही घुलते हैं। विटामिन ए स्किन और आंखों के लिए, विटामिन ई स्किन के लिए और ब्लड क्लॉटिंग (खून बहने से रोकना) के लिए विटामिन के होता है। थोड़ी मात्रा में अच्छे फैट (ऑलिव ऑयल, मूंगफली का तेल, कनोला का तेल) आदि ले सकते हैं।

- डिनर और सोने के बीच दो-ढाई घंटे का फासला होना चाहिए, वरना पेट पर फैट जमा हो जाता है। रात में हैवी कार्बोहाइड्रेट जैसे आलू, चावल, अरबी, जिमीकंद आदि न लें।

ये जरूर खाएं
खट्टे और मौसमी फल : संतरा, मौसमी, नीबू और आंवला जैसे फल-सब्जियां विटामिन सी से भरपूर होते हैं और वजन कम करने में मदद करते हैं क्योंकि विटामिन सी में फैट को डाइल्यूट करने और आसानी से शरीर से निकालने की क्षमता होती है। आंवला मेटाबॉलिाम बढ़ाता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।

सेब, बेरी आदि फल : सेब में पेक्टिन नामक केमिकल होता है। सेब के साथ-साथ ज्यादातर सभी फलों के छिलकों में पेक्टिन पाया जाता है। यह फैट को अब्जॉर्ब करता है।

सोयाबीन : सोयाबीन में मौजूद लेसिथिन केमिकल सेल्स पर फैट जमा होने से रोकता है। हफ्ते में कम-से-कम तीन बार सोयाबीन खाने से शरीर में फैट से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। इसे सब्जी या चावल आदि में डालकर खा सकते हैं। सोयाबीन क्रंच से उपमा या भुर्जी भी बना सकते हैं।

लहसुन : लहसुन का रस शरीर में मौजूद फैट्स को कम करने में मददगार है। लहसुन कच्चा खाएं और चबाकर खाएं तो बेहतर है।

ड्राई फ्रूटस : मुट्ठी भर नट्स रोज खाने चाहिए। इनमें बादाम, किशमिश, अखरोट और पिस्ता ले सकते हैं। लेकिन ये फ्राइड न हों और इनमें नमक भी नहीं होना चाहिए। बादाम बड़ी गिरी वाले लें क्योंकि इनमें तेल कम होता है। वैसे छोटी गिरी वाले मामड़ बादाम को बेहतरीन माना जाता है क्योंकि इसमें अच्छे ऑयल होते हैं लेकिन अगर वजन कम करने के लिहाज से खाना चाहते हैं तो बड़ी गिरी का बादाम खाना चाहिए। डायबीटीज और कॉलेस्ट्रॉल के मरीजों को भी बड़ी गिरी का बादाम खाना चाहिए। अखरोट में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 होते हैं। काजू न लें। उनमें फैट ज्यादा होता है, जो कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाता है।

कितनी चीनी और नमक
नमक शरीर में पानी को रोकता है, इसलिए ज्यादा नमक से बचना चाहिए। दिन भर में पांच ग्राम (करीब एक चम्मच) नमक काफी होता है। इसमें सब्जी आदि में डाला गया नमक भी शामिल है। लेकिन आमतौर पर लोग इससे ज्यादा ही नमक खाते हैं। तो भी दो चम्मच नमक से ज्यादा बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। कोशिश करें कि रात में 10 बजे के बाद नमक न लें। सलाद, रायता, ड्राई-फ्रूट्स, नीबू-पानी आदि में नमक से परहेज करें और टेबल सॉल्ट से दूर रहें। चीनी भी ज्यादा नहीं खानी चाहिए क्योंकि 5 ग्राम (1 चम्मच) चीनी में 20 कैलरी होती हैं।

टॉप 5 गलतियां, जो बढ़ाती हैं वजन 1. कम बार खाना, पर खूब खाना
कुछ लोगों को लगता है कि बार-बार खाने से बेहतर है, दिन में सिर्फ तीन बार खाना। ऐसे में ज्यादा भूख लगती है और लोग ज्यादा कैलरी ले जाते हैं। मसलन अगर ब्रेकफास्ट सुबह 9 बजे और लंच दोपहर 2 बजे लेंगे तो भूख ज्यादा लगेगी और लंच में ज्यादा खाना खाएंगे। बीच में 11 या 11:30 बजे अगर फल या ड्राइफ्रूटस या कोई और हेल्दी चीज खा लेंगे तो लंच में खाना कम खाएंगे। थोड़ी-थोड़ी देर में खाते रहने से एनर्जी जमा नहीं होती क्योंकि आपने जो पहले थोड़ा खाया होता है, उससे मिलनेवाली एनर्जी आप खर्च कर चुके होते हैं। साथ ही खाने को पचाने के लिए कैलरी की जरूरत होती है। कई बार खाने से ज्यादा कैलरी इस्तेमाल होती हैं। इससे बॉडी में ग्लूकोज के संतुलन के साथ-साथ मेटाबॉलिज्म भी बढ़ता है। हेवी डिनर भी वजन बढ़ने की अहम वजहों में से है। रात में हल्का खाना खाएं।

2. खाने के बाद मीठा
हममें से ज्यादातर लोगों के घर में खाने के बाद मीठा खाने का चलन है। यह कॉम्बिनेशन और कैलरी, दोनों लिहाज से गलत है। गलत कॉम्बिनेशन इसलिए कि भारी कार्बोहाइड्रेट या फैट के बाद शुगर नहीं खाना चाहिए। साथ ही मिठाई में मौजूद खूब सारी कैलरी सेहत के लिए और नुकसानदेह हैं। अगर खाने के बाद मीठा खाने का बहुत मन है तो गुड़ खा सकते हैं, लेकिन कम मात्रा में। गुड़ में मौजूद आयरन सेहत के लिए अच्छा है। सौंफ और किशमिश ले सकते हैं। सौंफ खाना पचाने में मदद करती है और किशमिश सीधे ग्लूकोज में नहीं बदलती। मीठा खाने का मन करे तो कोई मीठा फल खा सकते हैं लेकिन दोनों के बीच फासला रखें क्योंकि खाने के फौरन बाद फल नहीं खाना चाहिए। इससे गैस बनती है। साथ ही, हाइ कैलरी फ्रूट जैसे चीकू, केला, लीची, आम आदि न खाएं। पपीता, तरबूज या खरबूज खा सकते हैं।

3. बिंज ईटिंग की आदत
एक टॉफी या चॉकलेट से क्या होता है, यह बात अक्सर लोग एक-दूसरे को बोलते हैं, लेकिन यही छोटी-छोटी चीजें हमारे मोटापे की वजह बनती हैं। हाई कैलरी स्नैकिंग (पकौड़े, समोसे, नमकपारे, नमकीन, बिस्कुट आदि) और बिंज ईटिंग (बीच-बीच में छुटपुट खाना) की आदत वजन बढ़ने की बड़ी वजहों में से हैं। जो लोग चॉकलेट के शौकीन हैं, वे डार्क चॉकलेट की बजाय वेफर वाली चॉकलेट खाएं। हालांकि वेफर वाली सबसे छोटी चॉकलेट में भी करीब 125 कैलरी होती हैं, जो डेढ़ रोटी के बराबर हैं। ड्राई-फ्रूट्स वाली छोटी चॉकलेट में कैलरी और ज्यादा होती हैं। एक मीठे बिस्कुट में भी करीब 50 कैलरी होती हैं। स्नैक्स और खाने के बीच बिंज ईटिंग से बचना चाहिए। स्नैक्स में मुरमुरे, रोस्टेड (भुने हुए) स्नैक्स या नॉर्मल पॉपकॉर्न (पैक्ड नहीं) ले सकते हैं।

4. वीकएंड पर दावत
कई लोग हफ्ते में पांच-छह दिन डाइटिंग करते हैं, मसलन लिक्विड डाइट पर रहते हैं, सिर्फ फल या सब्जी खाते या प्रॉपर डाइट फॉलो करते हैं लेकिन वीकएंड पर जमकर खाते हैं। उन्हें लगता है कि एक दिन खाने से क्या फर्क पड़ता है। यह सही नहीं है। इससे पूरे हफ्ते का संयम बेकार जाता है और एक ही दिन में हफ्ते भर में कम की गईं कैलरी शरीर में लौट आती हैं। इससे बेहतर है पूरे हफ्ते अच्छी और बैलेंस्ड डाइट लें, जिसमें कैलरी और फैट कम हो लेकिन न्यूट्रिशन भरपूर हो।

5. शुगर-फ्री या डाइट आइटम
आजकल शुगर-फ्री या डाइट डिंक्स/आइटम फैशन में हैं। बहुत-से लोग नेचरल शुगर न लेकर शुगर-फ्री लेते हैं। थोड़े-बहुत दिन के लिए ऐसा किया जा सकता है लेकिन लंबे वक्त तक शुगर-फ्री लेना सेहत के लिए अच्छा नहीं है। शुगर-फ्री या डाइट फूड आइटम्स में आर्टिफिशल चीजें होती हैं। साथ ही शुगर-फ्री डालने के बाद भी केक, चॉकलेट आदि में मैदा, अंडा, क्रीम आदि के जरिए अच्छी-खासी कैलरी होती हैं।

वेट लॉस के फर्जी फंडों की असलियत



बढ़ते वजन से परेशान होकर लोगबाग तरह तरह के हथकंडे अपना कर वेट लॉस करना चाहते हैं। वेट लॉस के लिए लोग एक्सरसाइज से लेकर खुद को भूखा मारने की डाइट भी लेने से परहेज नहीं करते। लेकिन इसका नतीजा वेट लॉस न होकर कुछ और ही निकलता है। दरअसल जानकारी और तथ्यों के अभाव में लोग सुने सुनाए फंडों पर अमल करते हैं और पछताते हैं। वेट लॉस के ऐसे ही कुछ फर्जी फंडे और उनसे जुड़ी तथ्यात्मक सच्चाई।

ज्यादा पानी पीने से मोटे होते हैं

गलत धारणा। दरअसल कम पानी से वजन भी बढ़ता है और बॉडी की शेप भी खराब होती है। पर्याप्त पानी के अभाव में शरीर में जमा खाना सही तरीके से नहीं पच पाता और चयापचय प्रक्रिया बाधित होती है। पर्याप्त पानी पीने से वजन नहीं बढ़ता बल्कि शरीर में जमा फालतु चर्बी यूरिन के जरिए बाहर निकलती रहती है। पानी न होने पर यही चर्बी आपकी जांघों और कूल्हों पर जम जाती है।

वेटलिफ्टिंग से वजन कम होगा

गलत धारणा। वेटलिफ्टिंग से कोई पतला दुबला नहीं होता। इससे केवल आपको धकान होगी। अगर डायरेक्ट फैट घटाना है तो सबसे पहले रोज कार्डियो एक्सरसाइज करें। यदि कुछ दिनों में वजन कम होने के आसार दिखें तो उसी वजन को मेंटेन करने के लिए अपने जिम प्रशिक्षक से पूछकर वेटलिफ्टिंग करें। वेटलिफ्टिंग दरअसल शरीर को पुष्ठ बनाने के लिए की जाती है न कि वजन घटाने के लिए। इसकी बजाय अगर आप कुछ एक्सरसाइज करें तो आप कुछ वजन कम कर पाएंगे।

केवल फल खाने से कम होगा वजन

गलत धारणा। दिन भर केवल फल खाने से आपको वजन कम लग सकता है क्योंकि खाली फल खाने से शरीर में पानी की कमी होगी और देखने में वजन कम होगा। लेकिन यह वजन कम होना नहीं है। दूसरी बात यदि आप केवल फल ही खा रहे हैं तो ध्यान रखिए कि आपके शरीर में कार्बोहाइड्रेड की अधिकता हो रही है। एक स्तर के बाद यह कार्बोहाइड्रेड भी शरीर में जमा होने लगेगा और आपका वजन बढ़ेगा। इसके अलावा कुछ फल जैसे सेब में फ्रुकटोज (शुगर) ज्यादा होता है, इन्हें ज्यादा खाने से आपका वजन घटने की बजाय बढ़ जाएगा।

वेट लॉस के लिए फैटी फूड को ना

गलत धारणा। दरअसल हमारे शरीर में विटामिन्म के घुलने के लिए बॉडी फैट की जरूरत पड़ती है। सर्दियों में शरीर के तापमान को गर्म रखने के लिए भी यही बॉडी फैट काम करती है। ऐसे में यदि हम बॉडी फैट नहीं लेंगे तो शरीर बीमार पड़ जाएगा। इसलिए बॉडी फैट के कुछ फूड लेने ही चाहिए। इन फैटी फूड्स में समोसे, कचोड़ी, पिज्जा, बर्गर जैसी कई चीजें शामिल हैं। यानी कि ये फैटी फूड भी आपके शरीर के लिए जरूरी है। इनको हमेशा के लिए अलविदा न कहिए।

वॉकिंग से वेट लॉस होता है

पूरी तरह सही नहीं। दरअसल वॉकिंग एक अच्छी एक्सरसाइज है लेकिन यह तभी लाभदायक है जब इसके साथ हैल्दी डाइट भी ली जाए। हां यदि चाहें तो एरोबिक एक्सरसाइज से वजट घटा सकते हैं लेकिन इसके लिए वॉकिंग की सही स्पीड और तरीका पता होना चाहिए। रोज थोड़ी चहलकदमी खाना पचाती है और यह सबसे लाभदायक है। यदि आप तेज वॉक नहीं कर सकते तो धीरे धीरे आधा घंटा रोज घूमना भी वजन को नियंत्रित कर सकता है।

दिन में एक बार भोजन से वेट लॉस

बिलकुल गलत धारणा। दरअसल दिन में एक बार खाने से हमारी बॉडी स्टारवेशन मोड (भुखमरी) में चली जाती है। ऐसे में जब हम कुछ खाते हैं तो वो तुरंत बॉडी फैट में तब्दील होकर चर्बी के रूप में स्टोर हो जाता है। यह भोजन हमारे मेटाबोलिज्म को भी धीमा कर देता है और हमारा वजन कम होने की बजाय बढ़ जाता है। अगर आप एक ही बार खाना खाएंगे तो भूख से ज्यादा खाएंगे और पाचन करने में भी समय लगेगा। ऐसे में पेट में ठूंसा गया खाना चर्बी के रूप में शरीर पर जमा हो जाएगा।

कमजोर पाचन शक्ति वेट लॉस नहीं होता

बिलकुल गलत धारणा। दरअसल हर शरीर का अलग अलग स्तर का मेटाबालिज्म यानी पाचन ‌प्रक्रिया होती है। खास बात ये है कि ये वजन पर निर्भर करती है। जिसका जितना ज्यादा वजन होगा, पाचन प्रक्रिया उतनी ही मजबूत होगी। मतलब मोटे लोगों का मेटाबालिज्म ज्यादा मजबूत होता है और वो ज्यादा तेजी से वजन घटा सकते हैं। ऐसा देखा गया है कि मोटे लोग तेजी से ‍वेट लॉस कर पाते हैं जबकि पतले लोग वेट लॉस करने में समय लेते हैं।

नॉनवेज खाने से तेजी से घटेगा वजन

गलत धारणा। जबकि सच्चाई ये है कि नॉनवेज में खास पोषक तत्व नहीं होने के साथ साथ सेचुरेटेड फैट भी भारी मात्रा में होता है और इससे तेजी से वजन बढ़ता है। हाल ही में कराई गई एक सर्च के अनुसार वेज खाने वाले नॉनवेज खाने वालों की तुलना में 30 फीसदी ज्यादा वेट लॉस करते हैं। यही नहीं शाकाहारी लोगों के शरीर में बेड कोलेस्ट्रोल कम होता है और गुड कोलेस्ट्रोल बढ़ता है जबकि मांसाहारियों के संबंध में ऐसा नहीं होता।

थायरा‌इड के रोगी वेट लॉस नहीं कर पाते

बिलकुल गलत धारणा। थायराइड से पीड़ित लोग भी वेट लॉस कर सकते हैं। बर्शते वे अपनी दवा बंद न करें। पिछले दिनों डॉक्टरों ने थायराइड से पीड़ित 24 साल के व्यक्ति का 92किलो वजन कम कराया और वो भी महज 14 दिन में। इसलिए यदि आप थायराइड से पीड़ित हैं तो भी दवा के साथ साथ वजन कम करने की प्रक्रिया आरंभ कर सकते हैं। दरअसल रोग कोई भी हो नियमित दिनचर्या में उस रोग की दवा खाते हुए अपने डॉक्टर की सलाह पर आप वजन कम करने का काम आरंभ कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेनी जरूरी है।

नॉनवेज खाने से तेजी से घटेगा वजन

गलत धारणा। जबकि सच्चाई ये है कि नॉनवेज में खास पोषक तत्व नहीं होने के साथ साथ सेचुरेटेड फैट भी भारी मात्रा में होता है और इससे तेजी से वजन बढ़ता है। हाल ही में कराई गई एक सर्च के अनुसार वेज खाने वाले नॉनवेज खाने वालों की तुलना में 30 फीसदी ज्यादा वेट लॉस करते हैं। यही नहीं शाकाहारी लोगों के शरीर में बेड कोलेस्ट्रोल कम होता है और गुड कोलेस्ट्रोल बढ़ता है जबकि मांसाहारियों के संबंध में ऐसा नहीं होता।

गर्मियों की बीमारियों के प्राकृतिक उपचार

गर्मियां शुरू होते ही डिप्रेशन, एसिडिटी, गैस, कब्ज, जी घबराना, सीने में दर्द, जलन, चक्कर कई तरह की बीमारियां महिलाओं को घेर लेती हैं। घर के कामकाज में व्यस्त महिलाएं रोज की बीमारी है कौन जाएगा डॉक्टर के यहां कहकर इलाज को टालती रहती हैं। लेकिन महिलाएं चाहें तो डॉक्टर्स और ढेर सारी दवाइयों के झंझट में पड़े बगैर भी कुछ घरेलू उपायों और प्राकृतिक उपचार के जरिए इन परेशानियों से छुटकारा पा सकती हैं।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम - पद्मासन लगाकर कंधे, गर्दन, रीढ की हड्डी को सीधी रखकर बैठें। बाएं हाथ से ज्ञान मुद्रा लगाएं। दाहिने हाथ को ऊपर उठाकर दाहिनी नासिका को अंगुली से दबाएं और बांई नासिका से गहरी लम्बी सांस लें। इसके बाद बांई नासिका को अंगुली से दबाकर दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़े । विपरीत क्रम में इसी तरह करना है। इस प्राणायाम को 3 से 10 मिनट तक करें।
लाभ - . इस प्राणायाम के जरिए शरीर में स्थित लाखों-करोड़ों नाडियों का शोधन होता है। इससे जुकाम, खांसी, माइग्रेन, सिरदर्द, डिप्रेशन आदि में आराम मिलता है। साथ ही मन की शक्ति भी जाग्रत होती है।
शीतली प्राणायाम - पद्मासन में बैठकर दोनों हाथ से ज्ञान मुद्रा लगाएं। होठों को गोलाकार करते हुए जी को पाईप की आकृति में गोल बनाएं। अब धीरे-धीरे गहरा लम्बा सांस जी से खींचें। इसके बाद जी अंदर करके मुंह बंद करें और सांस को कुछ देर यथाशक्ति रोकें। फिर दोनों नासिकाओं से धीरे-धीरे सांस छोड़े । इस प्राणायाम को 20 से 25 बार करें।
लाभ- इससे गर्मीजनित रोग, एसिडिटी, क्रोध आदि के प्राव को कम किया जा सकता है।
कुंजल क्रिया - यह क्रिया सुबह खाली पेट की जाती है। उकडू ;कागासन, बैठकर 4.5 ग्लास गुनगुने पानी में थोडा-सा सैंधा नमक मिलाकर पी लें। अब खड़े होकर 90 डिग्री से आगे झुककर दाहिने हाथ की तर्जनी और मध्यमा उंगली को हलक में डालकर छोटी जी को दबाएं। पिया हुआ सारा पानी जब तक उल्टी के जरिए बाहर न आ जाएए अंगुली जी से टच करते रहें। इस दौरान बाएं हाथ से पेट पर भी दवाब डालें।
लाभ- पेट के विजातीय द्रव अम्ल गैस पित्त बाहर आ जाते हैं। अजीर्ण एसिडिटी दूर हो जाती है।
प्राकृतिक उपचार - गीली चादर लपेट - इसे वैट शीट पैक, होल बॉडी कम्प्रेस भी कहा जाता है। इसका प्रयोग डॉ. वी प्रिंसेज ने मानसिक दुर्बलता और विकृति दूर करने के लिए किया था। इसमें सिर और गर्दन अच्छी प्रकार धो लें। फिर पानी पिएं। अब एक बड़ी सूखी चादर को गीला कर निचोड लें। जमीन या चारपाई पर एक कम्बल बिछा लें। इसके बाद गीली चादर को कम्बल पर बिछा दें। पूरे शरीर को गीली चादर से लपेट लें। इसके बाद कम्बल को इस प्रकार लपेंटे जिससे शरीर पर लपेटी हुई चादर पूरी तरह ढक जाए। सिर पर गीला तौलिया रखें। बीच-बीच में ठंडा पानी या शिरोधार डालें। अब 45 मिनट के लिए सो जाएं। इसके बाद ठंडे पानी से शॉवर बाथ या स्पंज बाथ लें। इस स्नान को प्राकृतिक चिकित्सालय से से सीखकर भी किया जा सकता है।
मडबाथ - यह गर्मियों में आनंद देने वाला विशेष स्नान है। इससे न सिर्फ झुलसती गर्मी से आराम मिलता है बल्कि त्वचा भी अघिक मुलायम और चिकनी हो जाती है। इस स्नान में खेतों की छह फुट नीचे की मिट्टी या समुद्र की रेत काम में ली जा सकती है। इस मिट्टी को धूप में 2.3 घुटे सुखाएं। इसके बाद रात को चन्द्रमा की रोशनी में मिट्टी के बरतन में पानी डालकर मिट्टी को भीगोकर रखें। सुबह लकड़ी से मिट्टी को तब तक मिलाएंए जब तक वह चिकनी न हो जाए। आवश्यकतानुसार इसमें नीम की पत्तियां या गुलाबए गैंदे की पंखुडियां भी मिलाई जा सकती हैं। लेप तैयार होने के बाद इसे पूरे शरीर पर लगाएं और करीब ४५ मिनट तक इसे सुखाएं। इसके बाद खुले पानी से नहाएं या शॉवर बाथ लें। यदि त्वचा रूखी हो गई हो तो नहाने के बाद थोडा सा नारियल तेल भी लगाया जा सकता है।
मिट्टी का लेप - यदि पूरा मडबाथ न ले सकें तो केवल पेट पर भी मिट्टी का लेप लगाया जा सकता है। मिट्टी के अवयव में पेट पर ठंडे पानी का तौलिया भी कुछ हद तक लाकारी है। इसके अलावा पैरों में जलन होने पर तलवों पर मिट्टी या मेहंदी का लेप या फिर लौकी, करेले आदि का गूदा लगाया जा सकता है।

शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

स्वास्थ्य ही हमारा असली धन है


कभी सोचा है या ध्यान दिया है की जब हम बीमार होते है, तब हमको कुछ भी अच्छा नहीं लगता. न हम ठीक से काम कर पाते है, न आराम और न ही कुछ और. न हमको खाना अच्छा लगता है और न ही कही घुमने जाना. जी हाँ , हमारा स्वास्थ्य ही हमारी पूंजी है . एक स्वस्थ  व्यक्ति ही अच्छा जीवन जी सका है. इसीलिए अगर आपको अपने जीवन का पूरा आनंद उठाना है, तो अपनी सेहत का ख्याल रखिये.

एक सुखी स्वस्थ जीवन के लिए तन और मन दोनों का स्वस्थ होने बहुत आवश्यक है

कुछ नुस्खे आपके तन को स्वस्थ रखने के लिए :
  • रोज़ स्नान कीजिये
  • स्वस्थ और पौष्टिक आहार खाइए, जंक भोजन जैसे की बर्गर, पिज़ा इत्यादि न खाइए या कम खाइए
  • रोज़ व्यायाम कीजिये
  • खूब पानी पीजिये
  • रसदार फल जैसे की संतरा, सेब, आम, केला इत्यादि रोज़ खाइए
  • नारियल पानी भी सेहत के लिए बहुत लाभदायक होता है.
तन की सेहत के साथ मन का स्वस्थ रहना भी आवश्यक है.
मन या दिमाग को स्वस्थ रखने के नुस्खे :
  • टेंशन या स्ट्रेस न लें  
  • रोज़ व्यायाम करें
  • अगर कोई बात परेशां कर रही हो तो किसी मित्र से बातें या किसी कागज़ पर लिख दें
  • मधुर संगीत भी मस्तिष्क के लिए अछा होता है
  • पौष्टिक आहार खाएं व खूब जल पियें 
  • अगर आपको लगें की चिंता हद से ज्यादा हो रही है तो किसी मनोवैज्ञानिक की सलाह लें 
  • डिप्रेशन से बचें.   
  • इन साधारण बातो का ध्यान रखने से अप एक सुखी व स्वस्थ जीवन जी सकते हैं